सत्येन्द्र पाल सिंह (नीदरलैंड से लौटकर) वरिष्ठ खेल पत्रकारनीदरलैंड में खेले गये महिला विश्व कप हॉकी टूर्नामेंट में भारत की नौजवान खिलाड़ियों ने अनुभवी खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया और भारत को पांचवां स्थान दिलाया. यदि भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में मिले मौकों को भुनाया होता, तो वह सेमीफाइनल में पहुंचती. विश्व कप में बेहतर प्रदर्शन के बाद भारतीय टीम के एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने की उम्मीद बनी है.कप्तान व सेंटर हाफ सलीमा टेटे के अनुकरणीय खेल की बदौलत भारत 16वें एफआइएच महिला हॉकी विश्व कप में जर्मनी की मजबूत दीवार को भेदने में सक्षम रहा. इस प्रकार वह इस टूर्नामेंट में पांचवां स्थान पाकर सुर्खियों में है. वर्ष 1974 में इस टूर्नामेंट के पहले संस्करण में चौथे स्थान पर रहने के बाद विश्व कप के इतिहास में भारतीय महिला हॉकी टीम का यह अब तक का दूसरा सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है. भारत की टीम ने महिला हॉकी विश्व कप के पहले चरण में, पूल डी में चीन और इंग्लैंड को तथा दूसरे चरण में, पूल इ में ऑस्ट्रेलिया जैसी दुनिया की दिग्गज टीमों को बराबरी पर रोका, फिर भी वह सेमीफाइनल में स्थान पाने से चूक गयी.भारत ने इस टूर्नामेंट में कुल छह मैचों में तीन ड्रॉ खेले, दो जीते और एक मैच में उसे हार मिली. भारत ने जहां इस टूर्नामेंट में दक्षिण अफ्रीका व जर्मनी पर हासिल की, वहीं नीदरलैंड के हाथों 2-0 से उसे इकलौती हार मिली. भारत की ओर से नवनीत कौर ने छह मैचों में कुल चार गोल किये, जबकि दीपिका सहरावत ने दो, ललरेमसिआमी, इशिका, सुनेलिता टोप्पो, सुशीला चानू व साक्षी राणा ने एक-एक गोल किये. विदित हो कि ऑलराउंडर, ड्रैग फ्लिकर-स्ट्राइकर दीपिका सहरावत सहित भारत की 11 खिलाड़ियों ने एम्सतलवीन, नीदरलैंड में अपना पहला महिला हॉकी विश्व कप खेला. इन सभी नौजवान खिलाड़ियों ने सविता, सुशीला चानू, नवनीत कौर, नेहा जैसी 200 से ज्यादा और ललरेमसिआमी, सलीमा टेटे व इशिका जैसी सौ से ज्यादा अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली अनुभवी खिलाड़ियों के मार्गदर्शन में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन किया. यदि भारतीय टीम ने टूर्नामेंट में मिले मौकों को भुनाया होता, तो निश्चित तौर पर वह सेमीफाइनल में पहुंचती और बहुत संभव था कि वह इससे भी एक पायदान ऊपर चढ़कर पदक भी जीतती. कहते हैं कि सफलता के लिए पुरुषार्थ के साथ भाग्य का भी कुछ साथ चाहिए होता है, पर अफसोस कि भारत को यही नहीं मिला. लेकिन विश्व कप में पांचवें स्थान पर रहने के कारण ही हमारी महिला हॉकी टीम एफआइएच महिला विश्व रैंकिंग में एक पायदान ऊपर चढ़कर आठवें स्थान पर पहुंच गयी. चीफ कोच शुएर्ड मरीन के मार्गदर्शन में विश्व कप में भारतीय टीम के शानदार प्रदर्शन से यह उम्मीद बंधी है कि वह 19 सितंबर से आइएची- नगोया (जापान) में शुरू होनेवाले एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतकर 2028 के लास एंजेलिस ऑलिंपिक के लिए क्वॉलिफाई करेगी. भारत के पास इस समय अनुभवी सुशीला चानू, इशिका चौधरी व शिल्पी डबास के साथ-साथ 318 अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने वाली और दुनिया की बेहद मुस्तैद गोलरक्षक के रूप में जानी जानेवाली 36 वर्षीय सविता और गोलरक्षक बिचू देवी खरीबम के रूप में बेहद मजबूत रक्षा पंक्ति है. भारत के पास मध्य पंक्ति में अनुभवी नेहा के अतिरिक्त सलीमा टेटे, निकी प्रधान और सुनेलिता टोप्पो हैं. सदाबहार स्ट्राइकर नवजोत कौर, ललरेमसिआमी, दीपिका सहरावत व इशिका के रूप में तेज-तर्रार अग्रिम पंक्ति भी मौजूद है, जो गोल करने और पेनाल्टी कॉर्नर दिलाने के साथ-साथ पीछे आकर रक्षा पंक्ति की मदद भी करती हैं. इन्हीं खिलाड़ियों की बदौलत भारत अब एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीत सीधे 2028 के लास एंजेलिस ओलिंपिक के लिए क्वॉलिफाई करना चाहता है. इसके लिए भारत को एशियाई खेलों में दबाव बनाने और पेनाल्टी कॉर्नर के मौके बनाने और इन्हें गोल में बदलने के साथ-साथ आधिकारिक मैदानी गोल करने की जरूरत है. भारत की नेहा, सविता, सुशीला चानू बेशक जानती हैं कि उनके अपने अंतरराष्ट्रीय हॉकी करियर की सांझ हो रही है, लेकिन वे चीन की दीवार गिराकर एशियाई खेलों का स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल ओलंपिक के लिए सीधे क्वॉलिफाई करने के लिए प्रतिबद्ध दिखाई दे रही हैं. एशियाई खेलों में अब तक महिला वर्ग में दक्षिण कोरिया ने सबसे ज्यादा पांच बार, चीन ने चार बार और भारतीय महिला हॉकी टीम ने मात्र एक बार (1982 में) स्वर्ण जीता है. फिलहाल नवजोत, ललरेमसिआमी के साथ मिलकर भारत की निगाहें जापान में मैच दर मैच आगे बढ़ने और अपने पूल बी में जापान, थाईलैंड, इंडोनेशिया, सिंगापुर, उज्बेकिस्तान पर जीत के साथ शीर्ष दो में पहुंचकर सेमीफाइनल में स्थान बनाने पर लगी हैं. भले ही भारत का लक्ष्य एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतना है, पर इसके लिए उसे जापान, चीन और दक्षिण कोरिया के रूप में राह में आने वाली हर बाधा को पार करना होगा. बहुत संभव है कि भारत का सेमीफाइनल मुकाबला चीन के साथ न हो, पर दक्षिण कोरिया से मुकाबला मुमकिन है. महिला विश्व कप में भले ही भारत ने चीन सहित दिग्गज टीमों को बराबरी पर रोक दिया और जर्मनी को हराया, पर इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि चीन भी बदली हुई रणनीति के साथ एशियाई खेलों का अपना स्वर्ण पदक बरकरार रखने उतरेगा. उधर चीफ कोच मरीन के मार्गदर्शन में भारतीय महिला हॉकी टीम भी विश्व कप के अच्छे प्रदर्शन के बाद एशियाई खेलों में और बेहतर प्रदर्शन कर उसके खिलाफ ड्रॉ नहीं, बल्कि बदली हुई रणनीति से जीत दर्ज करने और 1982 की सफलता को जापान में दोहराने का पुरजोर प्रयास करेगी.(ये लेखक के निजी विचार हैं)