सुप्रीम कोर्ट ने ज्ञानेश कुमार को नोटिस भेजकर मांगा जवाब, जानें सस्पेंड करने से इनकार करते हुए क्या कहा?

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सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग से जवाब मांगा

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सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को अंतरिम तौर पर पद से हटाने या उनके कामकाज पर रोक लगाने का आदेश देने से इनकार कर दिया. उनपर आरोप था कि उन्होंने चुनाव आयोग के दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों की सहमति के बिना एकतरफा फैसले लिए.

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5 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में मुख्य निर्वाचन आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई हुई. CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय बेंच में जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल थे. बेंच ने CEC ज्ञानेश कुमार को अंतरिम तौर पर सस्पेंड करने का आदेश देने से इनकार कर दिया. हालांकि, कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

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कोर्ट ने ECI से यह स्पष्ट करने को कहा है कि SIR से जुड़े जिन 14 फैसलों पर सवाल उठाए गए हैं, वे किस तरीके से लिए गए थे. क्या ये फैसले CEC ज्ञानेश कुमार ने अकेले लिए थे? क्या इन्हें चुनाव आयोग के दो अन्य निर्वाचन आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की आपत्तियों के बावजूद लिया गया?

इसके अलावा, कोर्ट यह भी जानना चाहता है कि विवादित फैसले चुनाव आयोग के बहुसदस्यीय स्वरूप और CEC Act की धारा 18 के मुताबिक लिए गए थे या नहीं. यानी क्या फैसले सर्वसम्मति से लिए गए थे और अगर सर्वसम्मति नहीं थी, तो क्या उन्हें बहुमत के आधार पर लिया गया? ECI को संबंधित फैसलों का रिकॉर्ड भी अदालत के सामने रखने को कहा गया है.

कोर्ट ने कहा, “नोटिस के बाद अगर वे आकर दिखाते हैं कि ABC फैसले सर्वसम्मति के बिना लिए गए थे, तो हम उन फैसलों को वापस ले लेंगे.”

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि अगर ECI के जवाब और रिकॉर्ड की जांच के बाद यह सामने आता है कि कोई फैसला जरूरी सर्वसम्मति या कानूनी प्रक्रिया का पालन किए बिना लिया गया था, तो कोर्ट उस फैसले को रद्द या वापस ले सकता है. CJI सूर्यकांत ने कहा कि चुनाव आयोग से कानून के मुताबिक काम करने की उम्मीद है और अगर किसी फैसले में कानून का उल्लंघन पाया गया तो उसे वापस लिया जाएगा.

किन लोगों से जवाब मांगा गया है?

कोर्ट ने केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, CEC ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू, निर्वाचन आयुक्त विवेक जोशी, डिप्टी चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और DG (IT) सीमा खन्ना को नोटिस जारी किया है और जवाब मांगा है.

याचिकाओं में किन मांगो का किया जिक्र

पटना निवासी राकेश कुमार सिंह ने एक याचिका दायर की है. इसमें सुप्रीम कोर्ट से पूछा गया है कि क्या CEC ज्ञानेश कुमार ने ऐसे अधिकारों का इस्तेमाल अकेले किया, जो पूरे चुनाव आयोग को मिलकर करने थे.

याचिका में ऐसे फैसलों को कानूनी अधिकार के बिना लिया गया फैसला घोषित करने की मांग की गई है. वहीं, अंतिम फैसला आने तक ज्ञानेश कुमार को CEC के कामकाज से अलग रखने की भी मांग की गई है.

याचिकाकर्ता का कहना है कि चुनाव आयोग एक बहुसदस्यीय संस्था है. इसलिए उसके सामूहिक अधिकारों का इस्तेमाल केवल CEC अकेले नहीं कर सकते. इसके लिए याचिका में संविधान के अनुच्छेद 324 और मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त अधिनियम, 2023 की धारा 18 का हवाला दिया गया है.

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दूसरी याचिका में क्या आरोप?

अधिवक्ता शैलेंद्र मणि त्रिपाठी की याचिका में भी CEC के कथित तौर पर एकतरफा फैसले लेने पर सवाल उठाया गया है. इसमें कथित वैधानिक उल्लंघनों को लेकर CEC और दूसरे अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की गई है.

याचिका में SIR के दौरान Form 6 में कथित बदलाव का भी मुद्दा उठाया गया है. Form 6 नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होता है. याचिकाकर्ता का आरोप है कि सॉफ्टवेयर के जरिए इसमें पूर्व SIR से जुड़े विवरण और वंश संबंधी जानकारी की जरूरत जोड़ी गई, जबकि इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया.

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