चिकित्सक रहते, तो नहीं जाती पूर्व मुखिया की जान
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :23 Aug 2015 4:00 AM (IST)
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बौंसी : बौंसी अस्पताल में शनिवार को हुए घटना के बाद लोगों के मन में एक भय समा गया है कि अस्पताल प्रशासन मानवता के प्रति कितना गंभीर है. रेफरल अस्पताल प्रभारी डॉ जितेंद्र नाथ अगर अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाह नहीं होते तो ये घटना नहीं होती. मालूम हो कि शुक्रवार की रात को […]
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बौंसी : बौंसी अस्पताल में शनिवार को हुए घटना के बाद लोगों के मन में एक भय समा गया है कि अस्पताल प्रशासन मानवता के प्रति कितना गंभीर है.
रेफरल अस्पताल प्रभारी डॉ जितेंद्र नाथ अगर अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाह नहीं होते तो ये घटना नहीं होती. मालूम हो कि शुक्रवार की रात को भी बौंसी अस्पताल मे रात्रि दस बजे से चिकिसक मौजूद नहीं थे.
अस्पताल में दुर्घटना के जख्मी को लेकर आये गदाल निवासी रंजीत सिंह ने प्रभात खबर को फोन पर चिकित्सक के नहीं रहने की जानकारी दी थी.
इसके बाद सूचना मिलने पर अस्पताल प्रभारी स्वयं आकर जख्मी का इलाज किये और रात्रि करीब बारह बजे अपने घर चले गये. शनिवार को चैतावरण के पुर्व मुखिया शिवलाल यादव की मौत के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने प्रभारी से पूछा जब अस्पताल में कोई चिकित्सक मौजूद नहीं थे तो वो जब रात में आये तो किस परिस्थिती में चले गये.
मालूम हो कि विगत एक सप्ताह से बौंसी अस्पताल की स्थिति काफी खराब हो गयी थी. अस्पताल सूत्रों की माने तो इन दिनों प्रभारी से चिकित्सक समेत अन्य कर्मियों का भी संबंध अच्छा नहीं है. अगर इस व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले समय में यहां कोई बीमार मरिजों का ईलाज करानें नहीं आयेगा.हद तो तब हो गयी,
जब एसडीओ द्वारा प्रभारी से जिला स्वास्थ्य समिति के अध्यक्ष का नाम पुछा गया तो नहीं बता पाये. राजद के प्रखंड अध्यक्ष दीपनारायण यादव, अनिरुद्ध यादव, उमेश यादव, निप्पू पांडेय, राजीव सिंह, राकेश सहित अन्य ने एक स्वर से कहा कि जब से ये प्रभारी बनें तब से अस्पताल की व्यवस्था खराब हो गयी है. नर्सो द्वारा डिलिवरी में 300 से 500 रुपये लेने, वर्षो से जमे चिकित्सकों व स्वास्थ्य कर्मियों के तबादले की भी मांग की है.
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