भागलपुर में जल-जीवन-हरियाली की बड़ी कामयाबी: 2518 तालाबों का जीर्णोद्धार, 46 लाख पौधों से संवरी धरती
सांकेतिक तस्वीर
भागलपुर में जल-जीवन-हरियाली अभियान ने 2518 जल संरचनाओं को पुनर्जीवित कर भूजल स्तर सुधारा है. लाखों पौधे रोपण व वर्षा जल संचयन से पर्यावरण संरक्षण में बड़ी क्रांति आई है.
Bhagalpur Jal Jeevan Hariyali Scheme: बिहार का भागलपुर जिला इन दिनों प्राकृतिक संतुलन और जल संरक्षण की एक ऐसी ही खामोश क्रांति का साक्षी बन रहा है. कभी पानी के संकट और घटते भूजल स्तर की चिंता से जूझने वाले इस जिले में जल-जीवन-हरियाली अभियान ने नई उम्मीदों की हरियाली बिखेर दी है. देखते ही देखते जिले की हजारों पुरानी जल संरचनाएं दोबारा पुनर्जीवित हो चुकी हैं और लाखों पेड़ धरती की रंगत बदल रहे हैं. मंगलवार को जब जल-जीवन-हरियाली दिवस के मौके पर भागलपुर के प्रमंडलीय सभागार में आंकड़ों का पिटारा खुला, तो हर कोई इस बड़े बदलाव की कहानी देखकर हैरान रह गया.
दम तोड़ते तालाबों और कुओं में लौटा पानी, 2518 जल संरचनाओं का हुआ कायाकल्प
पानी की एक-एक बूंद को सहेजने और गिरते वाटर लेवल को सुधारने के लिए भागलपुर में अभियान स्तर पर काम किया गया है. सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के तत्वावधान में आयोजित परिचर्चा के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि जिले में अब तक 2518 सार्वजनिक जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार कराया जा चुका है. इनमें सदियों पुराने तालाब, पोखर, आहर और पाइन शामिल हैं, जो कभी बदहाली का शिकार होकर सूख चुके थे. इसके साथ ही ग्रामीण इलाकों में कभी पीने के पानी का मुख्य जरिया रहे 1671 सार्वजनिक कुओं को भी नया जीवन दिया गया है. इन जल स्रोतों के जीर्णोद्धार से न केवल आसपास का भूजल स्तर ऊपर उठा है, बल्कि स्थानीय मवेशियों और किसानों के लिए भी सिंचाई का पानी सुलभ हो गया है.
सोख्ता, चेक डैम और वर्षा जल संचयन: भूजल रिचार्ज के लिए बिछाया गया बड़ा नेटवर्क
केवल पुराने तालाबों को साफ करना ही काफी नहीं था, बल्कि बारिश के पानी को बहकर बर्बाद होने से रोकना भी उतना ही जरूरी था. इसी सोच के तहत जिले में सार्वजनिक कुओं और चापाकलों के किनारे 7622 सोख्ता, रिचार्ज और जल संचयन संरचनाएं बनाई गई हैं. इसके अलावा 2135 नए खेत पोखरों का निर्माण कराया गया है, जिससे किसानों को उनके अपने खेतों में ही पानी मिल रहा है. पहाड़ी नालों और छोटी नदियों के तेज बहाव को रोककर पानी संचित करने के लिए 289 चेक डैम बनाए गए हैं. वहीं शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के 462 सरकारी व निजी भवनों की छतों पर रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम लगाया गया है, ताकि बारिश का पानी सीधे जमीन के भीतर जाकर वाटर टेबल को मजबूत कर सके.
46 लाख से ज्यादा पौधों की हरियाली और खेतों में जैविक क्रांति
जल संरक्षण के साथ-साथ पर्यावरण को शुद्ध रखने के लिए भागलपुर जिले में रिकॉर्ड पौधारोपण किया गया है. ग्रामीण विकास विभाग की जी राम जी योजना के जरिए जहां 22 लाख 50 हजार 800 पौधे रोपे गए हैं, वहीं वन विभाग ने अपनी ओर से 24 लाख 13 हजार 159 पौधे लगाकर पूरे जिले को हरा-भरा बना दिया है. हरियाली के इस महाअभियान के साथ-साथ मिट्टी की सेहत सुधारने के लिए 7268 एकड़ जमीन पर जैविक खेती को बढ़ावा दिया जा रहा है. पानी की बचत के लिए 2032 एकड़ खेतों में टपकन सिंचाई (ड्रिप इरिगेशन) अपनाई जा रही है. बिजली की बचत और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए 199 घरों की छतों पर सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं.
केवल सरकारी प्रयासों से नहीं बनेगी बात, प्रमंडलीय सभागार में उठी जनभागीदारी की गूंज
प्रमंडलीय सभागार में 'जल जीवन हरियाली : जन जागरूकता से सतत विकास की ओर सामूहिक पहल' विषय पर आयोजित परिचर्चा की अध्यक्षता क्षेत्रीय विकास पदाधिकारी अनिल राय ने की. इस परिचर्चा में आयुक्त कार्यालय के तमाम अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए. अधिकारियों ने एक स्वर में कहा कि जल और पर्यावरण का संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं और बजट के भरोसे पूरा नहीं हो सकता. जब तक आम नागरिक अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेंगे और पानी की हर बूंद को सहेजने के लिए आगे नहीं आएंगे, तब तक सतत विकास का सपना अधूरा रहेगा. इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य समाज के हर वर्ग को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करना और उन्हें इस प्राकृतिक बदलाव का साझेदार बनाना है.
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