सुलतानगंज में12,939 बच्चों के लिए बड़ी खबर, एक ही किताब में हिंदी-अंग्रेजी से आसान होगी विज्ञान-कला की पढ़ाई

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सुलतानगंज के 25 हाईस्कूलों को मिलीं 408 सेट द्विभाषिक पुस्तकें

सुलतानगंज के 25 उच्च विद्यालयों में बाइलिंगुअल पुस्तकों की शुरुआत हुई है. अब नौवीं से 12वीं कक्षा के छात्र-छात्राएं विज्ञान और कला जैसे जटिल विषयों को हिंदी-अंग्रेजी दोनों भाषाओं में आसानी से समझ सकेंगे. यह पहल लगभग 13,000 विद्यार्थियों की पढ़ाई को बेहतर बनाएगी.

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Bilingual Books in Sultanganj Schools: सुलतानगंज के बच्चों के लिए पढ़ाई की एक बड़ी मुश्किल अब आसान होने वाली है. विज्ञान का कोई कठिन सिद्धांत हो या कला विषय की जटिल अवधारणा, अब विद्यार्थियों को सिर्फ भाषा की वजह से पाठ समझने में परेशानी नहीं होगी. एक ही किताब में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में विषय सामग्री उपलब्ध होगी. पहले बच्चे हिंदी में विषय को समझ सकेंगे और फिर उसी विषय को अंग्रेजी में पढ़कर अपनी शब्दावली और भाषा की पकड़ मजबूत कर सकेंगे.

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बिहार शिक्षा परियोजना के माध्यम से सुलतानगंज प्रखंड के सभी 25 उच्च विद्यालयों के पुस्तकालयों के लिए द्विभाषिक यानी बाइलिंगुअल पुस्तकों की आपूर्ति की गयी है. इन पुस्तकों की खेप प्रखंड संसाधन केंद्र यानी बीआरसी पहुंच चुकी है. मंगलवार, 1 सितंबर को वर्ग नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थियों के उपयोग के लिए विद्यालयों को पुस्तकों का वितरण किया जाएगा.

इस पहल का सीधा लाभ सुलतानगंज प्रखंड के 12,939 छात्र-छात्राओं को मिलने की उम्मीद है.

भाषा की परेशानी के बीच पढ़ाई का नया रास्ता

कई विद्यार्थियों के लिए विषय कठिन होने से ज्यादा मुश्किल उसे समझने की भाषा होती है. खासकर विज्ञान जैसे विषयों में अंग्रेजी के तकनीकी शब्द और जटिल अवधारणाएं कई बार विद्यार्थियों के लिए चुनौती बन जाती हैं. वहीं कला विषयों में भी कई ऐसे शब्द और अवधारणाएं होती हैं, जिन्हें समझने के लिए विद्यार्थियों को अतिरिक्त मदद की जरूरत पड़ती है.

द्विभाषिक पुस्तकों की खासियत यही है कि विद्यार्थी किसी अवधारणा को पहले हिंदी में समझ सकेंगे. इसके बाद उसी विषय को अंग्रेजी में पढ़कर संबंधित शब्दों और अवधारणाओं से परिचित होंगे. इससे विषय की समझ के साथ अंग्रेजी भाषा पर पकड़ बनाने का अवसर भी मिलेगा.

25 स्कूलों के लिए 408 सेट पुस्तकें

सुलतानगंज प्रखंड के 25 उच्च विद्यालयों के लिए कुल 408 सेट द्विभाषिक पुस्तकें उपलब्ध करायी गयी हैं. इसके अलावा दो पीएम श्री विद्यालयों के लिए 86 बाइलिंगुअल पुस्तकें दी गयी हैं.

इन पुस्तकों को विद्यालयों के पुस्तकालयों में रखा जाएगा. विद्यार्थी कक्षा के अलावा पुस्तकालय में बैठकर भी इनका अध्ययन कर सकेंगे. इससे उन्हें कक्षा में पढ़ाये गये पाठ को दोबारा समझने और कठिन विषयों की तैयारी करने में मदद मिलेगी.

पुस्तकों में पाठ्यक्रम से जुड़े तथ्य, विषय सामग्री और अवधारणाओं को हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है.

विज्ञान और कला की पढ़ाई में सबसे ज्यादा फायदा

द्विभाषिक पुस्तकों का सबसे बड़ा फायदा उन विद्यार्थियों को मिल सकता है, जिन्हें अंग्रेजी माध्यम की विषय सामग्री समझने में परेशानी होती है. विज्ञान के कठिन शब्दों और अवधारणाओं को हिंदी में समझने के बाद विद्यार्थी अंग्रेजी में उसी विषय को पढ़ सकेंगे.

इससे उन्हें केवल परीक्षा की तैयारी में ही मदद नहीं मिलेगी, बल्कि आगे की पढ़ाई में इस्तेमाल होने वाली अंग्रेजी शब्दावली से भी वे परिचित होंगे. कला विषयों में भी विषय की अवधारणाओं को अपनी सहज भाषा में समझना विद्यार्थियों के लिए आसान होगा.

पुस्तकालय अब सिर्फ किताब रखने की जगह नहीं

इन पुस्तकों के पहुंचने से विद्यालयों के पुस्तकालयों की भूमिका भी बढ़ सकती है. विद्यार्थी यहां बैठकर अपनी जरूरत के अनुसार विषयवार सामग्री पढ़ सकेंगे. शिक्षक भी कक्षा में पढ़ाये गये कठिन अध्यायों को समझाने के लिए इन पुस्तकों का इस्तेमाल कर सकेंगे.

इस तरह पुस्तकालय विद्यार्थियों के लिए केवल किताबें रखने की जगह न रहकर विषयों को समझने और दोहराने का अतिरिक्त माध्यम बन सकता है.

बीआरसी से स्कूलों तक पहुंचेंगी पुस्तकें

पुस्तकों के वितरण की व्यवस्था के लिए प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी तन्नू कुमारी ने शिक्षा सेवकों की प्रतिनियुक्ति की है. बीआरसी के लेखापाल पवन कुमार ने बताया कि सभी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक और प्रभारी प्रधानाध्यापकों को बीआरसी पहुंचकर पुस्तकों का उठाव करने का निर्देश दिया गया है.

इसके बाद पुस्तकों को संबंधित विद्यालयों के पुस्तकालयों में रखा जाएगा, जहां नौवीं से 12वीं तक के विद्यार्थी उनका उपयोग कर सकेंगे.

Bilingual Books in Sultanganj Schools: हिंदी में समझ, अंग्रेजी में आत्मविश्वास

सुलतानगंज के 25 हाईस्कूलों में पहुंची ये पुस्तकें विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के दोहरे लाभ का माध्यम बन सकती हैं. एक तरफ बच्चे अपनी सहज भाषा हिंदी में कठिन विषयों को समझ सकेंगे, वहीं दूसरी तरफ अंग्रेजी में उसी पाठ को पढ़कर भाषा और शब्दावली पर पकड़ मजबूत कर सकेंगे.

खास बात यह है कि इस पहल का दायरा किसी एक स्कूल तक सीमित नहीं है. प्रखंड के सभी 25 उच्च विद्यालयों और दो पीएम श्री विद्यालयों को इसका लाभ मिलेगा. अब इन पुस्तकों का विद्यालयों में कितना प्रभावी उपयोग होता है, यही इस पहल की वास्तविक सफलता तय करेगा.

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