शनि अमावस्‍या: 14 साल बाद बना यह शुभ योग, ये उपाय संवारेंगे आपकी किस्मत

Published at :16 Mar 2018 10:14 PM (IST)
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शनि अमावस्‍या: 14 साल बाद बना यह शुभ योग, ये उपाय संवारेंगे आपकी किस्मत

17 मार्च शनिवार को 14 साल बाद शनिश्चरी अमावस्या/शनि अमावस्या पर शुभ योग बना है. इससे पहले 20 मार्च 2004 को चैत्र मास में शनैश्चरी अमावस्या आयी थी. 2018 के सात साल बाद, यानी 29 मार्च 2025 को यहपुण्य संयोग फिर बनेगा. इस शुभ योग में स्नान, दान और पूजा कई गुना अधिक फलदायी रहेगी. […]

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17 मार्च शनिवार को 14 साल बाद शनिश्चरी अमावस्या/शनि अमावस्या पर शुभ योग बना है. इससे पहले 20 मार्च 2004 को चैत्र मास में शनैश्चरी अमावस्या आयी थी.

2018 के सात साल बाद, यानी 29 मार्च 2025 को यहपुण्य संयोग फिर बनेगा. इस शुभ योग में स्नान, दान और पूजा कई गुना अधिक फलदायी रहेगी.

इसबार अमावस्या शुक्रवार को शाम लगभग 6 बजे शुरू होगी और शनिवार की शाम लगभग 6.35 बजे तक रहेगी. अमावस्या पर शनि-मंगल की युति के अलावा पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र, नाग करण, कुंभ राशि का चंद्रमा सहित कई योग बन रहे हैं, जो अब सात साल बाद शनि अमावस्या पर बनेंगे.

इस दिन अगर शनिदेव को प्रसन्न करने के उपाय किये जायें, तो किसी की भी किस्मत चमक सकती है. जिन लोगों पर इस समय साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव है, उनके लिए भी यह दिन विशेष है.

इस दिन शनिदेव की पूजा और उपाय करने से उनकी परेशानियां कुछ कम हो सकती हैं. इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने और दान करने का भी विशेष महत्व धर्म ग्रंथों में बताया गया है.

शनि दोष से मुक्ति पाने के लिए इस शुभ योग में करें ये उपाय

शनि अमावस्या पर काले रंग के वस्त्र धारण करें. तुलसी के 108 पत्ते लेकर उन पर श्री राम लिखें और पत्तों को एक सूत्र में पिरो कर माला बना कर श्री हरि विष्णु के गले में डालें.

अगर आप अमावस्या का व्रत नहीं कर रहे तो भी शनि देव का पूजन और तैलाभिषेक कर शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या और महादशा जनित संकट और आपदाओं से मुक्ति पा सकते हैं. शनि देव की कृपा से मनुष्य को जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है.

कम लोगों को ही पता होगा कि शनि अमावस्‍या के दिन शनि देव की पूजा प्रदोष काल या रात में की जाती है. अगर आप इस दिन व्रत रख पाएं तो और अच्‍छा होगा.

हर शनिवार को जिस तरह आप पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दीप जलाते हैं, शनि अमावस्‍या के दिन भी जलाएं. दीपक जलाने के बाद शनि चालीसा का पाठ करें. अगर आप पाठ नहीं कर रहे हैं तो आप शनि मंत्र का जाप भी कर सकते हैं.

शनि देवता हमेशा ऐसे लोगों से खुश होते हैं जो निर्धनों की मदद करते हैं और उन्‍हें प्रसन्‍न रखते हैं. ऐसे में शनि अमावस्‍या के दिन आप अगर निर्धनजनों को खाना खिलाएं या खाने-पीने की चीजें दान करें, तो शनि देव प्रसन्‍न हो सकते हैं. शनिदेव से कृपा पाने की प्रार्थना करें.

सवा मीटर काले वस्त्र में ये चीजें बांधकर वास्तविक डकौत को दें – काले जूते या चप्पल, सवा किलो काले साबुत उड़द, सवा किलो काले तिल, सवा लीटर सरसों का तेल, एक चाकू, 8 काले गुलाब जामुन, काले या नीले फूल.

अगर आप पर शनि देव की टेढ़ी नजर है, यानी साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव चल रहा है, तो काली गाय को बूंदी के लड्डू खिलाएं.

शनि पीड़ा शमन के लिए करें इन मंत्र का जाप

नीलान्जन समाभासम् – रविपुत्रम यमाग्रजम
छाया मार्तण्ड सम्भूतम- तम नमामि शनैश्चरम

कोणस्थ: पिंगलो बभ्रु: कृष्णौ रौद्रोंतको यम:
सौरी: शनिश्चरो मंद:पिप्पलादेन संस्तुत:

ॐ प्रां प्रीं प्रौं शं शनैश्चराय नम:

ॐ शं शनैश्चराय नम:

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