बर्गर किंग आ गया पुआ किंग लापता

Published at :22 Nov 2014 4:34 AM (IST)
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बर्गर किंग आ गया पुआ किंग लापता

भारत में राष्ट्रवाद, हिंदूवाद, ‘मेक इन इंडिया’-वाद और अच्छे दिनों की बिसात पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नयी सरकार बन गयी. देश के मतदाताओं ने विदेशी बनाम स्वदेशी, भ्रष्टाचार बनाम स्वच्छ प्रशासन और पाश्चात्य सभ्यता बनाम भारतीय संस्कृति की लड़ाई के नाम पर भाजपा को नहीं, बल्कि मोदी को वोट किया. प्रचंड बहुमत पाकर […]

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भारत में राष्ट्रवाद, हिंदूवाद, ‘मेक इन इंडिया’-वाद और अच्छे दिनों की बिसात पर नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में नयी सरकार बन गयी. देश के मतदाताओं ने विदेशी बनाम स्वदेशी, भ्रष्टाचार बनाम स्वच्छ प्रशासन और पाश्चात्य सभ्यता बनाम भारतीय संस्कृति की लड़ाई के नाम पर भाजपा को नहीं, बल्कि मोदी को वोट किया. प्रचंड बहुमत पाकर भाजपा बाग-बाग हो गयी, तो उसके सहयोगी दल कथक करने लगे. उद्योगपति और कारोबारी आसमान में गुब्बारे की तरह उड़ने लगे.

क्योंकि उन्हें इल्म था कि मोदी के आते ही उनके लिए सरकार का खजाना खुल जायेगा और वे सरकार गठन के कुछ दिनों बाद ही कुबेरों के कुबेर हो जायेंगे. देश की अवाम को भी महंगाई से निजात मिलने और आमदनी बढ़ने का भरोसा था. लेकिन सब गुड़ गोबर.

प्रधानमंत्री ने देश की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए ‘मेक इन इंडिया’ का अभियान चलाया, मगर इसमें देश के उद्यमियों ने ही पलीता लगाना शुरू कर दिया. उन्होंने पूंजी निवेश के लिए भारत छोड़ चीन, नेपाल, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका आदि देशों में कदम बढ़ाना शुरू कर दिया, बल्कि चीन, अमेरिका समेत कई देशों में तो अपने कारखाने भी खोलने शुरू कर दिये. बड़ों की देखादेखी छोटे उद्यमियों ने भी इसी दिशा में कदम बढ़ाने शुरू कर दिये. खैर, ये तो हुई मेक इन इंडिया की बात, अब जरा विदेशी बनाम स्वदेशी पर भी बात कर लें.

कपालभाति और शीर्षासन किये हुए कई सालों से एक बाबा पूरे देश में घूम-घूम कर स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने का नारा लगा रहे थे. भाजपा ने भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआइ) और काला धन के विरोध में सड़क से संसद तक आंदोलन किया. भारत बंद करके एक दिन में होनेवाले अरबों रुपये के व्यापार को चौपट किया. न जाने कितनी दफा ऐसा भारत बंद किया गया. मोदी ने चुनाव में इन सभी को भुनाया. मगर अब? अब भी धड़ल्ले से विदेशी निवेश हो रहे हैं. विदेशी निवेश न सिर्फ हो रहे हैं, बल्कि उसे म्यांमार, जापान, अमेरिका, चीन और नेपाल आदि में जा-जाकर प्रोत्साहित किया जा रहा है. निवेश के नाम पर अभी तक विदेशों में स्थापित भारतवंशियों के निवेश का तो पता नहीं चल सका है. अलबत्ता, पिज्ज, बर्गर, स्कर्ट, हाफ शर्ट, फुल शर्ट, पैंट, कच्छा-बनियान बेचनेवाली ‘किंग’ कंपनियों का बाढ़ सरीखा आगमन जरूर शुरू हो गया है. मुङो ताज्जुब तब हुआ, जब पता चला कि दुनिया में ‘बर्गर किंग’ के नाम से विख्यात फूड निर्माता कंपनी वर्ल्डवाइड के भारत में अगले दो महीने में दर्जनभर आउटलेट खुलेंगे. यह खबर पढ़ कर मैं मन ही मन जोर से हंसा. सोचा कि आज तक भारत में कोई माई या फिर बाप का लाल ऐसा पैदा नहीं हुआ, जो पुआ या फिर मालपुआ बनानेवाली कंपनियों में किंग कहलायेगा. कोई न कोई तो होगा ही, जो मालपुआ किंग कहलायेगा या फिर किंग बनेगा.

विश्वत सेन

प्रभात खबर, रांची

vishwat.sen@gmail.com

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