द्विवेदीजी ने मनुष्य को केंद्र में रख रचा साहित्य

Published at :30 May 2014 11:36 AM (IST)
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द्विवेदीजी ने मनुष्य को केंद्र में रख  रचा साहित्य

भागलपुर: टीएनबी कॉलेज के हिंदी विभाग में गुरुवार को संगोष्ठी हुई. संगोष्ठी का विषय डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी : व्यक्तित्व व कृतित्व था. वक्ताओं ने कहा कि द्विवेदीजी हिंदी साहित्य के प्रकांड विद्वान थे. वे एक बड़े समालोचक, इतिहासकार, निबंधकार और संपादक थे. उन्होंने मनुष्य को केंद्र में रख कर साहित्य की रचना की. उन्होंने […]

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भागलपुर: टीएनबी कॉलेज के हिंदी विभाग में गुरुवार को संगोष्ठी हुई. संगोष्ठी का विषय डॉ हजारी प्रसाद द्विवेदी : व्यक्तित्व व कृतित्व था. वक्ताओं ने कहा कि द्विवेदीजी हिंदी साहित्य के प्रकांड विद्वान थे.

वे एक बड़े समालोचक, इतिहासकार, निबंधकार और संपादक थे. उन्होंने मनुष्य को केंद्र में रख कर साहित्य की रचना की. उन्होंने बाणभट्ट की आत्मकथा, अनामदास का पोथा, चारु चंद्रलेख और पुनर्नवा जैसे उपन्यास की रचना की. हिंदी साहित्य के इतिहास का लेखन किया. अभाव में रह कर भी इतनी बड़ी प्रतिभा विकसित हो सकती है, इसका साक्षात उदाहरण डॉ द्विवेदी हैं.

सेमिनार में चंदन कुमार, शिरोमणि कुमार, वंदना कुमारी, नागेश्वर प्रसाद, सुषमा कुमारी, रणजीत कुमार, जयसूर्य कुमार, पिंटू कुमार, शिवराज कुमार, नीलू कुमारी, अजेय कुमार, ललिता कुमारी, नीतीश कुमार, चेतन कुमार, सौरभ कुमार आदि ने भाग लिया. संयोजक डॉ योगेंद्र ने संगोष्ठी का संचालन किया. वरिष्ठ शिक्षक डॉ कौशल किशोर झा, डॉ अंजनी राय व प्रो आलोक चौबे ने विचार व्यक्त किया.

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