कूड़े के ढेर पर बीत रहा गरीब बच्चों का बचपन

कूड़े के ढेर पर बीत रहा गरीब बच्चों का बचपन पेट की आज बुझाने के लिए बिनते हैं कूड़े सरकारी योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ (फोटो नंबर-14)कैप्शन- कचड़ों के ढेर पर कूड़ा बिनते महादलित के बच्चे औरंगाबाद (नगर) सरकार द्वारा बच्चों को स्कूल भेजने संबंधित विभिन्न तरह की योजनाएं चलायी जा रही हैं. इसके […]
कूड़े के ढेर पर बीत रहा गरीब बच्चों का बचपन पेट की आज बुझाने के लिए बिनते हैं कूड़े सरकारी योजनाओं का नहीं मिल रहा लाभ (फोटो नंबर-14)कैप्शन- कचड़ों के ढेर पर कूड़ा बिनते महादलित के बच्चे औरंगाबाद (नगर) सरकार द्वारा बच्चों को स्कूल भेजने संबंधित विभिन्न तरह की योजनाएं चलायी जा रही हैं. इसके लिए स्थानीय तंत्र को सक्रिय बनाने का हर संभव प्रयास किया गया है. सरकार का उद्देश्य है कि स्कूल से वंचित बच्चों को विद्यालय तक पहुंचाया जाये. लेकिन, इस उद्देश्य को अमली जामा पहनानेवाले सरकारी तंत्र शायद इस उदेश्य की पूर्ति हेतु कारगर कदम नहीं उठा रहे हैं. यही वजह है कि आज भी काफी संख्या में गरीब व महादलित वर्ग के बच्चे श्रम करने को मजबूर हैं. गरीबी से जूझते हुए दो जून की रोटी का जुगाड़ कड़ी परिश्रम से कर रहे हैं. बच्चे कूड़ा बिनते को मजबूर हैं. बच्चे कहीं भी कूड़े बिनते हुए मिल जायेंगे. इनकी भी इच्छा होती है कि वे भी स्कूल जायें. लेकिन, गरीबी की मार इस कदर इनके अभिभावकों के ऊपर है कि कूड़ा बिनना इनकी मजबूरी बन चुकी है. कूड़ा बिनने वाले बच्चों का कहना है कि प्लास्टिक ,खाली बोतल आदि को बिन कर कबाड़खाना में बेचते हैं. इसके बदले उन्हें मामूली सी रकम मिलती है. और इस रकम को अपने घरों में जाकर दे देते हैं. ताकि इनके पेट की आग बूझ सके. होटलों व ईंट भट्ठों में भी करते है कामगरीब परिवार के बच्चे विभिन्न दुकानों, होटलों व ईंट भट्ठों में भी काम करते दिख जाते हैं. इन गरीब बच्चों का पूरा जीवन बड़े होकर भी कड़े परिश्रम में गुजर जाता है. ऐसे बच्चे सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं से वंचित है या फिर यह भी कहा जा सकता है कि समीपवर्ती सरकारी विद्यालयों में महादलित वर्ग के बच्चे नामांकित तो हैं. लेकिन, स्कूल तक ले जाने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है.योजनाओं से जोड़ने का किया जा रहा प्रयास गरीब व महादलित वर्ग के बच्चों को सरकारी योजनाओं के लाभ से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है. समय-समय पर छापेमारी भी की जाती है. अभियान चलाकर छापेमारी कर बच्चों को सरकारी संस्थानों में प्रवेश कराया जाता है. अमरेंद्र नारायण, जिला श्रम अधीक्षक
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