असभ्यता की संस्कृति!

पूरे संसार में सभी जातियों ने विकास के क्रम में असभ्यता का त्याग कर सभ्य होने का प्रयास किया़ यह क्रम आज भी जारी है, लेकिन पश्चिमी यूरोपीय देशों ने ठीक इसके विपरीत किया है़ चाहे न्यूयार्क, फिनलैंड, स्वीडेन आदि का नो पैंट्स डे, नो पैंट्स सबवे राइड डे हो या जर्मनी, कनाडा आदि का […]
पूरे संसार में सभी जातियों ने विकास के क्रम में असभ्यता का त्याग कर सभ्य होने का प्रयास किया़ यह क्रम आज भी जारी है, लेकिन पश्चिमी यूरोपीय देशों ने ठीक इसके विपरीत किया है़
चाहे न्यूयार्क, फिनलैंड, स्वीडेन आदि का नो पैंट्स डे, नो पैंट्स सबवे राइड डे हो या जर्मनी, कनाडा आदि का वर्ल्ड नेकेड बाइक राइड डे. इन सारे दिवसों में निर्लज्जता, नंगापन को परंपरागत पर्व का रूप दिया गया है़ जो वस्त्र अंत: वस्त्र थे, वही बाह्य वस्त्र हो गये़ वे कहते हैं, यही सभ्यता का सूचक है़ नंगापन यदि सभ्यता है, तो पशु-जाति सर्वप्रथम सभ्य जाति होगी़
गुलाम गौस ‘आसवी’, धनबाद
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