ISRO के परमाणु घड़ी में न सुई, न पेंडुलम; फिर कैसे बताती है इतना सटीक समय?

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GSLV-F18/NVS-03 रॉकेट और NVS-03 उपग्रह, फोटो- एएनआई

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Atomic Clock Explained: समय की गणना में एक सेकंड का मामूली अंतर भी सैटेलाइट की लोकेशन बिगाड़ सकता है. यही वजह है कि अंतरिक्ष में बेहद सटीक परमाणु घड़ियां लगाई जाती हैं. ISRO अब तीसरी स्वदेशी परमाणु घड़ी अंतरिक्ष में भेज रहा है. खास बात यह है कि यह घड़ी परमाणुओं की निश्चित आवृत्ति से समय मापती है.

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Atomic Clock: क्या आपने कभी सोचा है कि अंतरिक्ष में मौजूद सैटेलाइट आपके मोबाइल को इतनी सटीक लोकेशन कैसे बता पाते हैं? इसके पीछे एक खास तकनीक काम करती है, जिसमें परमाणु घड़ी (Atomic Clock) की अहम भूमिका होती है. इस घड़ी में न सुइयां घूमती हैं और न ही पेंडुलम हिलता है. इसके बावजूद इसे दुनिया में समय मापने वाले सबसे सटीक उपकरणों में गिना जाता है. अब भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) अपनी तीसरी स्वदेशी परमाणु घड़ी अंतरिक्ष में भेजने जा रहा है.

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दरअसल, परमाणु घड़ी समय की गणना परमाणुओं के ऊर्जा स्तरों में बदलाव से जुड़ी निश्चित आवृत्ति के आधार पर करती है. वैज्ञानिकों के अनुसार, सीजियम-133 परमाणु की विशेष आवृत्ति के 9,19,26,31,770 चक्रों की अवधि को एक सेकंड माना जाता है. परमाणु घड़ियों में माइक्रोवेव या ऑप्टिकल आवृत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है. इनकी मदद से मिलने वाला सटीक समय सैटेलाइट नेविगेशन, मोबाइल नेटवर्क, कंप्यूटर सिस्टम और डिजिटल संचार जैसी सेवाओं के लिए बेहद जरूरी है. लेकिन सवाल है कि आखिर परमाणुओं के कंपन से एक सेकंड की गणना कैसे होती है? अंतरिक्ष में इस घड़ी की जरूरत क्यों पड़ती है और भारत को इससे क्या फायदा होगा?

परमाणु घड़ी क्या होती है?

हमारे घरों की सामान्य घड़ियां समय मापने के लिए क्वार्ट्ज क्रिस्टल के कंपन या दूसरे यांत्रिक तरीकों का इस्तेमाल करती हैं. परमाणु घड़ी इनसे अलग है. यह परमाणुओं के ऊर्जा स्तरों के बीच होने वाले बदलाव से जुड़ी बेहद स्थिर आवृत्ति को समय मापने का आधार बनाती है.

बिना सुई और पेंडुलम के कैसे बताती है समय?

इसे एक आसान उदाहरण से समझिए. मान लीजिए आपके पास ऐसी मशीन है, जो हर सेकंड बिल्कुल निश्चित संख्या में कंपन करती है. आप उन कंपनों को गिनकर समय माप सकते हैं. परमाणु घड़ी भी कुछ इसी सिद्धांत पर काम करती है. फर्क यह है कि इसमें किसी साधारण मशीन के बजाय परमाणुओं की प्राकृतिक विशेषताओं का इस्तेमाल होता है.

सीजियम-133 की निर्धारित संक्रमण आवृत्ति के 9,192,631,770 चक्रों को एक सेकंड की परिभाषा का आधार माना गया है. यही वजह है कि परमाणु घड़ी बेहद सूक्ष्म समय-अंतर को भी माप सकती है.

अंतरिक्ष में परमाणु घड़ी की क्या जरूरत है?

