नया लेबर कोड: इन-हैंड सैलरी से लेकर काम के घंटों तक, नौकरीपेशा लोगों की जिंदगी में क्या-क्या बदलेगा?
नए लेबर कोड से क्या बदलेगा, सांकेतिक तस्वीर (PC : AI)
नए लेबर कोड से आपकी हर महीने की सैलरी स्लिप से लेकर काम के घंटों और छुट्टियों तक, नौकरीपेशा लोगों की जिंदगी में बड़े बदलाव आने वाले हैं. जानिए विस्तार से.
New Labour Code : नए लेबर कोड के लागू होने से सबसे बड़ा असर आपकी हर महीने मिलने वाली सैलरी स्लिप पर दिखेगा. नए नियम के तहत कर्मचारी की बेसिक सैलरी (मूल वेतन) कुल सीटीसी का कम से कम 50 फीसदी होना जरूरी होगा. इसका सीधा मतलब यह है कि भत्तों (अलोउंस) का हिस्सा 50 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता. बेसिक सैलरी बढ़ने से आपके पीएफ और ग्रेच्युटी का हिस्सा बढ़ जाएगा. भले ही हर महीने हाथ में आने वाली इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम लगे, लेकिन रिटायरमेंट के लिए आपकी बचत पहले से ज्यादा मजबूत हो जाएगी.
काम के घंटे और हफ्ते में तीन दिन की छुट्टी
कार्यस्थल और काम की दशाओं से जुड़े कोड में काम के घंटों को लेकर लचीलापन दिया गया है. हफ्ते में अधिकतम 48 घंटे काम करने की सीमा तय की गई है. अगर कंपनी रोजाना 12 घंटे काम कराती है, तो उसे कर्मचारी को हफ्ते में तीन दिन की छुट्टी देनी होगी. यानी कर्मचारी चार दिन काम और तीन दिन आराम का विकल्प चुन सकेंगे. इसके अलावा रोजाना तय समय से ज्यादा काम करने पर कंपनियों को दोगुना ओवरटाइम देना अनिवार्य किया गया है, जिससे काम के बदले सही भुगतान सुनिश्चित हो सके.
गिग वर्कर्स को सुरक्षा और साल भर में ग्रेच्युटी
सामाजिक सुरक्षा कोड (Social Security Code) में पहली बार जोमैटो, स्विगी और ओला जैसे प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को शामिल किया गया है. इन कामगारों को स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना बीमा और पेंशन जैसी सुविधाएं देने के लिए कंपनियों को सोशल फंड में योगदान करना होगा. वहीं फिक्स्ड टर्म यानी कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाले कर्मचारियों को अब पांच साल पूरे करने की मजबूरी नहीं होगी, उन्हें एक साल पूरा होते ही ग्रेच्युटी का हक मिल जाएगा.
कंपनियों के लिए ले-ऑफ के नियम और हड़ताल पर पाबंदी
औद्योगिक संबंध कोड (Industrial Relations Code) में कंपनियों के बंद होने या छंटनी से जुड़े नियमों को बदला गया है. अब 300 तक कर्मचारियों वाली कंपनियां बिना सरकार की पूर्व अनुमति के छंटनी या बंदी का फैसला ले सकेंगी, जिसकी सीमा पहले 100 कर्मचारियों की थी. इसके साथ ही कर्मचारियों के औचक हड़ताल पर जाने पर रोक लगाई गई है. किसी भी यूनियन या कर्मचारी को हड़ताल पर जाने से कम से कम 14 दिन पहले प्रबंधन को नोटिस देना जरूरी होगा, ताकि काम और उत्पादन अचानक ठप न हो.
लागू होने की स्थिति: राज्यों की अधिसूचना का इंतजार
संसद से चारों कोड पास हो चुके हैं, लेकिन श्रम का विषय केंद्र और राज्य दोनों की समवर्ती सूची में आता है. जब तक सभी राज्य अपने-अपने नियमों की अंतिम अधिसूचना जारी नहीं कर देते, तब तक यह पूरी व्यवस्था एक साथ लागू नहीं होगी. केंद्र सरकार लगातार राज्यों से समन्वय बनाकर नियमों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रही है, ताकि इसे देशभर में पारदर्शी तरीके से उतारा जा सके.
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