नकदी निकासी व जमा करनेवालों को सुरक्षा देगी पुलिस

Updated at : 23 May 2018 5:15 AM (IST)
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नकदी निकासी व जमा करनेवालों को सुरक्षा देगी पुलिस

औरंगाबाद नगर : जिले में जो भी लोग घर से बैंक या बैंक से घर नकदी लेकर जाते हैं तो उन्हें हमेशा रास्ते में पैसा छिनतई होने की चिंता सताती रहती है,लेकिन अब इसके लिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि आपकी सुरक्षा व पैसा को सकुशल जमा करने से लेकर घर पहुंचाने की […]

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औरंगाबाद नगर : जिले में जो भी लोग घर से बैंक या बैंक से घर नकदी लेकर जाते हैं तो उन्हें हमेशा रास्ते में पैसा छिनतई होने की चिंता सताती रहती है,लेकिन अब इसके लिए घबराने की कोई जरूरत नहीं है, बल्कि आपकी सुरक्षा व पैसा को सकुशल जमा करने से लेकर घर पहुंचाने की जिम्मेदारी पुलिस ने ले रखी है. इसके लिए बिहार के पुलिस महानिदेशक केएस द्विवेदी ने जिले के सभी पुलिस अधीक्षकों को निर्देश देते हुए कहा है कि जो भी लोग अधिक मात्रा में राशि की निकासी कर घर जाते हैं

या फिर घर से बैंक में जमा करने के लिए लाते हैं और यदि इसकी सूचना पुलिस को देते हैं तो पुलिस पदाधिकारी का कर्तव्य है कि उनकी सुरक्षा मुहैया करायी जाये, ताकि पैसा को लूटने से बचाया जा सके. इधर पुलिस अधीक्षक डॉ सत्यप्रकाश में कहा है कि इसके लिए सभी थानाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि नियमित बैंक की चेकिंग अपने स्तर से करेंगे और जो व्यक्ति अधिक पैसे की जमा निकासी करने की सूचना देते हैं. उन्हें सुरक्षा अपने स्तर से प्रदान करना सुनिश्चित करेंगे.

जांच के क्रम में यह सामने आता है कि जिससे पैसा लूटा गया है उसने घटना से पहले पुलिस से सुरक्षा की मांग की थी पर सुरक्षा नहीं दी गयी तो ऐसी स्थिति में संबंधित थाना के थानाध्यक्ष के विरुद्ध कार्रवाई की जायेगी. गौरतलब है कि जिले में अक्सर पैसा छिनतई का मामला सामने आता है. अब इस तरह की सुविधा हो जाने से खासकर कर व्यापारियों को काफी लाभ होगा.

लंबित कांडों को निबटाएं, नहीं तो कार्रवाई : जिले में दलित अत्याचार अधिनियम से संबंधित जितने भी मामले विभिन्न थानों में दर्ज हैं. उस कांड का निष्पादन करने के लिए आईजी (कमजोर वर्ग) ने समय-सीमा निर्धारित की है. आईजी के निर्देश पर मंगलवार को एसपी डॉ सत्य प्रकाश ने जानकारी देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की समीक्षा के क्रम में औरंगाबाद जिले में दलित अत्याचार अधिनियम से संबंधित 37 कांड अभी भी लंबित हैं, जिसमें कार्रवाई करना अति जरूरी है. इसके लिए आईजी के माध्यम से निर्देश दिया गया है कि 31 दिसंबर के पहले का जो भी कांड दर्ज हुआ है उसका निष्पादन 31 मई तक अनुसंधानकर्ता अपने स्तर से करना सुनिश्चित करेंगे, नहीं तो संबंधित अनुसंधानकर्ता को निलंबित करते हुए वरीय पदाधिकारी के स्तर से विभागीय कार्रवाई की जायेगी. इसके लिए सभी थानाध्यक्षों को निर्देश दिया गया है कि लंबित कांडों का अविलंब निष्पादन कराना सुनिश्चित करें, ताकि दोषी लोगों की सजा दिलायी जा सके.
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