विज्ञान के बराबर खेल को सम्मान ?

शोध-अनुसंधान में लगे विश्व के गणमान्य विद्वानों-प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों से प्रशंसित भारतीय वैज्ञानिक डॉ प्रोफेसर चिंतामणि नागेसा रामचंद्र राव को देश के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ के लिए चुना जाना उचित, श्रेष्ठ और प्रशंसनीय निर्णय है. भारत की मनीषा व ज्ञान-विज्ञान की महती गौरवमयी परंपरा का समादर अभिनंदनीय सद्भावपूर्ण कार्य है. वहीं, एक कुशल क्रिकेट […]
शोध-अनुसंधान में लगे विश्व के गणमान्य विद्वानों-प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों से प्रशंसित भारतीय वैज्ञानिक डॉ प्रोफेसर चिंतामणि नागेसा रामचंद्र राव को देश के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान ‘भारत रत्न’ के लिए चुना जाना उचित, श्रेष्ठ और प्रशंसनीय निर्णय है.
भारत की मनीषा व ज्ञान-विज्ञान की महती गौरवमयी परंपरा का समादर अभिनंदनीय सद्भावपूर्ण कार्य है. वहीं, एक कुशल क्रिकेट खिलाड़ी को एक वैज्ञानिक ज्ञान की गरिमा की श्रेष्ठता के मानक पर, उसी वैज्ञानिक के समकक्ष, सम्मान दिया जाना, अनुसंधान-ज्ञान की पुराप्रतिष्ठित परंपराओं का घोर उपहासपूर्ण अपमान है. देश के युवाओं में क्रीड़ा-कौतुकप्रियता का उन्माद पैदा कर, ज्ञान-विज्ञान-शोध के अध्ययन से विमुखता की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित किया जा रहा है. सरकार इस पहलू पर सोचे.
डॉ रामस्वार्थ ठाकुर, मोतिहारी
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