भागलपुर: मरीन ड्राइव निर्माण को लेकर डॉल्फिन अभयारण्य का सर्वे, सुरक्षा प्लान के बाद मिलेगी NOC
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भागलपुर में प्रस्तावित मरीन ड्राइव निर्माण में अब गंगा डॉल्फिन अभयारण्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है. वन विभाग से NOC मिलने के बाद ही निर्माण कार्य शुरू होगा.
सुल्तानगंज के अजगैबीनाथ धाम से सबौर-फरका पंचायत तक प्रस्तावित महत्वाकांक्षी मरीन ड्राइव के निर्माण में अब गंगा डॉल्फिन अभयारण्य की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता बन गई है. परियोजना को पर्यावरण अनुकूल बनाए रखने के उद्देश्य से वन एवं पर्यावरण विभाग तथा बिहार राज्य सड़क विकास निगम लिमिटेड (बीएसआरडीसीएल) के अधिकारियों ने संयुक्त रूप से बरारी सीढ़ी घाट पहुंचकर प्रस्तावित निर्माण स्थल का जायजा लिया. इस सर्वे दल में डीएफओ आशुतोष राज के साथ वन विभाग और बीएसआरडीसीएल के कई तकनीकी व प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे.
कहलगांव तक फैला है अभयारण्य क्षेत्र, NOC लेना अनिवार्य
बीएसआरडीसीएल के अधिकारियों के अनुसार मुंगेर से सबौर क्षेत्र तक मरीन ड्राइव का निर्माण प्रस्तावित है. चूंकि अजगैबीनाथ धाम से कहलगांव तक का पूरा गंगा तटीय क्षेत्र विक्रमशिला गांगेय डॉल्फिन अभयारण्य के अंतर्गत आता है, इसलिए परियोजना के निर्माण से पूर्व वन एवं पर्यावरण विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करना अनिवार्य है. इसी कड़ी में निर्माण एजेंसी ने पर्यावरण विभाग के पास एनओसी के लिए विधिवत आवेदन किया है.
सुरक्षा प्लान की समीक्षा के बाद मंत्रालय से मिलेगी हरी झंडी
बुधवार को अधिकारियों द्वारा किए गए प्रस्तावित अलाइनमेंट सर्वे के आधार पर जलीय जीवों, विशेष रूप से डॉल्फिन के पर्यावास को नुकसान से बचाने के लिए एक विस्तृत वाइल्डलाइफ प्रोटेक्शन प्लान तैयार किया जाएगा. डीएफओ इस सुरक्षा प्लान को वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव को भेजेंगे. इसके बाद पर्यावरण मंत्रालय से अंतिम एनओसी मिलने के उपरांत ही मरीन ड्राइव निर्माण की आगे की निविदा व कार्य प्रक्रिया शुरू हो सकेगी.
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