बढ़ रहा तापमान, चौक-चौराहे पर खल रही चापाकलों की कमी

Updated at : 27 Apr 2018 5:08 AM (IST)
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बढ़ रहा तापमान, चौक-चौराहे पर खल रही चापाकलों की कमी

प्रशासनिक व्यवस्था काफूर, प्यासे लोग जाएं कहां शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर भी नहीं है पेयजल की व्यवस्था औरंगाबाद नगर : तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी से लोग परेशान हैं. शहरी क्षेत्र में लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है. चौक-चैराहों पर प्याऊ या चापाकल नहीं होने से बोतलबंद पानी का सहारा […]

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प्रशासनिक व्यवस्था काफूर, प्यासे लोग जाएं कहां

शहर के प्रमुख चौक-चौराहों पर भी नहीं है पेयजल की व्यवस्था
औरंगाबाद नगर : तापमान में लगातार हो रही बढ़ोतरी से लोग परेशान हैं. शहरी क्षेत्र में लोगों को पेयजल संकट से जूझना पड़ रहा है. चौक-चैराहों पर प्याऊ या चापाकल नहीं होने से बोतलबंद पानी का सहारा लेना पड़ रहा है. शहर के किसी भी प्रमुख चौक-चौराहे पर जिला प्रशासन द्वारा चापाकल नहीं लगाया गया है और न ही अब तक प्याऊ की व्यवस्था करायी गयी है, जिससे लोग अपने गले को तर कर सकें. ऐसे में लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए चौक-चौराहों के आसपास चल रहे होटलों से पानी मांगना पड़ रहा है या फिर बोतलबंद पानी के सहारे वे अपनी प्यास को बुझाने को मजबूर हैं. लगातार बढ़ रहे तापमान के कारण एक ओर जिले के कई इलाके में पेयजल संकट उत्पन्न होने लगा है. वहीं, दूसरी तरफ शहरी क्षेत्र में भी हाल कुछ अच्छा नहीं है. जिले के बराबर का इलाका पेयजल संकट से जूझ रहा है.
यहां लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए दूर के गांवों से पानी लाने को मजबूर होना पड़ रहा है. इधर शहरी क्षेत्र में भी चौक-चौराहों पर चापाकल की कमी राहगीरों को खल रही है. शहर के अति व्यस्त इलाका रमेश चौक, ओवरब्रिज, दानी बिगहा बस स्टैंड, सब्जी मंडी, अस्पताल मोड़ आदि प्रमुख जगहों पर चापाकल नहीं लगा है, जिसके कारण राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
लगन को लेकर बाजारों में बढ़ी है भीड़ : इन दिनों शादी-विवाह का लग्न भी चरम पर है. हजारों की संख्या में लोग ग्रामीण इलाकों से शहर के बाजार में खरीददारी करने पहुंच रहे हैं. गर्मी के मौसम के कारण बाजार आने वाले लोगों को अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी की आवश्यकता महसूस होती है, तब वे सड़क किनारे चापाकल ढूंढ़ने लगते हैं ,लेकिन दूर तक जब उन्हें चापाकल नजर नहीं आता, तब नहीं चाहते हुए भी वे होटल में जाते हैं और पानी के लिए कुछ न कुछ खाद्य पदार्थ की खरीदारी करते हैं
या फिर विभिन्न ब्रांडों के बोतलबंद पानी खरीदकर अपनी प्यास बुझाते हैं. प्रशासन द्वारा ग्रामीण इलाके के खराब पड़े चापाकलों को दुरुस्त करने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है.साथ ही मोबाइल गैंग को भी गांवों के लिए भी रवाना कराया गया है ,ताकि वे खराब पड़े चापाकलों की मरम्मत करें ,जिससे कि लोगों को पेयजल संकट से जूझना नहीं पड़े.
शीतल पेय की बिक्री बढ़ी : लग्न के कारण ग्रामीण इलाकों से बाजार आने वाले लोगों को जब अपनी प्यास बुझाने के लिए पानी नहीं मिलता है तब वे शीतल पेय बेचने वाले ठेला के पास जाकर अपनी प्यास बुझाने का प्रयास करते हैं. शीतल पेय बेचने वाले इन दिनों सत्तू के साथ ही अमझोरा व नींबू पानी, गन्ने का जूस, बेल की शर्बत बेचते नजर आ रहे हैं. वहीं, इन दुकानदारों के पास लोगों की भीड़ देखी जा रही है, जो इस गर्मी से बचने के लिए और अपने हलक को शीतलता पहुंचाने के लिए इसका सहारा ले रहे
दो परिवारों के आशियाने हुए राख
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