बिहार में अब प्रोफेसर नहीं कर सकेंगे राजनीति, विश्वविद्यालयों से अलग होंगे डिग्री कॉलेज, सम्राट सरकार ला रही नया विधेयक

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सम्राट चौधरी की फाइल फोटो

Bihar Government: बिहार में उच्च शिक्षा से जुड़े नियमों में बदलाव होने जा रहा है. सरकार नए विधेयक के जरिए कॉलेज शिक्षकों के राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर रोक लगाने की तैयारी में है. साथ ही डिग्री कॉलेजों के संचालन और शिक्षकों की नियुक्ति व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण बदलाव प्रस्तावित हैं.

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Bihar Government: बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था जल्द बदल सकती है. राज्य सरकार मानसून सत्र में नया उच्च शिक्षा विधेयक लाने की तैयारी में है. इस कानून के लागू होने के बाद डिग्री कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की व्यवस्था अलग-अलग होगी. साथ ही शिक्षकों के लिए भी कई नए नियम लागू किए जाएंगे.

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शिक्षकों की राजनीति पर लगेगी रोक

नए विधेयक में कॉलेज शिक्षकों के राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने पर रोक लगाने का प्रस्ताव है. अगर यह कानून लागू होता है तो शिक्षक किसी राजनीतिक दल या विचारधारा का सार्वजनिक समर्थन, प्रचार या लेखन नहीं कर सकेंगे.

विश्वविद्यालयों से अलग होंगे डिग्री कॉलेज

सरकार का प्रस्ताव है कि राज्य के करीब 481 सरकारी डिग्री कॉलेजों को विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक नियंत्रण से हटाकर सीधे उच्च शिक्षा विभाग के अधीन किया जाए. अभी ये कॉलेज राज्य के 12 विश्वविद्यालयों के तहत संचालित होते हैं. नया कानून लागू होने के बाद इनका संचालन, प्रशासन और अन्य फैसले सीधे विभाग करेगा.

विश्वविद्यालयों का फोकस होगा पीजी और रिसर्च

नई व्यवस्था लागू होने के बाद विश्वविद्यालयों की भूमिका मुख्य रूप से स्नातकोत्तर (PG) शिक्षा और शोध तक सीमित रहेगी. वहीं स्नातक (UG) कॉलेजों का पूरा प्रबंधन सरकार के अधीन होगा.

नियुक्ति और तबादले का अधिकार सरकार के पास

प्रस्तावित कानून के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति, तबादला, पदोन्नति और सेवा से जुड़े फैसले अब विश्वविद्यालय नहीं, बल्कि उच्च शिक्षा विभाग करेगा. इसके लिए पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 में भी संशोधन की तैयारी है.

नियुक्ति के नियम भी बदलेंगे

सरकार सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति के नियमों में भी बदलाव करने जा रही है. प्रस्ताव के मुताबिक अब नेट (NET) और पीजी डिग्री न्यूनतम योग्यता होगी. पीएचडी को अनिवार्य योग्यता से हटाने का प्रस्ताव रखा गया है.

विश्वविद्यालय प्रोफेसर बनने का मौका नहीं मिलेगा

नई व्यवस्था लागू होने के बाद डिग्री कॉलेजों में कार्यरत शिक्षक विश्वविद्यालय में प्रोफेसर नहीं बन सकेंगे. अभी तक अनुभव और पदोन्नति के आधार पर यह अवसर मिलता था, लेकिन नया कानून लागू होने पर यह व्यवस्था खत्म हो जाएगी.

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हर जिले में होगा उच्च शिक्षा पदाधिकारी

सरकार हर जिले में एक उच्च शिक्षा पदाधिकारी तैनात करने की भी तैयारी कर रही है. यह अधिकारी जिले के सभी सरकारी डिग्री कॉलेजों की पढ़ाई, प्रशासन और अन्य गतिविधियों की निगरानी करेगा.

छात्रों और शिक्षकों पर पड़ेगा सीधा असर

अगर यह विधेयक पास हो जाता है तो बिहार की उच्च शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा. कॉलेजों का संचालन सीधे सरकार के हाथ में होगा और शिक्षकों की नियुक्ति से लेकर प्रशासन तक की पूरी व्यवस्था नए नियमों के तहत चलेगी.

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