अधिकारियों की कमी
Updated at : 17 Mar 2017 6:00 AM (IST)
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देश में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की कमी चिंताजनक स्तर पर पहुंच गयी है. फिलहाल 4,926 सेवारत अधिकारी हैं, जबकि कुल मंजूर संख्या 6,396 है. कार्मिक मसलों पर स्थायी संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इससे केंद्र और राज्य सरकारों के कामकाज पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. हालांकि, अधिकारियों के […]
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देश में भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों की कमी चिंताजनक स्तर पर पहुंच गयी है. फिलहाल 4,926 सेवारत अधिकारी हैं, जबकि कुल मंजूर संख्या 6,396 है. कार्मिक मसलों पर स्थायी संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इससे केंद्र और राज्य सरकारों के कामकाज पर नकारात्मक असर पड़ रहा है. हालांकि, अधिकारियों के कम होने की समस्या 1951 से ही बनी हुई है, पर अब स्थिति विकट रूप लेती जा रही है. हर साल सीधे चयनित 120 अधिकारी सेवानिवृत होते हैं, परंतु सिर्फ 60 नये लोगों की ही नियुक्ति होती है.
इस समस्या से कई महत्वपूर्ण क्षेत्र जूझ रहे हैं. प्रशासनिक अधिकारियों से जुड़े मामलों के निपटारे के लिए स्थापित केंद्रीय प्रशासनिक ट्रिब्यूनल में 66 मंजूर सदस्य संख्या में 21 पद खाली हैं. इसका नतीजा यह है कि इस साल एक जनवरी तक लंबित मामलों की संख्या 41,849 तक जा पहुंची है, जिनमें से करीब एक-तिहाई मामले तीन सालों से अधिक समय से लटके पड़े हैं. यही हालत केंद्रीय जांच ब्यूरो की है, जहां कमी 21 फीसदी है. नोटबंदी के बाद संदिग्ध लेन-देन की जांच को लेकर आयकर विभाग के अधिकारियों ने तो प्रधानमंत्री को पत्र लिख कर अधिकारियों की कमी और काम के बोझ की शिकायत की थी. इस विभाग में अभी 20 हजार से अधिक कर्मचारियों का अभाव है. करीब 55 हजार लोग 76 हजार लोगों का काम कर रहे हैं. पिछले साल संसद में सरकार ने बताया था कि सेना में 8,671 यानी करीब 17 फीसदी अधिकारी कम हैं.
वहां अधिकारियों की मंजूर संख्या 49,833 है. इस समस्या के कई कारण बताये जाते हैं, जिनमें सबसे प्रमुख कारण नियुक्ति प्रक्रिया का कठिन होना तथा प्रशिक्षण के लिए संसाधनों की कमी. कुछ अधिकारी नियुक्ति के बाद जल्दी ही निजी क्षेत्र का रुख भी कर लेते हैं, जहां कौशल दिखाने और आमदनी के ज्यादा मौके हैं. संसदीय समिति ने राष्ट्रीय प्रशासनिक एकेडमी की क्षमता को इस्तेमाल करने तथा उसके संवर्द्धन की पुरजोर सिफारिश की है.
इस संदर्भ में संतोष की बात है कि अगले वित्त वर्ष के बजट में सरकारी नौकरियों में लगभग 2.83 लाख की बढ़ोतरी करने का प्रस्ताव है. उम्मीद है कि इससे अधिकारियों की कमी को कुछ हद तक दूर करने में मदद मिलेगी. सरकारी नीतियों को तय करने तथा उन्हें अमली जामा पहनाने का जिम्मा प्रशासनिक तंत्र का ही होता है. यदि पर्याप्त संख्या में अधिकारी नहीं होंगे, तो शासन को आम जन तक प्रभावी ढंग से ले जाना मुश्किल हो जायेगा. प्रशासन के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा और राजस्व के मोरचे पर भी मुस्तैदी की जरूरत है.
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