भागलपुर में बादलों के बीच खिली धूप, 14 अक्टूबर तक हल्की बारिश के आसार

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बादलों के बीच खिली धूप AI Image

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बिहार में 14 अक्टूबर तक हल्की बारिश की संभावना है. कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों के लिए धान, मक्का, मौसमी सब्जियों की फसल प्रबंधन और पशुओं के स्वास्थ्य के लिए विशेष सुझाव जारी किए हैं.

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भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) द्वारा जारी पूर्वानुमान के अनुसार, 14 अक्टूबर तक दक्षिण बिहार के जिलों में एक-दो स्थानों पर मेघगर्जन के साथ हल्की वर्षा होने की संभावना है. रविवार की सुबह आसमान में काले बादलों की आवाजाही देखी गई, हालांकि कुछ ही देर बाद धूप भी निकल आई. इस दौरान अधिकतम तापमान 31 से 32 डिग्री सेल्सियस के आसपास बने रहने का अनुमान है. साथ ही 4 से 6 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से पुरवा हवा चलने की संभावना जताई गई है.

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फसल समसामयिक सुझाव: कृषि वैज्ञानिकों की सलाह

मौसम के मिजाज को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को धान, मक्का और मौसमी सब्जियों के बेहतर प्रबंधन के लिए तकनीकी सुझाव जारी किए हैं:

1. धान की फसल का प्रबंधन एवं कीट नियंत्रण

  • गंधी बग कीट से बचाव: जो धान की फसल दुग्धावस्था (मिल्किंग स्टेज) में पहुंच चुकी है, उसमें गंधी बग कीट की नियमित निगरानी करें. इसके नियंत्रण के लिए फॉलीडॉल 10% या मैलाथियान 10% धूल का 10 से 15 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से भुरकाव करें. ध्यान रहे कि यह भुरकाव सुबह 8:00 बजे से पहले अथवा शाम 5:00 बजे के बाद बालियों पर ही किया जाए.
  • भूरा तना मधुआ कीट (BPH): धान के इस प्रमुख शत्रु कीट के नियंत्रण के लिए इमिडाक्लोप्रिड (1 मिलीलीटर प्रति 3 लीटर पानी) या एसीफेट 75% WP (1.25 ग्राम प्रति लीटर पानी) का घोल बनाकर छिड़काव करें.
  • उर्वरक प्रबंधन: अगेती बोई गई धान की फसल जो बाली निकलने की अवस्था में आ चुकी है, उसमें 30 किलोग्राम नत्रजन (नाइट्रोजन) प्रति हेक्टेयर की दर से प्रयोग करें.

2. मक्का की देखभाल

  • धनबाल निकलने की अवस्था में पहुंच चुकी मक्का की फसल में 30 किलोग्राम नत्रजन प्रति हेक्टेयर की दर से उपरिवेशन (टॉप ड्रेसिंग) करें.

3. मौसमी सब्जियों की खेती

  • फूलगोभी: मध्य अवधि वाली किस्मों (जैसे पूसा हिम ज्योति, डी-96 एवं पंत शुभ्रा) की रोपाई तथा पछेती किस्मों की बुआई करें. पूसा स्नोबॉल-1 एवं पूसा हाइब्रिड-2 जैसी पछेती किस्मों के लिए 350 से 400 ग्राम बीज प्रति हेक्टेयर अनुशंसित है.
  • पत्तागोभी: पूसा ड्रम हेड एवं पूसा अगेती किस्मों का चयन कर प्रति हेक्टेयर लगभग 500 ग्राम बीज की बुआई करें. कतार से कतार की दूरी 50-60 सेमी और पौधे से पौधे की दूरी 40-50 सेमी रखें. संतोषजनक उपज के लिए 20-25 टन सड़ी गोबर की खाद के साथ 120 किग्रा नत्रजन, 80 किग्रा फास्फोरस एवं 80 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टेयर दें.
  • मूली: अगात बुआई के लिए पूसा चेतकी, पूसा देशी, पूसा हिमानी, पूसा रश्मि, जापानी सफेद, पंजाब सफेद या अर्का निशांत प्रभेदों का चयन करें. बीज दर 4 से 5 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर रखें तथा 25 × 10 सेमी की दूरी पर बुआई करें.

पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश

  • संतुलित आहार: दुधारू पशुओं को हरे चारे के साथ सूखा चारा बराबर मात्रा में (50:50 के अनुपात में) मिलाकर खिलाएं. इसके साथ ही प्रतिदिन 20 से 30 ग्राम खनिज मिश्रण और नमक नियमित रूप से दें.
  • स्वच्छता व कीट नियंत्रण: बदलते मौसम में पशुघर के आसपास मच्छर, मक्खी और अन्य कीड़ों को पनपने से रोकने के लिए नियमित अंतराल पर चूने का छिड़काव करें.

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