24 घंटे में ही पहुंचाएं राहत

Published at :27 Apr 2016 12:47 AM (IST)
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24 घंटे में ही पहुंचाएं राहत

निर्देश . अग्निकांड के पीड़ितों को अब मिलेगी राहत घटनास्थल पर अंचलाधिकारी को सबसे पहले पहुंचना होता है जरूरी मृत्यु पर 1 लाख, अंग-भंग होने पर 50 हजार मकान क्षतिग्रस्त होने पर 25 हजार झोंपड़ी जलने पर दो हजार रुपये अनुदान राशि का है प्रावधान आरा : अप्रैल माह में भोजपुर जिले में लगभग 40 […]

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निर्देश . अग्निकांड के पीड़ितों को अब मिलेगी राहत

घटनास्थल पर अंचलाधिकारी को सबसे पहले पहुंचना होता है जरूरी
मृत्यु पर 1 लाख, अंग-भंग होने पर 50 हजार
मकान क्षतिग्रस्त होने पर 25 हजार
झोंपड़ी जलने पर दो हजार रुपये अनुदान राशि का है प्रावधान
आरा : अप्रैल माह में भोजपुर जिले में लगभग 40 अगजनी की घटनाएं हो चुकी हैं. अब इसमें संदेह नहीं है कि पीड़ित परिवार मध्य व गरीब तबके हैं. क्योंकि कहा गया है कि जिनके घर शीशे के होते हैं, वहीं टूटते हैं. अब इन पीड़ित परिवारों को प्रशासन व सरकार द्वारा मुआवजे दिये जाते हैं या नहीं अथवा दिये भी जाते हैं, तो उनकी स्थिति क्या होती है. यह संभवत: पता नहीं चलता है.
भारत सरकार द्वारा प्रस्तावित अगलगी से पीड़ित लोगों को दी जानेवाली मुआवजे की सही जानकारियां
भारत सरकार के आपदा निर्धारित साहाय्य के आलोक में राहत कोष एवं राष्ट्रीय आपदा आकस्मिकता निधि के तहत अग्निकांड के रूप में प्राकृतिक आपदा से पीड़ित परिवारों को घटना घटित होने के 24 घंटे के भीतर राहत मुहैया कराना सुनिश्चित किया जाता है. घटना की सूचना मिलते ही अंचलाधिकारी को तुरंत घटनास्थल पर पहुंचना चाहिए एवं जिला या अनुमंडल स्तर के पदाधिकारी की प्रतिनियुक्ति निर्धारित है.
अग्निकांड के कारण घायल या मृत्यु होने पर
अग्निकांड से हुई मृत्यु के कारण एक लाख रुपये प्रति मृतक के परिजन को देने का प्रावधान है. अग्निकांड के कारण विकलांग होने यानी अंग-भंग होने की स्थिति में 3500 रुपये प्रति भुगतान करने का प्रावधान है. अगर 40 प्रतिशत से अधिक विकलांगता होने पर 50000 रुपये प्रति व्यक्ति देना अनिवार्य है. हाथ या पैर आदि की विकलांगता 75 प्रतिशत से अधिक होने पर सरकारी चिकित्सक या चिकित्सा परिषद द्वारा प्रमाणपत्र दिये जाने पर साहाय्य लेने के हकदार हैं.
वहीं अग्निकांड में गंभीर रूप से घायल होने पर 7500 रुपये प्रति व्यक्ति अनुदान मिलना चाहिए. अगर एक सप्ताह से अधिक अस्पताल में भरती रहने पर 2500 रुपये प्रति व्यक्ति अनुदान देने का प्रावधान हैं.
खाद्यान्न, वस्त्र एवं बरतन के रूप में राहत
अग्निपीड़ित परिवार को तत्काल 25 किलो गेहूं एवं 25 किलो चावल प्रति परिवार देने का प्रावधान है. वहीं वस्त्र के रूप में प्रति परिवार 1000 रुपये देना अनिवार्य हैं. जबकि बरतन के जल जाने पर भी 1000 रुपये अनुदान राशि देने का प्रावधान निर्धारित है. इन सब साहाय्य कार्यों के लिए अंचलाधिकारी को विशेष रूप से जिम्मेवारी सौंपी गयी है.
अग्निकांड में मकान क्षतिग्रस्त होने पर साहाय्य अनुदान
अगर अग्निकांड से जब मकान की मरम्मत संभव न हो, तो पुनर्निर्माण करने के लिए अनुदान प्राप्त होते हैं. इसके तहत पक्के मकान की क्षति के लिए 25000 रुपये प्रति मकान तथा कच्चा मकान क्षतिग्रस्त होने पर 10000 रुपये प्रति मकान देने का प्रावधान है. अब अगर पक्का मकान मात्र क्षतिग्रस्त हुआ है, तो मरम्मत के लिए 5000 रुपये, कच्चा मकान के लिए 2500 रुपये एवं आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त मकान के लिए 1500 रुपये प्रति मकान देने का प्रावधान है. वहीं अगर झोंपड़ी क्षतिग्रस्त या बरबाद होने पर प्रति झोंपड़ी 2000 रुपये देने का प्रावधान है.
अंचलाधिकारी का दायित्व
जब कहीं भी अग्निकांड हो, तो वे अविलंब घटनास्थल पर पहुंचे और अग्निकांड से कुप्रभावित परिवारों के बीच सरकार द्वारा निर्धारित मान दर के अनुरूप 24 घंटे के अंतर्गत पीड़ितों को राहत सामग्री मुहैया कराना सुनिश्चित करेंगे. वहीं अंचलाधिकारी द्वारा किये गये साहाय्य कार्यों का पर्यवेक्षण अनुमंडलाधिकारी या जिलास्तरीय पदाधिकारी करेंगे.
जिलाधिकारी द्वारा प्रतिनियुक्त ऐसे पदाधिकारी अग्निकांड से हुई क्षति एवं किये गये साहाय्य कार्य का विवरण जिलाधिकारी को सौंपेंगे, ताकि सरकार को 24 घंटे के भीतर जिलाधिकारी सरकार को वस्तुस्थिति से अवगत करा सकें.
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