रोक के बाद भी उत्खनन जारी
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :02 Aug 2017 7:28 AM (IST)
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बल्ले-बल्ले. छापेमारी के बाद फिर शुरू हुआ बालू का कारोबार भोजपुर जिले में सोन से बालू के अवैध खनन का खेल अब भी जारी है. पुलिस प्रशासन की कार्रवाई का भी असर बालू माफियाओं पर नहीं दिख रहा है. छापेमारी के चंद घंटे बाद ही कोइलवर सहित अन्य बालू घाटों पर लाल बालू का काला […]
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बल्ले-बल्ले. छापेमारी के बाद फिर शुरू हुआ बालू का कारोबार
भोजपुर जिले में सोन से बालू के अवैध खनन का खेल अब भी जारी है. पुलिस प्रशासन की कार्रवाई का भी असर बालू माफियाओं पर नहीं दिख रहा है. छापेमारी के चंद घंटे बाद ही कोइलवर सहित अन्य बालू घाटों पर लाल बालू का काला कारोबार शुरू हो गया है. रोक के बाद भी उत्खनन जारी है और बालू माफियाओं की चांदी कट रही है. इसमें सफेदपोशों के साथ पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों की मिलीभगत की भी चर्चा है.
कोइलवर : सियासत बदलते ही सोन नद के लाल बालू के काला कारोबार को लेकर दो दिन पूर्व भोजपुर व पटना जिले में छापेमारी अभियान चलाया गया. रविवार को की गयी छापेमारी में कोइलवर पुलिस ने सोन नद से 59 बालू मजदूर व नाविक समेत पांच बड़े नावों को जब्त किया था.
इसे लेकर बीते रविवार को सोन नदी में पूरे दिन हलचल मची रही, लेकिन पांच घंटे बाद ही बालू कारोबारी नदी में पांव पसार दिये. रविवार को रात 10 बजते ही सारण जिले के डोरीगंज से सैकड़ों नाव कोइलवर पहुंचने लगे और फिर से लाल बालू का काला कारोबार शुरू हो गया. सोन नद के लाल बालू की मांग यूपी से लेकर बंगाल तक है, जिससे बालू कारोबारियों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है. इसकी वजह से सफेदपोशों की संख्या सबसे ज्यादा है.
सोन नद के निचले इलाके में कोइलवर सुरौंधा टापू से लेकर बिंदगावा तक के क्षेत्र में इसका वर्चस्व देखने को मिल जाता है. सोन नद में बरसात के दिनों में बाढ़ आने के साथ कोइलवर पुल के आस- पास रोजाना सैकड़ों बड़ी- बड़ी नावें बालू उत्खनन के लिए पहुंचती है. जो सोन नद से बालू निकाल कर नाव पर लोड कर पुनः नदी के रास्ते ही सारण जिले के डोरीगंज घाट पर चली जाती है. वहीं से बालू ट्रकों पर लोड कर यूपी के कई जिलों, उततरी बिहार व बंगाल में मुंहमांगी कीमत पर पहुंचायी जाती है.
पिछले साल गरजी थीं बंदूकें : कोइलवर मौजा का महुई महाल, बिहटा थाना क्षेत्र का अमनाबाद व मनेर थाना क्षेत्र का सुआरमरवा एक ऐसा स्थान है, जहां बालू कटाई की लेवी वसूली के लिए वर्चस्व की लड़ाई में बंदूकें गरजती हैं. सोन नदी से सटे खेत को काट कर नहर जैसा रास्ता बनाया गया है, जहां से बड़ी नावें अंधाधुंध तरीके से बालू की अवैध कटाई करती है. गत वर्ष उक्त जमीन पर वर्चस्व कायम करने को लेकर फौजिया व सिपाही गैंग के बीच एके 47 से सैकड़ों राउंड फायरिंग हुई थी. इसमें कोइलवर थाना क्षेत्र के एक मुंशी को गोली लगने से जान गयी थी. हालांकि घटना के बाद ही पटना व भोजपुर पुलिस ने संयुक्त रूप से छापेमारी कर गैंग के कुछ लोगों व बालू उत्खनन में लगी मशीनों को जब्त किया था. इसके बाद कुछ दिनों के लिए सुनहले रेत का काला कारोबार रुक गया था. लेकिन समय बीतते ही बालू कारोबार से जुड़े माफिया ने
पैर पसार दिया.
30 सितंबर तक उत्खनन पर है रोक
सरकार के आदेश के अनुसार 1 जुलाई से 30 सितंबर तक बालू उत्खनन पर रोक लगायी गयी है. इसके बावजूद बालू व्यवसाय से जुड़े सफेदपोश लोगों ने भारी मात्रा में बालू का भंडारण कर लिया है. इस भंडारण से रैयतदार मुंहमांगी कीमत पर बालू की बिक्री करते हैं. वहीं बालू कंपनी द्वारा इ-चालान भी काटा जाता है.
जिस पर न मात्रा का जिक्र होता है न ही कितने रुपये का चालान होता है उसकी जानकारी लिखी होती है. इ चालान भी ऐसा की सिर्फ लाल प्रिंटेड पेज पर चालक का नाम, नंबर व हाथ से लिखा हुआ 16 नंबर का इ चालान होता है. इस कारण बालू लदे ट्रक को हर थाना क्षेत्र से गुजरने पर सेवा शुल्क दिया जाता है.
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