परंपरागत तरीके से होती है कुल देवता की पूजा

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दाउदनगर : घर के दक्षिण या पश्चिम की तरफ एक कोठरी में कुल देवता रहते हैं. इनकी परंपरागत पूजा होती है. दीवार पर अइपन और सिंदूर से हाथ की छाप में तो कहीं 2,5 या 7 की संख्या में व कहीं-कहीं मिट्टी के पिंड रूप, तो कहीं सोने-चांदी की प्रतिमा बनवा कर कुल देवता पूजन […]

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दाउदनगर : घर के दक्षिण या पश्चिम की तरफ एक कोठरी में कुल देवता रहते हैं. इनकी परंपरागत पूजा होती है. दीवार पर अइपन और सिंदूर से हाथ की छाप में तो कहीं 2,5 या 7 की संख्या में व कहीं-कहीं मिट्टी के पिंड रूप, तो कहीं सोने-चांदी की प्रतिमा बनवा कर कुल देवता पूजन की परंपरा है.

कहीं ब्रह्म, कहीं मनुषदेवा, कहीं डाक तो कहीं राम गोसाई के नाम से कुल देवता की पूजा की जाती है. कहीं-कहीं गौरेया बाबा की घर के द्वार पर पूजा होती है. कुल देवता के लिए कहीं-कहीं लकड़ी का पीढ़ा बनाया जाता है.

कुल देवता पर चढ़ा हुआ प्रसाद घर के लोग ही ग्रहण करते हैं. आचार्य पंडित लालमोहन शास्त्री के अनुसार कुल देवता घर में जलते हुए दीपक को लड़कियां नहीं देखते हैं. प्राय: कुल देवता की पूजा पुआ नैवेद्य चढ़ा कर किया जाता है, तो कहीं बिना चीनी से पागे बुंदिया चढ़ाने की परंपरा है. किसी-किसी घर में प्रत्येक वर्ष कुल देवता की पूजा होती है.
– ओम प्रकाश –

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