कृषि क्षेत्र की अनदेखी घातक

आम बजट से एक दिन पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में भारतीय अर्थव्यवस्था का आधारस्तंभ माने जानेवाले कृषि क्षेत्र की देश की जीडीपी में हिस्सेदारी कम होने और विगत एक दशक में किसानों की संख्या में भारी कमी की की बात कही. कृषि […]
आम बजट से एक दिन पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में वित्तीय वर्ष 2014-15 के लिए प्रस्तुत आर्थिक सर्वेक्षण में भारतीय अर्थव्यवस्था का आधारस्तंभ माने जानेवाले कृषि क्षेत्र की देश की जीडीपी में हिस्सेदारी कम होने और विगत एक दशक में किसानों की संख्या में भारी कमी की की बात कही.
कृषि प्रधान देश भारत में इसके प्रति किसानों की रुचि कम होना और वर्तमान कृषि नीतियों और सरकार द्वारा इस क्षेत्र की अनदेखी करना अपने देश के लिए घातक साबित हो सकता है. आज अगर किसान कृषि से मुंह फेर रहे हैं तो इसके लिए सरकार की लालीपॉप नीतियां भी जिम्मेवार हैं.
राशन में चावल मुफ्त, रहने के लिए इंदिरा आवास मुफ्त, बच्चों को स्कूल में भोजन मुफ्त, उम्र ढली तो वृद्धावस्था पेंशन मुफ्त, फिर कोई खेतों में काम करने क्यों जाये जब घर बैठे सरकार खर्च चला रही है.
नारायण कैरो, लोहरदगा
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