चिंताजनक : बिहार-झारखंड सीमा पर चीर नदी घाट पर लगा कचरों का अंबार, अर्घ्य देने में होगी परेशानी
छठ घाट पर कचरे का अंबार
छठ पूजा की तैयारी के बीच चीर नदी के घाटों पर कचरे का अंबार. व्रतियों को अर्घ्य देने में होगी भारी फजीहत. पर्यावरणविद् ने जताई चिंता.
पंजवारा (बांका) : लोक आस्था के चार दिवसीय महापर्व छठ को लेकर जहां एक ओर ग्रामीण क्षेत्रों में घर-आंगन की साफ-सफाई और शुद्धता का दौर तेज हो चुका है, वहीं दूसरी ओर सार्वजनिक नदी व तालाब घाटों की उपेक्षा प्रशासनिक दावों की पोल खोल रही है. बांका जिले के बिहार-झारखंड बॉर्डर पर स्थित पवित्र चीर नदी के सबलपुर पंचायत, लौढिया और पंजवारा पंचायत तक फैले घाटों की नारकीय स्थिति ने श्रद्धालुओं की चिंता बढ़ा दी है. घाटों के किनारे जगह-जगह कचरे का अंबार, सड़ी घास और भूसे के ढेर जमा हैं, जिससे महापर्व पर भगवान भास्कर को अर्घ्य देने पहुंचने वाले व्रतियों को भारी फजीहत झेलनी पड़ सकती है.
दोनों राज्यों की सीमा पर स्थित है यह पवित्र संगम स्थल
चीर नदी बिहार और झारखंड की सीमाओं को स्पर्श करते हुए बहती है. भौगोलिक और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोण से इस नदी तट का बड़ा महत्व है. यह घाट दोनों राज्यों के सीमावर्ती गांवों के लिए एक साझा संगम स्थल का कार्य करता है.
पंजवारा और सबलपुर क्षेत्र के इस साझा तट पर दोनों राज्यों के लोग सदियों से पारंपरिक सद्भाव और अटूट आस्था के साथ मिलकर सूर्योपासना करते आ रहे हैं.

10 हजार से अधिक व्रती देते हैं अर्घ्य, सफाई न होने से भारी रोष
उल्लेखनीय है कि सबलपुर, लौढिया से लेकर पंजवारा घाट के दोनों छोरों पर छठ के अवसर पर 10 हजार से अधिक श्रद्धालु और व्रती अस्ताचलगामी व उदीयमान सूर्य को अर्घ्य अर्पित करने जुटते हैं. इतने बड़े जनसैलाब के एकत्र होने के बावजूद अब तक न तो स्थानीय पंचायत स्तर पर और न ही प्रशासनिक स्तर पर घाटों की सफाई को लेकर कोई ठोस कदम उठाया गया है.
पर्व के शुरू होने में बेहद कम समय बचा है, ऐसे में घाट की सुध न लिए जाने से स्थानीय ग्रामीणों और श्रद्धालुओं में गहरा रोष व्याप्त है. छठ जैसे स्वच्छता-प्रधान पर्व में गंदगी का यह मंजर आस्था पर सीधे चोट कर रहा है.
प्रशासन और प्रबुद्ध नागरिकों से सफाई की पुरजोर अपील
इस गंभीर समस्या को देखते हुए पर्यावरणविद् एवं 'नदी बचाओ अभियान' के संयोजक रास मोहन ठाकुर ने जिला प्रशासन, स्थानीय जन प्रतिनिधियों और ग्रामीणों से तत्काल संयुक्त पहल करने का आह्वान किया है.
उन्होंने मांग की है कि:
- घाट किनारे जमा कूड़ा-कचरा, घास और भूसे के ढेरों को अविलंब ट्रैक्टर और जेसीबी की मदद से हटाया जाए.
- नदी के दोनों किनारों का समतलीकरण कर सुरक्षित संपर्क पथ बनाया जाए.
- गहरे पानी वाले खतरनाक स्थानों को चिन्हित कर वहां लाल झंडी और बांस की बैरिकेडिंग लगाई जाए.
- दोनों राज्यों से आने वाली भारी भीड़ को देखते हुए रोशनी, गोताखोरों और सुरक्षा बलों की चाक-चौबंद तैनाती सुनिश्चित की जाए, ताकि श्रद्धालु स्वच्छ, निर्मल और सुरक्षित वातावरण में भगवान सूर्य की उपासना कर सकें.

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