आतंकी खतरा और लचर सुरक्षा तंत्र

Published at :12 Jan 2015 5:52 AM (IST)
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आतंकी खतरा और लचर सुरक्षा तंत्र

झारखंड में एक ओर आतंकी संगठनों की पैठ बढ़ती जा रही है, वहीं सुरक्षा तंत्र वैसी ही लचर है. आतंकी संगठनों के लोग वारदातों को अंजाम देकर राजधानी समेत राज्य के कई इलाकों में न केवल पनाह लेते हैं, बल्कि यहीं से कई साजिशें भी रचते हैं. पुलिस प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती. […]

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झारखंड में एक ओर आतंकी संगठनों की पैठ बढ़ती जा रही है, वहीं सुरक्षा तंत्र वैसी ही लचर है. आतंकी संगठनों के लोग वारदातों को अंजाम देकर राजधानी समेत राज्य के कई इलाकों में न केवल पनाह लेते हैं, बल्कि यहीं से कई साजिशें भी रचते हैं.
पुलिस प्रशासन को इसकी भनक तक नहीं लगती. एनआइए जैसी राष्ट्रीय जांच एजेंसियां यहां आकर जब कार्रवाई करती है और आतंकियों को पकड़ती है, तब आतंकी संगठनों की भयावह साजिश का पता चलता है. पड़ोस के राज्यों में घटनाओं को अंजाम देकर आरोपी यहां छिपे रहते हैं, पर राज्य पुलिस के पास ऐसा कोई खुफिया सुरक्षा तंत्र नहीं है, जो इन आतंकियों, गुनहगारों पर नजर रख सके. उन्हें रोक सके. उन पर समय रहते कार्रवाई कर सके. सुरक्षा तंत्र की कमजोरी से ही पश्चिम बंगाल से सटा झारखंड का साहेबगंज व राजमहल क्षेत्र आतंकियों का ‘सेफ जोन’ बनता जा रहा है.
दो अक्तूबर 2014 को हुए वर्धमान विस्फोट के बाद एनआइए की हाल की कार्रवाई इसका उदाहरण है. राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी की जांच में कई आतंकियों के तार राज्य के इस क्षेत्र से जुड़े मिले हैं. एक दिन पहले ही एनआइए ने जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादेश (जेएमबी) के इनामी आतंकी मो रेजाउल करीम को तालाझारी से पकड़ा है. पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद का यह आतंकी यहां नाम बदल कर राजमिस्त्री का काम कर रहा था. वह न केवल बम बनाने में एक्सपर्ट है, बल्कि उसके घर से दर्जनों बम मिले थे. वह वर्धमान ब्लास्ट के मुख्य आरोपी कौसर उर्फ बोमारू मिजान का करीबी है.
ब्लास्ट में घायल आतंकी अब्दुल हकीम से लगातार संपर्क में था. इससे पहले भी एनआइए इस क्षेत्र के कई ठिकानों पर आतंकियों की खोज में छापामारी कर चुकी है. एक साल पहले भी लोकसभा चुनाव से पहले पटना और बोधगया ब्लास्ट के बाद आतंकियों के तार रांची समेत राज्य के कई इलाकों से जुड़े होने के प्रमाण मिले थे.
राष्ट्रीय सुरक्षा जांच एजेंसी यहां छिपे आतंकियों को पकड़ने में कामयाब रही है, जबकि हमारी झारखंड पुलिस कुछ नहीं कर सकी. राज्य में नयी सरकार बनने के बाद उम्मीद है कि पुलिस की छवि बदलेगी और यहां का सुरक्षा तंत्र मजबूत होगा.
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