जीएसटी पर गतिरोध

Updated at : 22 Nov 2016 6:39 AM (IST)
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जीएसटी पर गतिरोध

केंद्र और राज्यों के बीच वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में कर निर्धारण के मामले में दोहरे नियंत्रण के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है. अगर 25 नवंबर को होनेवाली जीएसटी काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक में इस पर आम सहमति नहीं बनी, तो अगले वित्तीय वर्ष से इसे लागू करना संभव न हो सकेगा. […]

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केंद्र और राज्यों के बीच वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली में कर निर्धारण के मामले में दोहरे नियंत्रण के मुद्दे पर गतिरोध बना हुआ है. अगर 25 नवंबर को होनेवाली जीएसटी काउंसिल की महत्वपूर्ण बैठक में इस पर आम सहमति नहीं बनी, तो अगले वित्तीय वर्ष से इसे लागू करना संभव न हो सकेगा.
हालांकि, शुक्रवार की बैठक से पहले अनौपचारिक तौर पर सहमति बनाने की कोशिश जारी है. राज्यों की मांग है कि डेढ़ करोड़ रुपये तक के सालाना टर्नओवर के सभी वस्तुओं और सेवाओं से संबंधित व्यवसायों के आकलन और कर निर्धारण पर उनका नियंत्रण हो. राज्यों का तर्क है कि उनके पास इसके लिए बुनियादी ढांचा है और करदाताओं को भी स्थानीय अधिकारियों के साथ सुविधा होगी. मौजूदा अप्रत्यक्ष करों की बहुतायत के स्थान पर जीएसटी के तहत समान प्रत्यक्ष करों की व्यवस्था है.
इसके लागू होने के बाद केंद्र का उत्पाद शुल्क और सेवा कर तथा राज्यों के वैट और बिक्री शुल्क समाप्त हो जायेंगे. वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पहले ही कहा है कि जीएसटी तंत्र को अगले वर्ष मध्य सितंबर तक लागू कर दिया जाना चाहिए. इसके बाद संबंधित संविधान संशोधन की वैधता समाप्त हो जायेगी. साथ ही, राज्यों को केंद्र के पास जमा करों में से अपना हिस्सा भी मिल पाने में मुश्किलें खड़ी हो सकती हैं. विवादित मसलों पर आम राय बनने के बाद प्रस्तावों को संसद और विधानसभाओं से मंजूरी लेनी होगी. ऐसे में अब किसी भी तरह की देरी इस जरूरी आर्थिक सुधार की राह को बाधित कर सकती है और जीएसटी के लाभों से देश को अंतिम निर्णय होने तक वंचित रहना पड़ सकता है.
संतोष की बात है कि जीएसटी के ढांचे पर केंद्र और राज्य सरकारों की सहमति पहले ही बन चुकी है तथा इसके लिए जरूरी संशोधनों को मंजूर किया जा चुका है. रिपोर्टों की मानें, तो उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु तथा केरल की मांग पर केंद्र सरकार कुछ अन्य सहूलियतें और छूट देने के लिए तैयार है.
राज्यों के वित्तीय हितों को ध्यान में रखने के साथ यह भी जरूरी है कि पूरे देश के कराधान में समरूपता लाने का उद्देश्य भी पूरा हो, ताकि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके. उम्मीद है कि मसले के समुचित समाधान के लिए दोनों पक्ष नरम और व्यावहारिक रवैया अपनाते हुए जीएसटी को अमली जामा पहनाने के लिए प्रयासरत होंगे.
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