सतर्कता . छपरा में बम ब्लास्ट के बाद सिविल कोर्ट में और कड़ी की गयी सुरक्षा-व्यवस्था

Published at :19 Apr 2016 1:01 AM (IST)
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सतर्कता . छपरा में बम ब्लास्ट के बाद सिविल कोर्ट में और कड़ी की गयी सुरक्षा-व्यवस्था

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बंदियों की होती है पेशी सीसीटीवी से कोर्ट परिसर की सभी गतिविधियों पर रखी जाती है नजर आरा : हाल के दिनों में हुए कोर्ट परिसर में वारदात से यह साफ हो गया है कि अब न्याय का मंदिर भी सुरक्षित नहीं रह गया है. अपराधी कोर्ट परिसर की लचर सुरक्षा व्यवस्था […]

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वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से बंदियों की होती है पेशी

सीसीटीवी से कोर्ट परिसर की सभी गतिविधियों पर रखी जाती है नजर
आरा : हाल के दिनों में हुए कोर्ट परिसर में वारदात से यह साफ हो गया है कि अब न्याय का मंदिर भी सुरक्षित नहीं रह गया है. अपराधी कोर्ट परिसर की लचर सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठा रहे हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि आरा और छपरा में बंदियों ने भागने के लिए महिलाओं का सहारा लिया.
आरा कोर्ट में कुख्यात बंदी लंबू शर्मा ने भागने के लिए उत्तर प्रदेश की नगीना देवी का इस्तेमाल किया था. ब्लास्ट होने के साथ ही लंबू शर्मा और अखिलेश उपाध्याय फरार हो गये थे. इसके पहले भी आरा कोर्ट परिसर में बम ब्लास्ट की घटना हुई थी, जिसमें एक अधिवक्ता की मौत हो गयी थी. लोग न्याय की उम्मीद लेकर कोर्ट का सहारा लेते हैं. ऐसे में कोर्ट परिसर में हो रही इस तरह की वारदात से कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़े हो गये हैं.
कुख्यात बंदियों की वीडियो कॉन्फेंिसंग से होती है पेशी : आरा कोर्ट में इस तरह की घटना की पुनरावृति न हो, इसके लिए सुरक्षा में कहीं भी चूक होने का मौका जिला प्रशासन द्वारा नहीं दिया जा रहा है. कुख्यात बंदियों की कोर्ट में पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की जाती है.
कोर्ट परिसर में बम ब्लास्ट के बाद चाक-चौबंद हुई सुरक्षा व्यवस्था :
बिहार में इस तरह की 23 जनवरी, 2015 को आरा कोर्ट परिसर में पहली घटना घटी थी. बम बलास्ट की घटना साल का काफी चर्चा में रही. इसके बाद कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था में काफी परिवर्तन किया गया है. सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसको लेकर कोर्ट परिसर में सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गयी है.
वाहनों को कोर्ट परिसर में जाना पूरी तरह वर्जित हैं. केवल न्यायिक अधिकारी ही वाहन के साथ परिसर में प्रवेश करते हैं.विगत 23 जनवरी, 2015 को घटित बम बलास्ट की घटना के बाद सिविल कोर्ट का नजारा पूरी तरह बदल गया है. मुख्य द्वार से लेकर हाजत तक की सुरक्षा व्यवस्था हाईटेक कर दी गयी है. तत्कालीन मुख्य न्यायाधिश एल नरसिंह रेड्डी के आदेश के बाद 24 घंटे के अंदर कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था बढा दी गयी थी. जिसके तहत त्रिस्तरीय सुरक्षा,
बंदियों का उपास्थापन और सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंडल कारा से ले आना और ले जाना शामिल है. वहीं पूरा परिसर सीसीटीवी कैमरे से लैस कर दिया गया है. इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे से कोर्ट परिसर की सारी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है. साथ ही लैंड माइंस डिटेक्टर लेकर जवान चारों तरफ घुमते रहते हैं. डीएसपी और इंस्पेक्टर प्रतिदिन आकर सुरक्षा में तैनात जवानों को निर्देश देते हैं.
