सरस्वती मां ने भी लिया पार्टी का मजा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :26 Jan 2015 6:19 AM (IST)
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दक्षा वैदकर प्रभात खबर, पटना शनिवार को पटना में सरस्वती पूजा धूमधाम से मनायी गयी. कहीं-कहीं तो कुछ ज्यादा ही धूमधाम से. ‘धूमधाम’ से मेरा मतलब यह नहीं है कि हर्षोल्लास के साथ पूजा-पाठ करके मनायी गयी. बल्कि मेरा मतलब जोरदार डीजे पार्टी में जोरदार नाच-गाने से है. मां सरस्वती की स्थापना होते ही संगीत […]
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दक्षा वैदकर
प्रभात खबर, पटना
शनिवार को पटना में सरस्वती पूजा धूमधाम से मनायी गयी. कहीं-कहीं तो कुछ ज्यादा ही धूमधाम से. ‘धूमधाम’ से मेरा मतलब यह नहीं है कि हर्षोल्लास के साथ पूजा-पाठ करके मनायी गयी.
बल्कि मेरा मतलब जोरदार डीजे पार्टी में जोरदार नाच-गाने से है. मां सरस्वती की स्थापना होते ही संगीत यंत्रों ने जो बजना शुरू किया, तो देर रात तक नहीं थमे. तरह-तरह के संगीत सम्राटों के गीतों से सरस्वती पूजन स्थल गुंजायमान हो रहा था. सबसे ज्यादा यो-यो हनी सिंह जी के गीतों ने समां बांधा और माहौल भक्तिमय कर दिया.
सनी लियोनी जी के गीत ‘बेबी डॉल मैं सोने दी..’ पर शहर की बच्चियों ने अद्भुत नृत्य प्रस्तुत किये. कुछ गीत तो ऐसे लग रहे थे कि भक्तों ने सरस्वती मां के लिए नहीं, बल्कि अपनी दोस्तों के लिए बजाये हों. ‘बंदा मैं बैचलर तू कन्या कुंवारी.. आ जा हो जाये थोड़ा लक तू लक मी..’ मां को देख ऐसा लग रहा था कि गीत को सुन वह भी मंद-मंद मुस्कुरा रही है और कह रही है कि वाह! क्या अद्भुत गीत है.
उनके चेहरे पर भी संतोष के भाव उमड़ आये थे. इस साल मां और भी ज्यादा खूबसूरत लग रही थी. मां की मूर्ति का वजन थोड़ा कम जो हो गया था. और भला क्यों न हो. इस बार सभी कलाकारों ने प्लास्टर ऑफ पेरिस से मां की विशेष मूर्तियां जो बनवायी थीं. दरअसल मिट्टी की मूर्ति थोड़ी भारी होती है और उसे उठा कर भक्तगण ठीक से नृत्य नहीं कर पा रहे थे, तो उन्होंने हल्की वाली मां की मूर्ति खरीद ली थी. ये पानी में घुलेगी नहीं, तो क्या हुआ.
पानी में केमिकल मिलेगा, तो क्या हुआ.. कम-से-कम मां के लिए नाच-गाने में कमी न होने पाये. मां को भी उसी को देखने में तो आनंद की प्राप्ति होती है. खैर, मां को इन सब से क्या लेना-देना कि मुङो किस पदार्थ से बनाया है. उन्हें तो हर साल की तरह इस साल भी बॉलीवुड के मस्त-मस्त गाने सुनने को मिल रहे थे. जो सालों पहले उन्हें नहीं मिलते थे. मां भी पुराने गीतों को सुन-सुन कर थोड़ी बोर हो गयी थी..
वही घिसे-पिटे गीत ‘हे वीणावादिनी वर दे, वर दे, वीणावादिनी वर दे, प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव भारत में भर दे!’ और ‘हे शारदे मां, हे शारदे मां. अज्ञानता से हमें तार दे मां’.. स्कूल के छोटे-छोटे बच्चे आंख मूंद कर ये गीत मां के सामने गाते थे. मां को इसमें ज्यादा मजा नहीं आता था. न ही ये बच्चे एक हाथ ऊपर और एक हाथ नीचे रखते हुए माइकल जैक्सन की स्टाइल में ‘आउं’ डांस करते थे और न ही जैकी श्रॉफ के बेटे की तरह ‘सीटी’ बजाते थे.
मां को ये नयी जनरेशन के बच्चे बेहद भा रहे थे, जो उनके सामने नृत्य करते हुए गीत गा रहे थे ‘मेरे नाल तू व्हीसल बजा’. अहा, कितने प्यारे बच्चे हैं. मां को भी नृत्य करने को कह रहे हैं. इतना ही नहीं मां को पार्टी छोड़ कर जाने नहीं देना चाहते हैं. बार-बार कह रहे हैं, ‘अभी तो पार्टी शुरू हुई है..’ ‘हां रात भर.. आ रात भर.. जाये न घर.. हां रात भर..’
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