दिनकर के पुत्र ने साहित्य महाकुंभ का किया उद्घाटन, श्रीराम की भक्ति में डूबी दिनकर की नगरी सिमरिया धाम

Updated at : 02 Dec 2018 3:26 AM (IST)
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दिनकर के पुत्र ने साहित्य महाकुंभ का किया उद्घाटन, श्रीराम की भक्ति में डूबी दिनकर की नगरी सिमरिया धाम

बेगूसराय : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली सिमरिया धाम में शनिवार से मोरारी बापू की रामकथा शुरू हो गयी. इससे सिमरिया धाम श्रीराम की भक्ति में डूब गया है. साहित्य महाकुंभ के दौरान आयोजित मोरारी बापू की रामकथा को सुनने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का सिमरिया धाम पहुंचना जारी है. […]

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बेगूसराय : राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की जन्मस्थली सिमरिया धाम में शनिवार से मोरारी बापू की रामकथा शुरू हो गयी. इससे सिमरिया धाम श्रीराम की भक्ति में डूब गया है. साहित्य महाकुंभ के दौरान आयोजित मोरारी बापू की रामकथा को सुनने के लिए देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालुओं का सिमरिया धाम पहुंचना जारी है.
साहित्य महाकुंभ स्थल पर हेलिकॉप्टर से मोरारी बापू के पहुंचते ही आयोजन समिति के सदस्यों के द्वारा स्वागत किया गया.इसके बाद वे सीधे सड़क मार्ग से राष्ट्रकवि दिनकर के गांव पहुंचे. दिनकर जी के घर पर जाकर उन्होंने इस मिट्टी को नमन किया एवं दिनकर की तमाम स्मृतियों का अवलोकन किया.
दिनकर के गांव से बापू सीधे साहित्य महाकुंभ स्थल पर पहुंच कर मां गंगा को नमन करते हुए कथा स्थल पर पहुंचे. कथा स्थल पर मोरारी बापू के आग्रह पर दिनकर के पुत्र केदारनाथ सिंह, बहू कल्पना देवी ने दीप प्रज्वलित कर इस आयोजन का उद्घाटन Â बाकी पेज 15 पर
साहित्य महाकुंभ का आगाज, जय सियाराम से गूंजा सिमरिया
स्वागत भाषण के दौरान दिनकर जी के पुत्र केदारनाथ सिंह ने अपने संबोधन के दौरान भावुक होते हुए कहा कि यह मेरे लिए पूर्व जन्म का ही फल है कि आज मैं बापू के सामने इस मंच पर उनका स्वागत कर रहा हूं. उन्होंने कहा कि बापू की कथा रसों से भरी होती है. उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं को मोरारी बापू की कथा पूरी तत्परता के साथ सुनने की अपील की.
उद्घाटन के पश्चात मिथिलांचल की कला संस्कृति से जुड़े स्वागत गीत व नृत्य से स्वागत किया गया. मोरारी बापू के संगीतमय रामकथा को लेकर पूरा इलाका स्वर्गलोक में तब्दील हो गया है.
रामायण लोकभाषा, लोक आचरण का सर्वोतम ग्रंथ
बेगूसराय . रामकथा वाचक मोरारी बापू ने रामकथा प्रारंभ करने से पहले राष्ट्रकवि दिनकर की भूमि सिमरिया को नमन करते हुए दिनकर को बलवंत, शीलवंत बताया. उन्होंने कहा कि मैंने पहले सरस्वती की वंदना की और अब गंगा की वंदना के साथ रामकथा प्रारंभ कर रहा हूं. उन्होंने कहा कि लीलाएं अभिनय हैं जिसमें कोई जरूरी नहीं कि पात्र का चरित्र उसके अनुरूप हो, लेकिन चरित्र में यह आवश्यक है कि उसके अनुरूप कथा अभिनय और उन्होंने कहा कि रामचरित मानस नाना पुराण निगमागम एक सर्वस्पर्शी, सर्वग्राही एवं सर्वकल्याणकारी कथा है जिसमें संपूर्ण देश की संस्कृति, आचरण एवं मर्यादित जीवनशैली का उल्लेख है.
उन्होंने कहा कि तुलसी की रामायण लोकभाषा, लोक आचरण का सर्वोतम ग्रंथ है. रामचरितमानस देश के आखिरी व्यक्ति से लेकर सर्वशक्तिमान कल्याणकारी राजा तक की कथा है. उन्होंने रामकथा को परम कल्याणकारी बताया.
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