मनरेगा पर नयी सरकार की सोच

मनरेगा के विरोध में एक प्रबल तर्क योजना के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार का रहा है. लेकिन, भ्रष्टाचार की दलील देकर क्या किसी अधिकार को समाप्त किया जा सकता है? जीवन की रक्षा पूरी तरह नहीं हो पा रही है, तो क्या जीवन जीने से तौबा कर लिया जाये! किसी एक को या कुछ एक को […]
लेकिन, केंद्र में सरकार गठन के तुरंत बाद से मनरेगा को लेकर सबसे असहज बीजेपी खेमा रहा. इस साल आम बजट से पहले राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने केंद्र सरकार को चिट्ठी लिखी कि मनरेगा कानून को बदला जाये, ताकि यह रोजगार गारंटी की अधिकार आधारित योजना न रहे, राहत पहुंचाने की कोई सामान्य सरकार योजना बन जाये. ऐसा होते ही योजना पर होनेवाले खर्च और योजना के आकार को सीमित करना सरकार के अख्तियार में आ जाता है. वसुंधरा राजे की इसी समझ का एक रूप बीते जुलाई में देखने में आया. जुलाई में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने संसद को सूचित किया था कि मनरेगा कानून में बदलाव अपेक्षित है.
इसको अमलीजामा पहनाने की कोशिश भी शुरू हो चुकी थी. इस कोशिश को झटका सुप्रीम कोर्ट के आदेश से लगा. जुलाई में सुप्रीम कोर्ट का आदेश आया कि मनरेगा के अंतर्गत काम करनेवाले को न्यूनतम मजदूरी राज्यों द्वारा तय की गयी दर से दी जाये, न कि केंद्र सरकार द्वारा तय दर से. फिलहाल मनरेगा के तहत मजदूरी राज्यों द्वारा तय दर से मिलती है. अलग-अलग राज्यों में यह दर अलग-अलग है, तो भी कहीं भी यह सीमा डेढ़ सौ रुपये से कम नहीं है. केंद्र सरकार चाहती थी कि मनरेगा के तहत 119 रुपये मजदूरी दी जाये. सुप्रीम कोर्ट का फैसला सरकार की मंशा के आड़े आया, तो अब कोशिश यह है कि मनरेगा कानून को ही बदल दो, न रहेगा बांस और न बजेगी बांसुरी.
मुद्रास्फीति के बढ़ने और आवंटित राशि की कमी के दोतरफा दबाव में मनरेगा का क्रियान्वयन लगातार बाधित होता रहा है. आवंटन में हो रही कमी को ध्यान में रखें, तो समझ में आता है कि सौ दिन की जगह क्यों अभी तक मनरेगा में गरीब ग्रामीण परिवारों को सालाना औसतन 50 दिन का भी रोजगार नहीं दिया जा सका. मनरेगा के अंतर्गत 2013-14 में कुल 10 करोड़ लोगों को रोजगार मिला. अगर मजदूरी और सामान पर खर्च की जानेवाली राशि का अनुपात बदला जाता है, तो मनरेगा के अंतर्गत रोजगार-सृजन की मौजूदा दर कायम रखने के लिए अतिरिक्त 20 हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी. चूंकि सरकार मनरेगा का बजट आवंटन बढ़ाने की जगह घटा रही है, विशेषज्ञों को आशंका है कि मनरेगा के रोजगार सृजन की क्षमता में 40 प्रतिशत की कमी आयेगी.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




