सरकारें बदली, लेकिन गांव की सूरत नहीं बदली

Published at :08 Jan 2016 8:11 PM (IST)
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सरकारें बदली, लेकिन गांव की सूरत नहीं बदली

सरकारें बदली, लेकिन गांव की सूरत नहीं बदलीपांडेयपुरा गांव में नहीं है बिजली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा प्रतिकूल असर सिंचाई के अभाव में मारी जाती है फसल फोटो नाम से भेजी गयी हैप्रतिनिधि, अंबा (औरंगाबाद) प्रखंड के सूही पंचायत के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. पंचायत का पांडेयपुर गांव […]

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सरकारें बदली, लेकिन गांव की सूरत नहीं बदलीपांडेयपुरा गांव में नहीं है बिजली बच्चों की पढ़ाई पर पड़ रहा प्रतिकूल असर सिंचाई के अभाव में मारी जाती है फसल फोटो नाम से भेजी गयी हैप्रतिनिधि, अंबा (औरंगाबाद) प्रखंड के सूही पंचायत के कई गांव आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है. पंचायत का पांडेयपुर गांव बिजली नहीं है. यहां के लोग ढिबरी युग में अपना जीवन बिता रहें है. गांव के लोग बताते हैं कि कि विद्युतीकरण के लिए राजीव गांधी योजना की सूची में गांव का नाम था. पर अधिकारियों की लापरवाही से इस गांव की अनदेखी की गयी.बिजली नहीं रहने से बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है. ऐसा नहीं कि गांव में मात्र बिजली सुविधा का ही अभाव है. बल्कि, सिंचाई के बिना यहां की फसल मारी जाती है. उत्तर कोयल नहर का बरीयांवा माइनर गांव तक जाती है पर नहर का पानी यहां के खेतों तक नहीं पहुंचता है. ग्रामीण बताते हैं कि तुरता व दुधमी आते-आते नहर का पानी समाप्त हो जाता है. यहां की खेती भगवान भरोसे है. बारिश के अभाव में गांव के बधार बंजर पड़ा है. विकास के मुख्यधारा से नहीं जुड़ा गांव गांव का विकास नहीं हुआ है. कई सरकारें बदलीं, लेकिन इस गांव की सूरत नहीं बदली. आजादी के बाद से अब तक यह गांव विकास के मुख्य धारा से नहीं जुड़ सका है. कृष्ण मुरारी पांडेय, सेवानिवृत्त शिक्षक गांव में बिजली की सुविधा नहीं होने से काफी परेशानी होती है. आधुनिक युग भी इस गांव के लोग नवीनतम तकनीक से दूर है. पंकज कुमार पांडेय, छात्र बिजली के अभाव में रात में पढ़ाई करना सबसे बड़ी समस्या है. जनवितरण प्रणाली की दुकान से जितना तेल मिलता है उससे रात में पढ़ाई करना संभव नहीं है. रोहित रंजन पांडेय, छात्र मैट्रिक की परीक्षा सिर पर है. बिजली के बिना रात में पढ़ाई नहीं हो पा रही है. तन कुमारी, छात्रागांव में बिजली नहीं रहने से सरकार के कार्यक्रम की खबर से लोग दूर हैं. देश-दुनिया में क्या हो रहा है इसकी जानकारी नहीं मिल पाती है. सुबोध कुमार पांडेय, छात्र शिक्षा के लिए सरकार बढ़ावा तो दे रही है, पर बिजली के बिना आधुनिक शिक्षा से काफी पीछे हैं. कंप्यूटर के ज्ञान से इस गांव के लोग अनभिज्ञ हैं. ब्यूटी कुमारी, छात्रा गांव में तार-पोल व ट्रांसफॉर्मर लगवाने के लिए जनप्रतिनिधियों व अधिकारियों का चक्कर लगाते-लगाते थक गये हैं. अब तक किसी ने पहल नहीं की. सिंचाई सुविधा नही होने से हमारी फसल मारी जाती है. गौतम पांडेय सिंचाई के लिए बिजली व अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं होने से सक्षम लोग गांव से पलायन कर गये. जो गरीब लोग हैं वे गांव में ही गुजर-बसर कर रहें है. सिंचाई की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है. अजय यादव

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