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रोस्टर से पानी नहीं मिलने से सिंचाई संकट गहराया

रोस्टर से पानी नहीं मिलने से सिंचाई संकट गहराया (फोटो नंबर-12)परिचय- किसानों को समझाते विभाग के अधिकारी व पुलिस पदाधिकारी कुटुंबा (औरंगाबाद)बिहार व झारखंड के विभाजन के समय बनाये गये रोस्टर का अनुपालन नहीं होने से प्रखंड क्षेत्र में सिंचाई संकट गहरा गया है. ऐसे में प्रखंड क्षेत्र के 25 प्रतिशत से अधिक धान के […]

रोस्टर से पानी नहीं मिलने से सिंचाई संकट गहराया (फोटो नंबर-12)परिचय- किसानों को समझाते विभाग के अधिकारी व पुलिस पदाधिकारी कुटुंबा (औरंगाबाद)बिहार व झारखंड के विभाजन के समय बनाये गये रोस्टर का अनुपालन नहीं होने से प्रखंड क्षेत्र में सिंचाई संकट गहरा गया है. ऐसे में प्रखंड क्षेत्र के 25 प्रतिशत से अधिक धान के पौधे पानी के बिना जल कर सूख गये हैं. किसान इसे काट कर मवेशियों के सारे के रूप में उपयोग कर रहे हैं. 25 प्रतिशत धान की फसल ऐसी है जो बाली निकलने के बाद भी सूख रही है. यदि अभी भी सिंचाई के लिए पानी मिलता तो 50 प्रतिशत फसल बचाया जा सकता है. किसान प्रसिद्ध सिंह, धर्मेंद्र सिंह, विजय पांडेय, कृष्णा सिंह, संजय सिंह आदि ने बताया कि एक पानी के बिना फसल मारी जा रही है. फसल सूखने के साथ किसानों का हौसला टूूट रहा है और खेती उन्हें नागवार गुजर रहा है. यदि रोस्टर का अनुपालन किया जाता तो हजारों हेक्टेयर में फसल बच सकती थी.क्या था रोस्टर : बिहार व झारखंड विभाजन के समय उत्तर कोयल नहर के लिए एक रोस्टर तैयार किया गया था. इसके अनुसार झारखंड प्रदेश को 10 प्रतिशत व बिहार को 90 प्रतिशत पानी दिया जाना था. रख -रखाव में भी इसकी तरह से 10 व 90 का अनुपात निर्धारित किया गया था. जब विगत दो माह से पानी की किल्लत हुई तो पूरा पानी झारखंड प्रदेश में ही रोक लिया गया. इससे जिले के कई प्रखंडों में सूखाड़ की स्थिति उत्पन्न हो गयी है. मात्र 200 क्यूसेक आ रहा पानी : महीनों से उत्तर कोयल नहर सूखा पड़ा था और जब इस संबंध में विभाग के अधिकारियों से बात होने पर वे बराज में पानी नहीं होने की बात करते थे. पर, प्रभात खबर की टीम ने बराज का जायजा लेकर प्रमुखता से खबर छापी, तो अधिकारियों की नींद टूटी और एक-दो दिन में मुख्य नहर में अंबा डिवीजन को पानी दिया गया. समस्या यह है कि नहर में मात्र 200 क्यूसेक लगभग पानी आ रहा है. इतने पानी में सभी कैनाल में पानी नहीं छोड़ा जा सकता है.पानी के लिए बढ़ा तनावजब नहर में पानी आया तो महुअरी कैनाल क्षेत्र के किसान अपने नहर में पानी ले जाने लगे. इधर, पिपरा, झिकटिया आदि गांव के किसान अपने क्षेत्र में पानी ले जाने के लिए तटस्थ हो गये. एक तरफ के किसान मुख्य कैनाल के गेट को उठाते रहे, तो दूसरे तरफ के गिराते रहे. इसी में दोनों तरफ से तनाव उत्पन्न हो गया. विभाग के जेइ उमलेश राय जब गेट पर पहुंचे तो पूरा सिस्टम क्षतिग्रस्त पाया. मेकेनिक से भी जब गेट न खुल सका और किसानों की भीड़ बढ़ती गयी तो वे थाना पहुंचे. कुटुंबा थाने के पदाधिकारी अरुण कुमार सिंह दल बल के साथ नहर पर पहुंच कर किसानों को समझाने व बुझाने का प्रयास किया, पर वे अपनी बातों पर अडिग थे. थानाध्यक्ष सुभाष राय के निर्देश पर दोनों पक्ष के पांच-पांच किसानों को थाना बुला कर बैठक की गयी. थानाध्यक्ष ने बताया कि दोनों पक्ष के किसानों के बीच सहमति बनायी गयी है. विभाग के अधिकारी अपनी मौजूदगी में दोनों तरफ के गेट को फिक्स करेंगे तथा दोनों ओर पानी छोड़ा जायेगा. विभागीय अधिकारी के निर्देश के बिना गेट में छेड़छाड़ करना कानून अपराध है. बेरूखी मौसम से किसानों को परेशान बढ़ी है. ऐसी स्थिति में एक-दूसरे को सहयोग करना चाहिए.

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