TMBU में LDC कर्मियों के वेतन पर लगी रोक, सिंडिकेट की आपात बैठक में बड़ा फैसला; गड़बड़ी की जांच के लिए कमेटी गठित

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तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय  | Prabhat Khabar Network

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) ने लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) के वेतन भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी है. आरोप है कि कुछ कर्मचारी निर्धारित सीमा से अधिक वेतन ले रहे थे. इस मामले की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन किया गया है.

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तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (TMBU) प्रशासन ने एक कड़ा कदम उठाते हुए विश्वविद्यालय के लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) के वेतन भुगतान पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है. शनिवार को प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा की अध्यक्षता में आयोजित सिंडिकेट की आपातकालीन ऑनलाइन बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया. आरोप है कि कुछ LDC कर्मी गलत तरीके से निर्धारित वेतन से अधिक राशि का भुगतान प्राप्त कर रहे थे. इस मामले की गहन जांच के लिए एक उच्चस्तरीय कमेटी का गठन भी कर दिया गया है.

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वेतन सत्यापन में गड़बड़ी, कुलपति ने दिए जांच के आदेश

सिंडिकेट की ऑनलाइन आपात बैठक में कुल पांच महत्वपूर्ण एजेंडों पर चर्चा की गई, जिनमें LDC कर्मियों का वेतन मामला प्रमुख था.

बैठक को संबोधित करते हुए प्रभारी कुलपति प्रो. विमलेंदु शेखर झा ने बताया कि उन्हें शिकायत मिली है कि टीएमबीयू के कुछ क्लर्क वेतन सत्यापन कोषांग से गलत ढंग से अपना वेतन तय कराकर, निर्धारित सीमा से अधिक का भुगतान ले रहे हैं. मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने तुरंत एक जांच कमेटी गठित कर दी है. कुलपति ने स्पष्ट किया कि जब तक इस जांच कमेटी की अंतिम रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक संबंधित कर्मचारियों के वेतन भुगतान पर रोक जारी रहेगी.

सिंडिकेट सदस्य का सुझाव किया खारिज

बैठक के दौरान सिंडिकेट सदस्य प्रो. केके मंडल ने सुझाव दिया कि चूंकि सरकार की ओर से पहले ही वेतन का भुगतान देर से किया गया है, इसलिए कर्मचारियों का वेतन फिलहाल न रोका जाए और जांच पूरी होने के बाद ही कोई दंडात्मक कार्रवाई की जाए. हालांकि, प्रभारी कुलपति ने इसे वित्त और नियमों से जुड़ा गंभीर मामला बताते हुए इस सुझाव को मानने से इनकार कर दिया.

उल्लेखनीय है कि इस वेतन गड़बड़ी के संबंध में शिक्षा विभाग ने भी एक कड़ा पत्र जारी कर अधिक भुगतान पर रोक लगाने का निर्देश दिया है. इस पत्र में विश्वविद्यालय के पूर्व रजिस्ट्रार प्रो. विकास चंद्र द्वारा उच्च शिक्षा विभाग को भेजी गई शिकायत का भी हवाला दिया गया है.

जांच के लिए 5 सदस्यीय कमेटी गठित

वेतन में हुई इस कथित गड़बड़ी की परतें खोलने के लिए टीएमबीयू प्रशासन ने एक पांच सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया है:

  • संयोजक: प्रो. रामाशीष पूर्वे (रजिस्ट्रार)
  • सदस्य: प्रो. सुरेंद्र कुमार सिंह (कॉलेज इंस्पेक्टर), प्रो. एएन सहाय (बजट पदाधिकारी), प्रो. मुश्फिक आलम (सिंडिकेट सदस्य) और ब्रज किशोर प्रसाद (वित्त पदाधिकारी).
  • सहयोग: सेक्शन ऑफिसर (SO) सर्वानंद प्रसाद कमेटी की बैठकों और दस्तावेजों की जांच में सहयोग करेंगे.

सिंडिकेट बैठक के अन्य महत्वपूर्ण फैसले

सिंडिकेट की बैठक में कई अन्य महत्वपूर्ण शैक्षणिक और प्रशासनिक निर्णय भी लिए गए:

  • प्रभारी प्राचार्यों की वापसी: नए डिग्री कॉलेजों में प्रतिनियुक्ति पर भेजे गए प्रभारी प्राचार्यों की मूल विभागों में वापसी पर विचार किया गया. तय हुआ कि केवल बीमारी या सर्जरी का कारण बताने वाले शिक्षकों के मामलों पर ही गंभीरता से विचार होगा. इसके लिए सदस्यों ने प्रभारी कुलपति को अधिकृत किया.
  • शिक्षकों की प्रोन्नति में संशोधन: 1 और 2 जुलाई को हुई चयन समिति की बैठक में जिन पांच शिक्षकों की प्रोन्नति की प्रभावी तिथि गलत दर्ज हो गई थी, उसमें बदलाव को सिंडिकेट ने अपनी सहमति दे दी.
  • प्रोन्नति और सेवा संपुष्टि: डॉ. निर्लेश कुमार द्वारा उठाए गए शेष शिक्षकों के प्रमोशन के मुद्दे पर, प्रक्रिया पूरी करने के लिए रिपोर्ट पुनः रेफरी के पास भेजने का निर्णय लिया गया. साथ ही नए डिग्री कॉलेजों में संविदा शिक्षकों की नियुक्ति के अनुमोदन, देर से योगदान करने वाले शिक्षकों को अनुमति और कुछ विषयों के शिक्षकों की सेवा संपुष्टि पर भी सिंडिकेट ने मुहर लगा दी.


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