भूत, वर्तमान व भविष्य सभी अंतर्यामी भगवान के ही रूप
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :10 Dec 2016 7:27 AM (IST)
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श्री सीताराम विवाह महोत्सव को भोली बाबा ने संबोधित किया आरा : भूत, वर्तमान एवं भविष्य सभी अंतर्यामी भगवान के ही रूप हैं. जल, थल, वायु आदि समस्त ब्रह्मांड का संचालन वहीं सर्वशक्तिमान भगवान करते हैं. उक्त बातें वीर कुंवर सिंह मैदान स्थित महावीर मंदिर परिसर में श्रीसीताराम विवाह महोत्सव के अवसर पर वैदिक रीति […]
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श्री सीताराम विवाह महोत्सव को भोली बाबा ने संबोधित किया
आरा : भूत, वर्तमान एवं भविष्य सभी अंतर्यामी भगवान के ही रूप हैं. जल, थल, वायु आदि समस्त ब्रह्मांड का संचालन वहीं सर्वशक्तिमान भगवान करते हैं. उक्त बातें वीर कुंवर सिंह मैदान स्थित महावीर मंदिर परिसर में श्रीसीताराम विवाह महोत्सव के अवसर पर वैदिक रीति से विवाह का पुजन कराते हुए भक्तों को संबोधित करते यज्ञाचार्य भोली बाबा ने कही. उन्होंने कहा कि आदिपुरूष परमात्मा से इस विराट की उत्पति हुई एवं ब्रह्मांड की भी उत्पति हुई.
ब्रह्मांड उत्पन्न करने वाले ब्रह्म की प्रार्थना का माध्यम कर्मकांड है. इसमें विनियोग, करन्यास, अंगन्यास एवं ज्ञान के साथ अभिेषेक होते हैं. वहीं रामचरित मानस के नवाह्न परायण पाठ का आठवां विश्राम पूरा करते हुए योगा बाबा ने कहा कि हनुमान जी मात्र एक ऐसे देवता हैं, जिन्हें माता सीता ने चारों युगों में प्रतापवान बने रहने का आशीर्वाद दिया. हनुमान जी की पूजा से बल, बुद्धि की प्राप्ति होती है और सभी कष्टों का नाश होता है. इनके शरण में जाने से आठों सिद्धियों एवं नौ निधियों की प्राप्ति होती है. इस अवसर पर बक्सर के लक्ष्मी नारायण मंदिर के पीठाधीश्वर गोपालाचार्य द्वारा भागवत कथा के माध्यम से भक्तों को बताया गया कि भगवान अजन्मा है और समस्त धर्मों के मूल में वहीं हैं.
चराचर जगत का कल्याण भी वहीं करते हैं. उन्होंने कहा कि देवर्षि नारद जी ने बताया कि धर्म के 30 लक्षण हैं. संतों के परम आश्रय भगवान श्रीकृष्ण के नाम, गुण, लीला आदि श्रवण, कीर्तन, स्मरण, सेवा, पूजा तथा उनके प्रति आत्म समर्पण के भाव से सर्वात्मा भगवान प्रसन्न होते हैं. ब्राह्मणों की कई श्रेणियां होती हैं. कुछ ब्राह्मणों की निष्ठा कर्मकांड में, कुछ की तपस्या में, कुछ की वेदों व प्रवचन में, कुछ की आत्मज्ञान में तथा कुछ ब्राह्मणों की निष्ठायोग में होती है. जो इनसे अलग होते हैं, उनका ब्राह्ण्त्व समाप्त हो जाता है.
अधर्म की पांच शाखाएं विधर्म, परधर्म, आभास, उपमा और छल हैं. कार्यक्रम में मुक्तेश्वर उपाध्याय ने मातृ शक्ति के तीन रूपों का विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि एक जन्म देने वाली, दूसरा भरण-पोषण करने और तीसरा भक्तों की रक्षा करने वाली तथा दुष्टों की संहार करने वाली मां होती है. कार्यक्रम के अंत में रूकमिणी विवाह से संबंधित झांकी का आयोजन किया गया तथा आरती करवाई गयी. इस अवसर पर रविशंकर तिवारी, गुड्डु बाबा, उमेश तिवारी, उषा पांडेय, उर्मिला सिंह, उर्मिला सिन्हा, आशा देवी, दीप्ति सिंह चौहान, राधिका देवी आदि उपस्थित थे. धन्यवाद ज्ञापन शशि बाबा ने किया.
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