1500 रुपये के लिए प्रसूता को दो घंटे अस्पताल में टरकाने का आरोप, जांच के आदेश
फोटो: घटना समय प्रसव कक्ष में मौजूद अस्पताल महिला कर्मी | Prabhat Khabar Network
अररिया के मॉडल सदर अस्पताल में प्रसव पीड़ा से पीड़ित एक महिला को कथित तौर पर 1500 रुपये की मांग के चलते घंटों इंतजार कराया गया. अस्पताल प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर और नर्सों से स्पष्टीकरण मांगा है. यह घटना सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े करती है.
अररिया. मॉडल सदर अस्पताल के एमसीएच में प्रसव पीड़िता को 1500 रुपये के लिए करीब दो घंटे तक टरकाने और बाद में अस्पताल से बाहर कर देने के आरोप का मामला सामने आने के बाद अस्पताल प्रबंधन हरकत में आया है. मामले को गंभीरता से लेते हुए प्रभारी अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने उस समय ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्सों की पहचान कर स्पष्टीकरण मांगने का निर्देश दिया है.
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प्रसव पीड़ा में अस्पताल पहुंची थी महिला
दियारी पंचायत के मजगामा वार्ड संख्या 09 निवासी रेखा देवी को सोमवार की देर रात प्रसव पीड़ा होने पर परिजन मॉडल सदर अस्पताल के एमसीएच लेकर पहुंचे थे. परिजनों का आरोप है कि प्रसव कक्ष में तैनात नर्सों ने महिला को भर्ती करने के बजाय 1500 रुपये की मांग की. राशि नहीं देने पर महिला को करीब डेढ़ से दो घंटे तक प्रसव कक्ष के बाहर बैठाए रखा गया.
अस्पताल प्रबंधक की बात भी नहीं मानी
परिजनों के अनुसार उन्होंने मामले की जानकारी अस्पताल प्रबंधक विकास कुमार को दी. आरोप है कि अस्पताल प्रबंधक की ओर से कहे जाने के बावजूद प्रसव कक्ष में मौजूद स्टाफ ने महिला को भर्ती नहीं किया. इस दौरान परिजन लगातार महिला की हालत को लेकर परेशान रहे.
मीडिया पहुंची तो प्रसव कराने की कही बात
मामले की जानकारी मिलने पर मीडिया टीम अस्पताल पहुंची. परिजनों का आरोप है कि मीडिया के पहुंचने के बाद स्टाफ ने महिला का प्रसव कराने की बात कही. लेकिन मीडिया टीम के वहां से जाने के बाद महिला और उसके परिजनों को कथित तौर पर अस्पताल से यह कहते हुए बाहर कर दिया गया कि उन्होंने मीडिया और पुलिस को बुलाया है, अब यहां प्रसव नहीं कराया जायेगा.
निजी नर्सिंग होम में 8 से 10 हजार रुपये खर्च
अस्पताल से लौटाए जाने के बाद परिजनों के सामने महिला का प्रसव कराने की समस्या खड़ी हो गई. परिजनों के अनुसार रात करीब दो बजे उन्हें अस्पताल के समीप स्थित एक निजी नर्सिंग होम में महिला को ले जाना पड़ा. वहां प्रसव कराने में करीब 8 से 10 हजार रुपये खर्च हुए. परिजनों का आरोप है कि यदि सरकारी अस्पताल में समय पर इलाज और प्रसव की सुविधा मिल जाती तो उन्हें इतनी राशि खर्च नहीं करनी पड़ती.
रोस्टर से ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर-नर्स की होगी पहचान
मामले में प्रभारी अधीक्षक डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने कहा कि शिकायत संज्ञान में आई है. रोस्टर के आधार पर उस समय ड्यूटी पर मौजूद डॉक्टर और नर्सों की पहचान की जा रही है. संबंधित कर्मियों से स्पष्टीकरण मांगा गया है. जवाब मिलने के बाद मामले में दोषी पाए जाने वाले कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी.
बिना प्रसव कराए महिला को लौटाना गंभीर मामला
प्रभारी अधीक्षक ने कहा कि प्रसव पीड़ा में अस्पताल पहुंची महिला को बिना प्रसव कराए वापस लौटाना गंभीर मामला है. पूरे प्रकरण की जांच कराई जा रही है. अस्पताल प्रबंधन की कार्रवाई के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि जांच में कौन-कौन से कर्मी दोषी पाए जाते हैं और उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की जाती है.
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