आरा : हाल के दिनों में हुए कोर्ट परिसर में वारदात से यह साफ हो गया है कि अब न्याय का मंदिर भी सुरक्षित नहीं रह गया है. अपराधी कोर्ट परिसर की लचर सुरक्षा व्यवस्था का फायदा उठा रहे हैं. सबसे चिंता की बात यह है कि आरा और छपरा में बंदियों ने भागने के लिए महिलाओं का सहारा लिया. आरा कोर्ट में कुख्यात बंदी लंबू शर्मा ने भागने के लिए उत्तर प्रदेश की नगीना देवी का इस्तेमाल किया था. ब्लास्ट होने के साथ ही लंबू शर्मा और अखिलेश उपाध्याय फरार हो गये थे. इसके पहले भी आरा कोर्ट परिसर में बम ब्लास्ट की घटना हुई थी, जिसमें एक अधिवक्ता की मौत हो गयी थी.
लोग न्याय की उम्मीद लेकर कोर्ट का सहारा लेते हैं. ऐसे में कोर्ट परिसर में हो रही इस तरह की वारदात से कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था पर प्रश्न चिह्न खड़े हो गये हैं.
कुख्यात बंदियों की वीडियो कॉन्फेंिसंग से होती है पेशी : आरा कोर्ट में इस तरह की घटना की पुनरावृति न हो, इसके लिए सुरक्षा में कहीं भी चूक होने का मौका जिला प्रशासन द्वारा नहीं दिया जा रहा है. कुख्यात बंदियों की कोर्ट में पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये की जाती है.
कोर्ट परिसर में बम ब्लास्ट के बाद चाक-चौबंद हुई सुरक्षा व्यवस्था :
बिहार में इस तरह की 23 जनवरी, 2015 को आरा कोर्ट परिसर में पहली घटना घटी थी. बम बलास्ट की घटना साल का काफी चर्चा में रही. इसके बाद कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था में काफी परिवर्तन किया गया है. सुरक्षा में कोई चूक न हो, इसको लेकर कोर्ट परिसर में सुरक्षा की चाक-चौबंद व्यवस्था की गयी है. वाहनों को कोर्ट परिसर में जाना पूरी तरह वर्जित हैं. केवल न्यायिक अधिकारी ही वाहन के साथ परिसर में प्रवेश करते हैं.
विगत 23 जनवरी, 2015 को घटित बम बलास्ट की घटना के बाद सिविल कोर्ट का नजारा पूरी तरह बदल गया है. मुख्य द्वार से लेकर हाजत तक की सुरक्षा व्यवस्था हाईटेक कर दी गयी है. तत्कालीन मुख्य न्यायाधिश एल नरसिंह रेड्डी के आदेश के बाद 24 घंटे के अंदर कोर्ट की सुरक्षा व्यवस्था बढा दी गयी थी. जिसके तहत त्रिस्तरीय सुरक्षा, बंदियों का उपास्थापन और सुरक्षा व्यवस्था के बीच मंडल कारा से ले आना और ले जाना शामिल है.
वहीं पूरा परिसर सीसीटीवी कैमरे से लैस कर दिया गया है. इसके साथ ही सीसीटीवी कैमरे से कोर्ट परिसर की सारी गतिविधियों पर नजर रखी जाती है. साथ ही लैंड माइंस डिटेक्टर लेकर जवान चारों तरफ घुमते रहते हैं. डीएसपी और इंस्पेक्टर प्रतिदिन आकर सुरक्षा में तैनात जवानों को निर्देश देते हैं.
क्या कहते हैं अधिवक्ता
छपरा कोर्ट परिसर में हुई बम ब्लास्ट की घटना के बाद अधिवक्ताओं ने इस घटना को दुखद बताया है.अधिवक्ता अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि कोर्ट की सुरक्षा भगवान भरोसे है. आये दिन ऐसी घटनाएं घट रही है. बावजूद प्रशासन इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं कर रहा है. वहीं अधिवक्ता दिनेश कुमार मिश्रा ने कहा कि आरा में घटित घटना के बाद भी बिहार में कोर्ट परिसर की सुरक्षा व्यवस्था सख्त नहीं की गयी. जिसका नतीजा है छपरा में आज इस तरह की घटना घटित हुई.
वहीं मनमोहन ओझा ने कहा कि कोर्ट परिसर में हो रही इस तरह की घटना सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दे रही है. वहीं बार एसोसिएशन के सचिव राजेश पांडेय उर्फ पप्पू पांडेय ने कहा कि अधिवक्ताओं को सुरक्षा देना जिला प्रशासन का कर्तव्य है, लेकिन बिहार में बार-बार घट रही इस तरह की घटना से पूरे अधिवक्ता दहशत में हैं. उन्होंने कहा कि यदि जिला प्रशासन द्वारा अधिवक्ताओं को सुरक्षा नहीं दी गयी, तो आने वाले समय में न्याय का मंदिर आये दिन लहूलुहान होता रहेगा.
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