मुक्केबाजों ने जडे पंच, पर 2014 में भी बनी रही प्रशासनिक अव्यवस्था
नयी दिल्ली : चाहे पुरुष हों या महिला मुक्केबाज उन्होंने तमाम परिस्थितियों से जूझने के बावजूद कुछ हासिल करने के लिये रिंग के भीतर अपना खून, पसीना और आंसू बहाये लेकिन भारतीय मुक्केबाजी में सत्ता के लिये झगडा इस साल भी बरकरार रहा. अच्छी खबर यह रही कि नई संस्था के आने के बाद भारत […]
नयी दिल्ली : चाहे पुरुष हों या महिला मुक्केबाज उन्होंने तमाम परिस्थितियों से जूझने के बावजूद कुछ हासिल करने के लिये रिंग के भीतर अपना खून, पसीना और आंसू बहाये लेकिन भारतीय मुक्केबाजी में सत्ता के लिये झगडा इस साल भी बरकरार रहा.
अच्छी खबर यह रही कि नई संस्था के आने के बाद भारत फिर से अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाजी संघ (आइबा) का हिस्सा बन गया. इसके अलावा राष्ट्रमंडल और एशियाई खेलों में कुछ मुक्केबाजों ने जानदार प्रदर्शन किया. लेकिन भारतीय ओलंपिक संघ (आईओए) ने बॉक्सिंग इंडिया को मान्यता देने से इन्कार कर दिया जिससे स्थितियां अब भी मुश्किल बनी हुई है. इसके अलावा एल सरिता देवी को एशियाई खेलों में कांस्य पदक लेने से इन्कार करने के कारण एक साल का प्रतिबंध भी झेलना पडा.
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