Kartik Maas 2026: कल से शुरू होगा कार्तिक मास, जानें स्नान, तुलसी पूजा, दीपदान और व्रत के जरूरी नियम

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कार्तिक मास में तुलसी पूजा (तस्वीर- एआई)

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Kartik Maas 2026: कार्तिक मास 2026 की शुरुआत 27 अक्टूबर से हो रही है. इस पवित्र महीने में स्नान, तुलसी पूजा, दीपदान, हरिनाम जप और दान का विशेष महत्व माना जाता है. जानिए कार्तिक मास के पहले दिन स्नान से कैसे करें शुरुआत, पूजा और व्रत के जरूरी नियम.

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Kartik Maas 2026: भगवान श्री कृष्ण को प्रिय कार्तिक मास कल, 27 अक्टूबर 2026, मंगलवार से शुरू हो रहा है. वैष्णव परंपरा में इसे दामोदर मास भी कहा जाता है.

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस महीने में सुबह स्नान, तुलसी पूजा, हरिनाम जप, दीपदान और दान करने का विशेष महत्व है. आइए जानते हैं कार्तिक मास में किन नियमों का पालन करना चाहिए.

ब्रह्म मुहूर्त में स्नान से करें शुरुआत

कार्तिक मास के पहले दिन सुबह जल्दी उठकर व्रत का संकल्प लेने की परंपरा है. ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना शुभ माना जाता है. यदि आसपास कोई पवित्र नदी नहीं है, तो घर पर पानी में गंगाजल की कुछ बूंदें मिलाकर स्नान कर सकते हैं. इस दौरान गंगा, यमुना, गोदावरी, सरस्वती, नर्मदा, सिंधु और कावेरी नदियों का स्मरण किया जाता है.

स्नान के बाद स्वच्छ कपड़े पहनकर भगवान श्री कृष्ण की पूजा करें. इसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार प्रतिदिन मंत्र जप, धार्मिक ग्रंथों का पाठ या मंदिर में दर्शन करने का संकल्प लें.

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कार्तिक मास में तुलसी पूजा और हरिनाम जप

कार्तिक मास में तुलसी महारानी की पूजा करने की विशेष परंपरा है. प्रतिदिन तुलसी के पौधे में जल अर्पित करें, दीपक जलाएं और कम से कम तीन बार परिक्रमा करें. पौधे के आसपास सफाई रखें और उसकी उचित देखभाल करें.

इस महीने में हरे कृष्ण महामंत्र का जप भी महत्वपूर्ण माना जाता है. भक्त अपनी क्षमता के अनुसार प्रतिदिन जप की संख्या बढ़ा सकते हैं. इसके अलावा भगवद्गीता और श्रीमद्भागवत का पाठ करना तथा भगवान की कथाएं सुनना भी धार्मिक साधना का हिस्सा है.

कार्तिक मास में दीपदान (तस्वीर- एआई)
कार्तिक मास में दीपदान (तस्वीर- एआई)

शाम को करें दीपदान, उपवास में रखें ध्यान

कार्तिक मास में प्रतिदिन शाम को भगवान श्री कृष्ण के सामने दीपदान करने की परंपरा है. इसके लिए घी या तिल के तेल का दीपक जला सकते हैं. इस दौरान दामोदर अष्टकम का पाठ करना भी वैष्णव परंपरा में विशेष महत्व रखता है.

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उपवास के लिए अपनी शारीरिक क्षमता और पारिवारिक स्थिति के अनुसार नियम चुनें. कोई एक समय भोजन कर सकता है, तो कोई अपनी प्रिय वस्तु का त्याग कर सकता है. सात्विक भोजन ग्रहण करना और नशे से दूर रहना भी इस महीने के प्रमुख नियमों में शामिल है.

कार्तिक मास में क्रोध, झूठ, निंदा और अनावश्यक मनोरंजन से बचने की सलाह दी जाती है. जरूरतमंदों, मंदिरों और गौशालाओं में अपनी क्षमता के अनुसार दान देना भी इस महीने की धार्मिक परंपराओं का हिस्सा है.

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