मुंह के बल गिरीं विपक्षी पार्टियां

यह बात ध्यान देने की है कि 16वीं लोकसभा के चुनाव में यूपीए सरकार और गैर-एनडीए पार्टियों ने अपनी पूरी लड़ाई विपक्ष के एक नेता के खिलाफ लड़ी, तब भी उन्हें हार ही मिली. जब-जब मोदी ने कहा कि समय आ गया है कि कांग्रेस अपने कामकाज का लेखा-जोखा जनता को सौंपे, तब-तब उन पर […]
यह बात ध्यान देने की है कि 16वीं लोकसभा के चुनाव में यूपीए सरकार और गैर-एनडीए पार्टियों ने अपनी पूरी लड़ाई विपक्ष के एक नेता के खिलाफ लड़ी, तब भी उन्हें हार ही मिली. जब-जब मोदी ने कहा कि समय आ गया है कि कांग्रेस अपने कामकाज का लेखा-जोखा जनता को सौंपे, तब-तब उन पर हमले तेज हुए, यहां तक कि मोदी को ही मुद्दा बना लिया गया.
महिला की जासूसी और शादी के मामले को भी बार-बार उछाला गया, लेकिन मोदी अपने खास सलाहकार अमित शाह के साथ मिशन 272 प्लस में जुट चुके थे. उन्होंने जातीय खांचों में बंटे उत्तर प्रदेश और बिहार की जातीय जुगलबंदी को पूरी तरह से बदल डाला और फिर जनता ने सत्ता में बैठे लोगों से कहा कि सिंहासन खाली करो क्योंकि नरेंद्र मोदी आने वाले हैं. अंतत: मोदी ने यह साबित भी कर दिखाया कि वे जो बोलते हैं, करके दिखाते भी हैं.
सुभाष वर्मा, ई-मेल से
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