शहर में ऑटो चालकों का चलता है अपना कानून
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :16 Oct 2016 4:44 AM (IST)
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लापरवाही. नियमों को ताक पर रख कर ढो रहे सवारी औरंगाबाद सदर : शहर में ऑटो चालक यातायात नियमों को ताक पर रख कर चल रहे हैं. इसकी वजह से सड़क हादसे बढ़ रहे हैं. ऑटों चालकों के गंतव्य तक पहुंचने की जल्दी और ज्यादा से ज्यादा सवारियां ढोने का शौक लोगों की जान आफत […]
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लापरवाही. नियमों को ताक पर रख कर ढो रहे सवारी
औरंगाबाद सदर : शहर में ऑटो चालक यातायात नियमों को ताक पर रख कर चल रहे हैं. इसकी वजह से सड़क हादसे बढ़ रहे हैं. ऑटों चालकों के गंतव्य तक पहुंचने की जल्दी और ज्यादा से ज्यादा सवारियां ढोने का शौक लोगों की जान आफत में डाले हुए है. ऑटो चालकों को ये परवाह भी नहीं होता है कि सड़क पर अन्य गाड़ियां भी चल रहे हैं. देखा जाये तो शहर में ऑटों चालकों का अपना कानून चल रहा है. यातायात नियमों को लागू कराने में जिला प्रशासन भी लापरवाह नजर आ रहा है.
अभी एक दिन पूर्व कासमा थाना क्षेत्र के अरथुआ गांव में ऑटो के धक्के से शंकर साव के 12 वर्षीय पुत्र की मौत हो गयी. ऐसी घटनाएं इससे पहले भी हुई हैं, जिसमें ऑटो चालकों समेत सवारियों की भी मौत हुई है. लेकिन, कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता. घटनाएं होती हैं और कुछ दिन चर्चा में रहने के बाद सबकुछ सामान्य हो जाता है. ऐसे में बड़ी संख्या में चल रहे ऑटो चालकों पर कानून के दायरे में रहने व यातायात नियमों के पालन के लिये कार्रवाई आवश्यक है.
शहर की सभी सड़कों पर है कब्जा
औरंगाबाद शहर की सभी सड़कों पर ऑटो चालकों का जबरदस्त कब्जा है. शहर के रामा बांध बस स्टैंड, ओवरब्रिज, जसोइया मोड़, कामा बिगहा मोड़, दानी बिगहा बस स्टैंड, रमेश चौक, धर्मशाला चौक, पोस्टऑफिस गेट, महावीर मंदिर मोड़, सराय मोड़, सिन्हा कॉलेज मोड़ सहित दर्जनों स्थान पर ऑटो चालक अपना धाक जमाये रखते हैं. सड़क पर चल रहे किसी भी वाहन या लोगों की इनको परवाह नहीं है. जहां जी में आया ऑटो को रोक कर सवारी उतारने और बैठाने के क्रम में सड़क पर जाम लग जाता है. शहर में जितनी बड़ी समस्या अतिक्रमण की है, उससे कहीं ज्यादा बड़ी समस्या ऑटो चालकों ने खड़ी कर रखी है.
संगीत की धुन पर झूमते हैं ड्राइवर: शहर या अन्य जगहों पर चल रहे ऑटो चालकों में अधिकांश चालक कम उम्र के हैं. ऐसे चालकों के पास न तो ड्राइविंग लाइसेंस है और न ही तिपहिया चलाने का अनुभव. ऐसे ड्राइवर ऑटो में बज रहे तेज संगीत की धुन पर ऑटो चलाते वक्त झूमते रहते हैं. ये ऑटो को भी बाइक की तरह सड़क पर लहरा कर चल रहे होते हैं. ऐसे में आये दिन शहर में सड़कों पर दुर्घटनाएं होती रहती हैं.
शहर में लगातार बढ़ रहीं दुर्घटनाएं
क्या कहते हैं लोग
कानून नाम की कोई चीज नहीं,ऑटो चालक सड़कों का अतिक्रमण किये रहते है. जहां जी में आया ऑटो को रोक कर सवारी उतारने और बैठाने का सिलसिला जाम का कारण बनता है. इन पर कार्रवाई बहुत जरूरी है.
राजेश कुमार सिन्हा
सड़क पर चलने वाले ऑटो के ड्राइवर ज्यादातर नाबालिग है. इन्हें यातायात नियमों की कोई जानकारी नहीं. सड़क पर चलने वाले अन्य वाहनों का ये बिल्कुल ख्याल नहीं करते. शहर की सड़कों पर दुर्घटनाएं बढ़ी है.
धर्मेंद्र गुप्ता
रमेश चौक से लेकर सिन्हा कॉलेज मोड़ तक ऑटो चालकों का अपना कानून चलता है. इन्हें दूसरे वाहनों से कोई लेना-देना नहीं है. जहां जी में आता है, गाड़ियों को खड़ी कर देते हैं. इस वजह से शहर में हर रोज जाम लग रहा है. प्रशासन इस पर ध्यान नहीं दे रहा.
मनोज कुमार मिश्रा, अधिवक्ता
शहर में कोई व्यवस्थित पार्किंग नहीं होने की वजह से ऑटो चालक इसका लाभ उठा रहे हैं. बेतरतीब तरीके से ऑटो का परिचालन और पार्किंग शहर की एक बड़ी समस्या बन गयी है. क्षमता से अधिक सवारी लेकर चलने वाले ऑटो से आये दिन दुर्घटनाएं हो रही हैं.
निशांत कुमार
कहते हैं अधिकारी
ऑटो चालकों पर पूर्व में कई बार कार्रवाई की गयी. यातायात नियमों का पालन नहीं करने वाले वाहनों के ऊपर जुर्माना भी लगाया गया़ लेकिन, वे नहीं सुधर रहे. एक सप्ताह के अंदर शहर में ऑटो चालकों के विरूद्ध एक अभियान चलाया जायेगा, जिसमें यातायात नियमों का पालन नहीं करने वाले ऑटो चालकों के ऊपर कार्रवाई की जायेगी.
राजकुमार गुप्ता, जिला परिवहन पदाधिकारी
ओवरलोड से भी नहीं है परहेज
परिवहन विभाग के अधिकारी अक्सर सड़क सुरक्षा को लेकर नियमों की अनदेखी करने वाले ऑटों चालकों की धर पकड़ करते हैं. हालांकि, इस दौरान भी वे सिर्फ कागजात ही देखना मुनासिब समझते हैं. ओवरलोडेड वाहनों पर कोई कार्रवाई नहीं होने से ऑटों चालकों का मनोबल बढ़ते जा रहा है. चाहे शहर की संकीर्ण सड़क हो या फिर राष्ट्रीय राजमार्ग दो, ओवरलोड से इन्हें कोई परहेज नहीं है. एक ऑटो में बैठने के लिये पांच लोगों की जगह होती है, लेकिन क्षमता से अधिक दोगुना सवारी लेकर सड़कों पर चलते हैं.
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