इस्तीफा भ्रष्टाचार का ईलाज नहीं

Updated at : 20 Jul 2017 6:46 AM (IST)
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इस्तीफा भ्रष्टाचार का ईलाज नहीं

जब बड़े नेता मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगता है, तो विपक्षी नेता इस्तीफे की मांग करते हैं या कभी-कभी कोई मंत्री स्वयं अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं, तो यह भ्रष्टाचार रोकने की कोई ठोस पहल नहीं मानी जा सकती है. इस्तीफा देकर एक नया मोड़ पैदा किया जा सकता है, भ्रष्टाचार पर […]

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जब बड़े नेता मंत्री पर भ्रष्टाचार का आरोप लगता है, तो विपक्षी नेता इस्तीफे की मांग करते हैं या कभी-कभी कोई मंत्री स्वयं अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं, तो यह भ्रष्टाचार रोकने की कोई ठोस पहल नहीं मानी जा सकती है.
इस्तीफा देकर एक नया मोड़ पैदा किया जा सकता है, भ्रष्टाचार पर रोक नहीं क्योंकि लोग कई तरह से भ्रष्टाचार करते है, जिसे इस्तीफा देकर रोका नहीं जा सकता. भ्रष्टाचार दो शब्द क्रमश: भ्रष्ट और आचार से बना है जिसका अर्थ ही है गलत आचरण करना. अब कोई भी मंत्री या नेता या उच्च पद पर विराजित व्यक्ति ‘वयं राष्ट्रे जागृयाम् पुरोहित’ नीति पर चलने के लिए नहीं बैठता है वरन येन केन प्रकारेण धन बटोरना चाहता है. इनके लिए ऐसी सजा का प्रावधान होना चाहिए जिसे देखकर भ्रष्टाचार करने से पहले डर पैदा हो.
धीरेन्द्र कुमार मिश्र ‘इच्छुक’, गिरिडीह
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