Mahalaxmi Vrat 2026: 3 अक्टूबर को है महालक्ष्मी व्रत का समापन, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि
माता लक्ष्मी (एआई तस्वीर)
Mahalaxmi Vrat 2026: 16 दिनों तक चलने वाला महालक्ष्मी व्रत 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को पूरा होगा. इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा के साथ व्रत का उद्यापन किया जाएगा.
Mahalaxmi Vrat 2026: मां लक्ष्मी को धन, वैभव और सुख-समृद्धि की देवी माना जाता है. उनकी कृपा पाने के लिए हर साल 16 दिनों तक महालक्ष्मी व्रत रखा जाता है. भाद्रपद शुक्ल अष्टमी से शुरू होने वाला यह व्रत आश्विन कृष्ण अष्टमी को समाप्त होता है.वर्ष 2026 में यह व्रत 19 सितंबर से शुरू हुआ था, जिसका समापन 3 अक्टूबर 2026, शनिवार को होगा.
महालक्ष्मी व्रत 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
महालक्ष्मी व्रत प्रारंभ: शनिवार, 19 सितंबर 2026
महालक्ष्मी व्रत पूर्ण: शनिवार, 3 अक्टूबर 2026
महालक्ष्मी व्रत की कुल अवधि: 16 दिन
अष्टमी तिथि प्रारंभ: 18 सितंबर 2026 को दोपहर 1:00 बजे
अष्टमी तिथि समाप्त: 19 सितंबर 2026 को दोपहर 3:26 बजे
महालक्ष्मी व्रत का धार्मिक महत्व
महालक्ष्मी व्रत मां लक्ष्मी की कृपा और घर में सुख-समृद्धि की कामना के लिए किया जाता है. धार्मिक मान्यता है कि 16 दिनों तक विधि-विधान से व्रत और पूजा करने से धन-धान्य, वैभव और परिवार की खुशहाली बनी रहती है. इस व्रत में 16 गांठों वाला डोरा धारण करने की भी परंपरा है, जिसे मां लक्ष्मी के 16 स्वरूपों का प्रतीक माना जाता है. व्रत के अंतिम दिन उद्यापन और दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है.
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महालक्ष्मी व्रत की पूजा विधि और उद्यापन नियम
- स्नान और संकल्प: सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें. इसके बाद मां लक्ष्मी का ध्यान करते हुए व्रत के समापन और उद्यापन का संकल्प लें.
- मां लक्ष्मी की स्थापना: पूजा स्थल पर चौकी रखें और उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं. इसके बाद मां लक्ष्मी की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें.
- पूजा सामग्री: मां लक्ष्मी को कमलगट्टा, दूर्वा, लाल कमल या गुलाब के फूल, रोली, अक्षत और सोलह श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. पूजा के बाद खीर का भोग लगाया जा सकता है.
- स्तोत्र का पाठ: पूजा के दौरान श्री सूक्त और महालक्ष्मी अष्टकम का पाठ करना शुभ माना जाता है.
- डोरे का विसर्जन: पूजा पूरी होने के बाद 16 गांठों वाले डोरे को सम्मानपूर्वक किसी पवित्र जल में प्रवाहित करने या मंदिर में अर्पित करने की परंपरा है.
- दान-दक्षिणा: उद्यापन के अवसर पर 16 सुहागिन महिलाओं या जरूरतमंद लोगों को फल, मिष्ठान, वस्त्र अथवा भोजन का दान करने की परंपरा बताई गई है.
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