नये सिरे से शहर और गांवों की भूमि का हुआ वर्गीकरण
Updated at : 15 Jul 2017 12:18 PM (IST)
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जिन जगहों पर नहीं हुआ है, वहां के सीओ को दिया गया निर्देश शहरी क्षेत्र में छह, तो ग्रामीण क्षेत्रों में सात वर्गों में बंटेगी भूमि बक्सर : जिले में जमीन का नये सिरे से वर्गीकरण हो रहा है. नये वर्गीकरण के आधार पर ही जमीन की कीमत आंकी जायेगी. इसके साथ ही रजिस्ट्री का […]
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जिन जगहों पर नहीं हुआ है, वहां के सीओ को दिया गया निर्देश
शहरी क्षेत्र में छह, तो ग्रामीण क्षेत्रों में सात वर्गों में बंटेगी भूमि
बक्सर : जिले में जमीन का नये सिरे से वर्गीकरण हो रहा है. नये वर्गीकरण के आधार पर ही जमीन की कीमत आंकी जायेगी. इसके साथ ही रजिस्ट्री का दर भी निर्धारित किया जायेगा. इसको लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गयीं हैं. कई जगहों पर, तो इसे लागू भी कर दिया गया है.
इसके लिए सभी सीओ को भूमि के वर्गीकरण का टास्क दिया गया है. जमीनों का वर्गीकरण होने से किसानों को फायदा मिलेगा. जमीन को छह-सात उप श्रेणियों में विभाजित किया जायेगा. शहरी क्षेत्र में जमीनों का वर्गीकरण छह भाग में, तो ग्रामीण क्षेत्रों में सात भागों में जमीन बांटी जायेगी. जिलाधिकारी रमण कुमार के नेतृत्व में टीम का गठन किया गया है. जमीन के वर्गीकरण को लेकर सभी सीओ को आवश्यक निर्देश दिये गये हैं. वर्तमान में जिले में अलग-अलग जमीन की दर्जनों श्रेणियां हैं, जिससे सही आकलन नहीं हो पा रहा है.
इस तरह होगा जमीन का वर्गीकरण
ग्रामीण क्षेत्र : व्यावसायिक भूमि इसका उपयोग व्यावसायिक उद्देश्य के लिए किया जा रहा है.औद्योगिक भूमि- उस क्षेत्र या भूखंड, जिसे राज्य सरकार या केंद्र सरकार ने औद्योगिक क्षेत्र घोषित किया है या इस पर कोई औद्योगिक प्रतिष्ठान संचालित है.
आवासीय भूमि- ऐसी भूमि, जहां गांव बसा है. उस गांव के अंतिम घर से चारों ओर 200 मीटर का क्षेत्र भी आवासीय भूमि मानी जायेगी.
विकासशील भूमि- नेशनल व स्टेट हाइवे की दोनों तरफ की पट्टी के 100 मीटर तक का क्षेत्र विकासशील श्रेणी में आयेगा. मेजर डिस्ट्रिक्ट रोड (एमडीआर) की दोनों तरफ की पट्टी का 50 मीटर के क्षेत्र को विकासशील घोषित किया जायेगा. इसके अतिरिक्त अगर कोई अन्य सड़क गांव से गुजरती है, तो उससे सटी भूमि भी विकासशील क्षेत्र मानी जायेगी.
सिंचित भूमि- ऐसी भूमि जहां सरकारी या निजी स्रोत से सिंचाई की व्यवस्था हो और एक से अधिक फसल की उपज होती हो.
असिंचित भूमि- ऐसी भूमि, जिसमें साल में एकमात्र फसल होती हो.
बलुआही, पथरीली, दियारा एवं चंवर भूमि- ऐसी भूमि, जिसमें या तो पानी हमेशा जमा रहने के कारण अथवा अन्य कारणों से किसी प्रकार की फसल नहीं उपजायी जा सकती हो.
शहरी क्षेत्र : प्रधान सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि- नगर पर्षद की तरफ से अधिसूचित सड़कों की सूची के आधार पर जो भूमि या खेसरा संख्या प्रधान सड़क की तरफ खुलती है. चाहे मकान हो या खाली भूमि हो, व्यावसायिक श्रेणी की भूमि मानी जायेगी.
ऐसी भूमि के लिए व्यावसायिक एवं आवासीय दर एक ही होगी.
मुख्य सड़क व्यावसायिक/आवासीय भूमि- नगर पर्षद की तरफ से अधिसूचित सड़कों की सूची के आधार पर जमीन की दो अलग-अलग श्रेणियां होंगी.
औद्योगिक भूमि-अगर शहरी क्षेत्र में भूमि का उपयोग उद्योग लगाने के लिए या औद्योगिक भूमि के रूप में चिह्नित की गयी हो या इस भूमि पर उद्योग लगा हो, इस जमीन को औद्योगिक श्रेणी की भूमि मानी जायेगी.
सड़क के किनारे मौजूद भूमि को शाखा सड़क व्यावसायिक/आवासीय माना जायेगा. दोनों तरह की जमीन को चिह्नित कर अलग-अलग दरों का निर्धारण किया जायेगा.
अन्य सड़क (गली) आवासीय भूमि-नगर पर्षद/नगर पंचायत की तरफ से अधिसूचित सड़कों की सूची के आधार पर जो भूमि अन्य सड़क (गली) पर मौजूद है, उसे अन्य सड़क (गली) आवासीय भूमि माना जायेगा. इस मार्ग पर चार चक्का वाहन नहीं गुजर सकते हैं.
विकासशील भूमि- शहरी क्षेत्र की ऐसी जमीन, जो वर्तमान में तो आबादी क्षेत्र से निकट है, लेकिन पूरी तरह से कृषि कार्य हो रहा है. लेकिन, भविष्य में विकास होने की संभावना है. उसे विकासशील भूमि की श्रेणी में रखा जायेगा.
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