बिहार के हर थाने में तैनात होगा कम्युनिटी पुलिस अफसर, जानें क्या होगी जिम्मेदारी, हेडक्वार्टर ने जारी की गाइडलाइन
बिहार पुलिस हेडक्वार्टर की तस्वीर
Bihar Police: बिहार के हर थाने में अब एक कम्युनिटी पुलिस अफसर तैनात होगा. पुलिस मुख्यालय ने इसकी गाइडलाइन जारी कर दी है. नई व्यवस्था का मकसद पुलिस-पब्लिक के बीच दूरी कम करना और आम लोगों की समस्याओं का तेजी से समाधान करना है.
Bihar Police: बिहार में पुलिस और आम लोगों के बीच बेहतर तालमेल बनाने के लिए पुलिस मुख्यालय ने बड़ा फैसला लिया है. अब राज्य के सभी थानों में एक-एक कम्युनिटी पुलिस अफसर को तैनात किया जाएगा. इसका मकसद पुलिस-पब्लिक के बीच दूरी कम करना और लोगों की शिकायतों व समस्याओं पर तेजी से कार्रवाई करना है.
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पुलिस मुख्यालय ने मंगलवार को इस संबंध में विस्तृत गाइडलाइन जारी कर दी है. थानेदार अपनी टीम के किसी योग्य पुलिस अधिकारी या अपर थानेदार को कम्युनिटी पुलिसिंग की जिम्मेदारी सौंपेंगे.
हर थाने में बनेगा सामुदायिक पुलिसिंग पंजी
कम्युनिटी पुलिसिंग की गतिविधियों का रिकॉर्ड रखने के लिए हर थाने में सामुदायिक पुलिसिंग पंजी बनाई जाएगी. इसमें थाने की ओर से किए गए सामुदायिक कार्यक्रमों और लोगों से जुड़े कार्यों का विवरण दर्ज होगा.
बिहार पुलिस एक्ट 2007 के प्रावधानों के तहत इस व्यवस्था को लागू किया जाएगा. डीजीपी विनय कुमार ने बताया कि सभी जिलों के एसएसपी और एसपी को जरूरी निर्देश दे दिए गए हैं.
जिले के एसपी हर महीने होने वाली अपराध गोष्ठी में कम्युनिटी पुलिसिंग की प्रगति की समीक्षा करेंगे.
कम्युनिटी पुलिसिंग में इन बातों पर रहेगा जोर
नई व्यवस्था के तहत पुलिस अधिकारियों को कई बिंदुओं पर खास ध्यान देना होगा.
- हर नागरिक के साथ सम्मानजनक और निष्पक्ष व्यवहार करना.
- लोगों के सहयोग से अपराध की रोकथाम करना.
- स्थानीय समस्याओं का समाधान समुदाय की भागीदारी से करना.
- हर थाने में मासिक और वार्षिक कार्ययोजना तैयार करना.
- लोगों से जरूरी सूचनाओं का आदान-प्रदान करना.
- सामाजिक सद्भाव को बढ़ावा देना.
- किसी भी व्यक्ति के साथ पक्षपात नहीं करना.
स्कूल-कॉलेज से लेकर बैंक तक होगी नियमित बैठक
कम्युनिटी पुलिसिंग के तहत पुलिस की पहुंच सिर्फ थाने तक सीमित नहीं रहेगी. बीट पुलिसिंग के जरिए हर मोहल्ले और गांव तक पुलिस की सीधी पहुंच बनाने की कोशिश होगी. लोग अपनी समस्याओं के लिए सीधे बीट पदाधिकारी से संपर्क कर सकेंगे. स्कूल और कॉलेज के अलावा बाजार, बैंक और अस्पतालों के साथ भी नियमित बैठकें की जाएंगी.
इसका मकसद छात्रों, व्यापारियों और आम लोगों की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को समय पर समझना और उनका समाधान करना है.
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महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों के लिए विशेष कार्यक्रम
नई व्यवस्था में वरिष्ठ नागरिकों, महिलाओं, बच्चों और वंचित वर्गों पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. इनके लिए थानों में संपर्क और सहायता से जुड़े कार्यक्रम चलाए जाएंगे.
पुलिस और समुदाय के बीच बेहतर संवाद से जमीन विवाद, नशाखोरी, साइबर अपराध और अफवाहों जैसी समस्याओं पर भी नियंत्रण की कोशिश होगी.
पुलिसिंग के नाम पर चंदा नहीं ले सकेंगे अफसर
गाइडलाइन में पुलिसकर्मियों के लिए कुछ स्पष्ट प्रतिबंध भी तय किए गए हैं. कम्युनिटी पुलिसिंग के नाम पर किसी भी व्यक्ति से चंदा या आर्थिक सहयोग नहीं लिया जाएगा.
गोपनीय सूचनाओं और नागरिकों की निजी जानकारी को सार्वजनिक नहीं किया जा सकेगा. पुलिसकर्मियों को कानून और मानवाधिकारों के खिलाफ कोई काम नहीं करना होगा. इन नियमों का उल्लंघन होने पर संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी.
एसपी करेंगे हर महीने मॉनिटरिंग
कम्युनिटी पुलिसिंग की पूरी व्यवस्था की निगरानी जिले के एसपी करेंगे. मासिक अपराध गोष्ठी में इसकी प्रगति की समीक्षा होगी.
पुलिस मुख्यालय का मानना है कि नई व्यवस्था से पुलिस को स्थानीय समस्याओं और अपराध से जुड़ी सूचनाएं समय पर मिल सकेंगी. वहीं, आम लोगों को भी पुलिस तक अपनी बात पहुंचाने का आसान माध्यम मिलेगा.
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