लघु सिंचाई योजना के विभागीय आंकड़ों से अलग है हकीकत

Published at :07 Apr 2016 5:27 AM (IST)
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लघु सिंचाई योजना के विभागीय आंकड़ों से अलग है हकीकत

बंद हैं जलापूर्ति प्लांट, कैसे होगी सिंचाई बांका : जिले की लघु सिंचाई योजनाएं सफेद हाथी साबित हो रही हैं. कहने को तो बांका में लघु सिंचाई योजना का प्रमंडल स्तरीय कार्यालय है. लेकिन विभागीय कामकाज की गति इतनी धीमी है कि इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है. लघु सिंचाई विभाग के […]

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बंद हैं जलापूर्ति प्लांट, कैसे होगी सिंचाई

बांका : जिले की लघु सिंचाई योजनाएं सफेद हाथी साबित हो रही हैं. कहने को तो बांका में लघु सिंचाई योजना का प्रमंडल स्तरीय कार्यालय है. लेकिन विभागीय कामकाज की गति इतनी धीमी है कि इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है. लघु सिंचाई विभाग के बांका कार्यालय में 38 कर्मी कार्यरत हैं. जिनमें अधिकारी से लेकर कर्मचारी तक शामिल हैं. वर्तमान समय में रबी की खेती समाप्ति की ओर है और गरमा फसल किसानों द्वारा लगाया जा रहा है. बावजूद इसके विभाग द्वारा किसानों को पटवन हेतु पानी मुहैया नहीं हो पा रहा है. चैत मास के शुरु में ही इतनी तीखी धूप है कि मालूम पड़ता है कि जेठ की गरमी हो. गरमा फसल के लिए किसानों को खेती के लिए पानी की नितांत आवश्यकता है.
विभाग कहता है सूखा है स्रोत: फुल्लीडुमर के भितिया, नरहा बांध एवं सरकट अमरपुर के भीमसेन, जनकीपुर एवं रामचंद्रपुर इटहरी, बौंसी के परसा नाला, झरना नाला, झपनिया, तिवारी बांध, बेलटीकरी एवं हथबंधा, धोरैया के बड़ी बांध, चांदन के बिरनियां, बियाही, बाराटांड, घोघाडाबर, झिंगाझाल, हरकट्टा, सुराहा, झुरवैया बांध, गौरी बांध एवं कोरिया बांध के श्रोत में पानी नहीं है. यह दावा विभाग कर रही है. लेकिन फुल्लीडुमर क्षेत्र अंतर्गत नरहा बांध के स्थानीय लोग शंभु यादव, महेंद्र राय, राजेश यादव, नंददेव यादव ने बताया कि इस श्रोत में सालों भर पानी भरा रहता है. कभी भी जल श्रोत नहीं सूखता है. इससे प्रतीत होता है विभागीय सूचना जो दी गयी है. कहीं न कहीं गड़गड़ी है या स्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट तैयार नहीं किया गया है. इससे ही पता चलता है कि विभाग किसानों के प्रति कितना सजग है.
बंद पड़ी हैं ज्यादातर योजनाएं: लघु सिंचाई योजना के तहत जिले में लगे सभी लिफ्ट एरिगेशन के सभी प्लांट लगभग सभी मृत प्राय: हैं. विभागीय जानकारी के अनुसार बांका के दुधारी, कोरियंधा, बरमुहा में बिजली की समस्या की वजह से बंद है. जबकि बांका शहर शहर के एकमात्र विजयनगर का प्लांट चालू अवस्था में है. वहीं कटोरिया के तुलसीवरण बौंसी के बैंचा, सिंगेश्वरी, पबरा रामपुर एवं बरहेट, बाराहाट के सरूखा एवं अमरपुर के जैठोर भी बिजली समस्या व डीजल इंजन में खराबी की वजह से बंद पड़े हैं. इसके अलावे जिले के विभिन्न प्रखंडों में दर्जन भर योजनाएं विभिन्न कारणों से बंद पड़े हैं.
बांका के लघु सिंचाई विभाग में कार्यरत हैं 38 कर्मी
किसानों को पटवन के समय नहीं मिल पर रहा है पानी
जिले की लगभग सभी जलापूर्ति योजनाएं पड़ी हैं ठप
विभाग काम न करने के बनाता है बहाना
कहते हैं, नहीं है पानी की मांग
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नलकूप सिंचाई योजना अंतर्गत नाबार्ड फेज 11 के तहत शंभुगंज के गिधौरा, मोहनपुर एवं बिरनौधा, रजौन के तिलकपुर, अमरपुर के नंदलाल पट्टी एवं कंदलाल पट्टी, धोरैया के अस्सी गांव में नलकूप योजना के तहत पानी चालू है. लेकिन विभाग द्वारा कहा जा रहा है कि उक्त क्षेत्र के अंतर्गत किसानों द्वारा पानी की मांग नहीं है. वहीं मध्यम सिंचाई योजना के तहत बांका के खाबा, गरभूबांध, गेढिया एवं दौनाबांध, कटोरिया के खड़ीपार, योगिया, गेमदा, उपरैला, ढिबाजोर एवं पपरेवा, शंभुगंज के बबुरिया क्षेत्र में भी किसानों द्वारा पानी की मांग नहीं की गयी है.
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