डुमरांव : 88 वर्ष के वृद्ध साहित्यकार ने युवाओं के लिए खोला पुस्तकालय

Updated at : 04 Aug 2017 4:09 PM (IST)
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डुमरांव : 88 वर्ष के वृद्ध साहित्यकार ने युवाओं के लिए खोला पुस्तकालय

डुमरांव : अमूमन समाज में देखा जाता है कि रिटायर होने के बाद अधिकतर बुजुर्ग थक – हार कर बैठ जाते हैं. जीवन में अंतिम पड़ाव में आकर वृद्ध अपने – आप को निरोग नहीं समझते हैं, लेकिन इन सभी समस्याओं को दरकिनार कर डुमरांव अनुमंडल के कोरानसराय पंचायत के कोरान गांव के रहने वाले […]

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डुमरांव : अमूमन समाज में देखा जाता है कि रिटायर होने के बाद अधिकतर बुजुर्ग थक – हार कर बैठ जाते हैं. जीवन में अंतिम पड़ाव में आकर वृद्ध अपने – आप को निरोग नहीं समझते हैं, लेकिन इन सभी समस्याओं को दरकिनार कर डुमरांव अनुमंडल के कोरानसराय पंचायत के कोरान गांव के रहने वाले प्रसिद्व साहित्यकार पंडित दामोदर दत्त मिश्र ’प्रसुन्न’ सामिजक कार्यो में बढ़ – चढ़कर हिस्सा लेते हैं. प्रसुन्न कहते हैं समय के साथ अपने आप को ठीक रखने के लिए व्यस्त रखना ही मेरी जिन्दगी की सबसे बडी़ जिम्मेदारी है. प्रसुन्न जी अभी भी 88 वर्ष के उम्र में अपने आप को थका हारा नही समझते ये नित्य नये कार्यो के प्रति लगनशील रहते है. इनके जज्बे इतने साहसी कि आज भी हमेशा इनमें कुछ न कुछ करने की चाहत रहती है. इन्होने अपने जीवन के अंतिम पडाव़ पर कुछ ऐसा ही करके मिसाल कायम किये हैं.

मिश्रा जी ने खोला पुस्तकालय
पंडित मिश्र कुछ माह पहले ही आज के युवाओं को शिक्षा के प्रति देखकर काफी चिंतित रहा करते थे, इन्होने इस बारे में काफी गहन अध्ययन किया और अपने पेंशनर समाज के लोगों से मिलकर क्षेत्र में युवाओं को शिक्षा के प्रति जागरूककरने के लिए एक पुस्तकालय खोलने की बात रखी, पेंशनर समाज के लोगों ने एकजुट होकर काफी साथ दिया, पुस्तकालय के संस्थापक श्री मिश्र ने बताया कि पुस्तकाल के लिए जगह की व्यवस्था के लिए जनप्रतिनिधि व पेंशनर समाज के कार्यकारी सचिव सत्यदेव मिश्र, वाचनालय अघ्यक्ष लक्ष्मीकांत पाठक, राजेन्द्र सिंह, हृदयानंद पांडेय, लक्षमण दूबे, ज्ञान प्रकाश तिवारी सहित सैकडों लोगों का भरपुर सहयोग मिला, जिसके बाद पुस्तकालय का नामकरण करप्रसार पुस्ताकालय रखा गया है. प्रसुन जी का कहना है कि अब इस पुस्तकालय में पेंशनरों को मिल बैठकर अघ्ययन करने के साथ युवाओं को शिक्षा के प्रतिजागरूक करने की तमन्ना रह गयी है. जिससे युवाओं को शिक्षा के प्रति मजबूती मिल सके.
पेंशनरो को किये एकजुट
अपने बातचीत के दौरान इन्होने बताया कि हमे जीवन में हार्दिक प्रसन्नता उस वक्त हुई जब हमने सेवानिवृत होने के बाद से क्षेत्र के सभी पेंशनरों को एकजुट किया और सभी के साथ मिल बैठकर सभी के निर्णय से पेंशनर समाज की स्थापना अगस्त 2015 में की गयी, जिससे सभी पेंशनरो में खुशी की लहर दौड़पडी़ इस समाज की स्थापना के शुरूआत में करीब एक दर्जन लोग जुडे़ थे और धीरे-धीर कुल अब 17 सौ सदस्य पेंशनर समाज में शामिल हो चूके है.
शिक्षा क्षेत्र में भी रहे आगे
पंडित दामोदर दत्त मिश्र का जन्म 16 जनवरी1932 ई. को इनके पैतृक आवास कोरानसराय में हुआ था. मां बाप को यह पता नही था की प्रसुन्न एक दिन शिक्षक बनकर शिक्षा जगत में युवा लड़के – लड़कियों के बीच ज्ञान फैलाने का काम करेंगे., अनुमंडल क्षेत्र के अमीर हाई स्कुल बगेन में 1 दिसंबर 1955 से कार्यरत होकर संस्कृत, हिन्दी, अंग्रेजी विषय के जानकार शिक्षक रहे. 31जनवरी 1992 में सेवानिवृत होकर भी पुस्तक लिखें जिसमें राष्ट्र लहरी, कर्मकांड विद्वयोतिनी, परासर स्मृति सहित छह पुस्तकों को लिख अपना ख्याति प्राप्त किए है. जिसमें इनकी राष्ट्र लहरी पुस्तक को देश – विदेश में लोगों ने काफी सराहा.
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