छह महीने बाद भी फर्जी सरकारी वेबसाइट के मास्टरमाइंड तक नहीं पहुंची पुलिस, तीन आरोपी गिरफ्तार; कई राज्यों में फैला था नेटवर्क

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साइबर कैफे से चलता था फर्जी प्रमाणपत्र बनाने का खेल

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फर्जी सरकारी प्रमाणपत्र बनाने वाली 'बाब आरटीजीएस' वेबसाइट का खुलासा. मास्टरमाइंड की तलाश जारी, 3 गिरफ्तार. जानिए कैसे फैला नेटवर्क.

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Fake Government Website Case: भागलपुर.सरकारी प्रमाणपत्र बनवाने के नाम पर इस्तेमाल होने वाली वेबसाइट जैसी दिखने वाली एक अवैध वेबसाइट के जरिये फर्जी दस्तावेज तैयार करने का खेल कई राज्यों तक फैल गया था. जाति, आय, निवास और ईडब्ल्यूएस जैसे प्रमाणपत्रों को सरकारी दस्तावेज की शक्ल देने के लिए इस वेबसाइट का इस्तेमाल किया जा रहा था. साइबर कैफे संचालकों को वेबसाइट बेचकर इस अवैध कारोबार को आगे बढ़ाया जा रहा था. लेकिन इस पूरे नेटवर्क का मुख्य संचालक कौन है, इसका जवाब अब तक पुलिस को नहीं मिल सका है.

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मामले में छह महीने से अधिक समय बीत चुका है. भागलपुर साइबर थाना और सीसीएसयू यूनिट की जांच जारी है. पुलिस ने गिरोह से जुड़े तीन आरोपितों को गिरफ्तार जरूर किया है, लेकिन फर्जी वेबसाइट विकसित करने और पूरे नेटवर्क को संचालित करने वाला मास्टरमाइंड अब भी गिरफ्त से बाहर है. ऐसे में जांच के सामने सबसे बड़ी चुनौती उस व्यक्ति तक पहुंचना है, जिसने इस अवैध कारोबार की नींव रखी थी.

साइबर कैफे संचालकों को बेची जाती थी 'बाब आरटीजीएस' वेबसाइट

जांच में सामने आया था कि गिरोह ने 'बाब आरटीजीएस' नाम से एक अवैध वेबसाइट तैयार की थी. इसे अलग-अलग जगहों के साइबर कैफे संचालकों को उपलब्ध कराया जाता था. कैफे संचालक इस वेबसाइट के माध्यम से ऐसे प्रमाणपत्र तैयार करते थे, जो देखने में सरकारी दस्तावेजों जैसे लगते थे.

इनमें जाति प्रमाणपत्र, आय प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस से जुड़े प्रमाणपत्र शामिल थे. इन दस्तावेजों का इस्तेमाल सरकारी प्रमाणपत्रों के विकल्प के तौर पर किया जा सकता था, जबकि वेबसाइट खुद अवैध थी.

इस तरह वेबसाइट तैयार करने वाले और उसे खरीदकर इस्तेमाल करने वाले लोगों के बीच एक नेटवर्क काम कर रहा था. वेबसाइट की बिक्री अलग-अलग राज्यों में किये जाने की बात जांच में सामने आयी थी. इससे यह मामला केवल भागलपुर के किसी एक साइबर कैफे तक सीमित नहीं रह गया, बल्कि इसके तार दूसरे राज्यों से भी जुड़ते दिखे.

तीन गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन वेबसाइट बनाने वाला अब भी फरार

पुलिस इस मामले में अब तक तीन आरोपितों को गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार लोगों में भागलपुर का एक साइबर कैफे संचालक भी शामिल है. इसके अलावा सीतामढ़ी के मनीष को गिरफ्तार किया गया था. उसकी भूमिका वेबसाइट की बिक्री में अहम बतायी गयी है.

सारण के पप्पू को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया था. इन गिरफ्तारियों के बाद पुलिस को गिरोह के काम करने के तरीके और उसके नेटवर्क से जुड़ी कई जानकारियां मिलीं. इसके बावजूद वेबसाइट विकसित करने और पूरे कारोबार को संचालित करने वाले मुख्य आरोपित तक पुलिस नहीं पहुंच सकी है.

जांच में गिरफ्तार आरोपितों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि उनके जरिये वेबसाइट की बिक्री और उसके इस्तेमाल से जुड़ी कड़ियों को समझने में मदद मिली. हालांकि, मुख्य सरगना की गिरफ्तारी नहीं होने से इस नेटवर्क के संचालन और उसके विस्तार से जुड़े कई सवाल अब भी बने हुए हैं.

फर्जी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल कहां-कहां हुआ, यह भी अहम सवाल

इस पूरे मामले का सबसे गंभीर पहलू फर्जी सरकारी प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल है. जाति, आय, निवास और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्र कई सरकारी योजनाओं, शैक्षणिक दाखिले और अन्य प्रक्रियाओं में महत्वपूर्ण दस्तावेज होते हैं. ऐसे दस्तावेजों की नकल तैयार करने वाली वेबसाइट का इस्तेमाल होने से उनकी विश्वसनीयता और सत्यापन व्यवस्था पर भी सवाल खड़े होते हैं.

यदि कोई व्यक्ति फर्जी प्रमाणपत्र के आधार पर किसी सरकारी सुविधा या प्रक्रिया का लाभ लेने की कोशिश करता है, तो इसका असर वास्तविक पात्र लाभार्थियों पर भी पड़ सकता है. हालांकि, इस मामले में तैयार किये गये प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किन-किन उद्देश्यों के लिए हुआ और इससे कितने लोग प्रभावित हुए, इसकी जानकारी फिलहाल उपलब्ध नहीं है.

इसलिए जांच में केवल वेबसाइट बेचने वालों की पहचान करना ही नहीं, बल्कि यह पता लगाना भी महत्वपूर्ण होगा कि वेबसाइट के जरिये कितने फर्जी दस्तावेज तैयार किये गये और उनका इस्तेमाल कहां किया गया.

Fake Government Website Case: छह महीने बाद भी मास्टरमाइंड की तलाश, जांच पर टिकी निगाहें

मामले में छह महीने से अधिक समय गुजरने के बाद भी मुख्य आरोपित की गिरफ्तारी नहीं हो पाना पुलिस के लिए चुनौती बना हुआ है. भागलपुर साइबर थाना और सीसीएसयू यूनिट इस मामले की जांच कर रही है. अब तक हुई गिरफ्तारियों से नेटवर्क की कुछ कड़ियां सामने आयी हैं, लेकिन इसके मुख्य संचालक तक पहुंचना बाकी है.

मुख्य सरगना की गिरफ्तारी से यह पता चल सकेगा कि वेबसाइट किसने विकसित की, इसे किन लोगों तक पहुंचाया गया और अलग-अलग राज्यों में इसका नेटवर्क किस तरह संचालित हो रहा था. साथ ही यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि इस अवैध कारोबार से और कौन-कौन लोग जुड़े थे.

फिलहाल तीन आरोपितों की गिरफ्तारी के बावजूद मामले का सबसे अहम किरदार पुलिस की पकड़ से बाहर है. ऐसे में जांच की अगली दिशा और मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी पर सबकी नजर है.

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