इसे भी एक उदाहरण से समझते हैं. अब मान लीजिए आप किसी अनजान शहर में हैं और मोबाइल से अपनी लोकेशन जानना चाहते हैं. नेविगेशन उपग्रह रेडियो सिग्नल भेजते हैं, जिनमें समय से जुड़ी जानकारी भी होती है. इन सिग्नलों को आपके रिसीवर तक पहुंचने में कितना समय लगा, इससे उपग्रह और रिसीवर के बीच की दूरी का अनुमान लगाया जाता है. यहीं परमाणु घड़ी की अहमियत सामने आती है.

समय की गणना में मामूली गलती भी दूरी के अनुमान को प्रभावित कर सकती है. इसलिए सैटेलाइट नेविगेशन सिस्टम के लिए बेहद सटीक घड़ियां जरूरी हैं. इनके बिना लोकेशन और नेविगेशन संबंधी गणनाओं की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है.

ISRO शुक्रवार कौन-सी परमाणु घड़ी अंतरिक्ष में भेज रहा है?

ISRO ने शुक्रवार, 30 अक्टूबर की रात 11:51 बजे NVS-03 उपग्रह लॉन्च करने का कार्यक्रम तय किया है. यह उपग्रह भारत की अगली पीढ़ी की नेविगेशन उपग्रह शृंखला का तीसरा सदस्य है. इससे पहले NVS-01 और NVS-02 उपग्रहों में भी स्वदेशी परमाणु घड़ियां लगाई गई थीं. NVS-03 में भारतीय वैज्ञानिकों की विकसित परमाणु घड़ी के साथ विदेश से खरीदी गई परमाणु घड़ियां भी मौजूद हैं.

NavIC क्या है और परमाणु घड़ी से इसे क्या फायदा होगा?

NavIC का पूरा नाम Navigation with Indian Constellation है. यह भारत की अपनी क्षेत्रीय सैटेलाइट नेविगेशन प्रणाली है, जिसे पहले IRNSS कहा जाता था. इसे भारत और उसकी सीमाओं से लगभग 1,500 किलोमीटर तक के आसपास के क्षेत्र में लोकेशन और समय संबंधी सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए विकसित किया गया है.

NVS-03 में मौजूदा L5 और S बैंड के अलावा L1 सिग्नल की सुविधा भी शामिल है. इससे भविष्य में अधिक प्रकार के नेविगेशन उपकरणों में NavIC के इस्तेमाल को बढ़ावा मिल सकता है. स्वदेशी परमाणु घड़ी उपग्रह की समय संबंधी गणनाओं को विश्वसनीय बनाने में मदद करेगी.

आम आदमी के लिए सटीक समय इतना जरूरी क्यों है?

परमाणु घड़ी सिर्फ वैज्ञानिक प्रयोगशाला या अंतरिक्ष मिशन के काम नहीं आती. आज की डिजिटल दुनिया में सटीक समय कई जरूरी व्यवस्थाओं की बुनियाद है. बैंकिंग और डिजिटल भुगतान में लेनदेन का सही समय दर्ज होना जरूरी है. मोबाइल नेटवर्क में अलग-अलग उपकरणों के बीच समय का तालमेल चाहिए. बिजली ग्रिड, परिवहन और डेटा सेंटर भी भरोसेमंद समय-संबंधी जानकारी पर निर्भर करते हैं. ऐसे में देश की अपनी मजबूत समय और नेविगेशन व्यवस्था विकसित करना तकनीकी आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.

आधुनिक डिजिटल और महत्वपूर्ण अवसंरचना के लिए सटीक और समन्वित समय अत्यंत आवश्यक है. दूरसंचार, वित्तीय लेनदेन और डिजिटल भुगतान, बिजली ग्रिड, परिवहन, डेटा केंद्र, सरकारी सूचना प्रणाली और अन्य महत्वपूर्ण सेवाएं सटीक समय समन्वय और विश्वसनीय समय चिह्नों पर निर्भर करती हैं- विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय

NVS-03 मिशन भारत के लिए इतना अहम क्यों है?

इस मिशन का महत्व केवल एक नया उपग्रह अंतरिक्ष में पहुंचाने तक सीमित नहीं है. इसका संबंध भारत की नेविगेशन क्षमता, स्वदेशी तकनीक और सटीक समय उपलब्ध कराने की व्यवस्था से भी जुड़ा है. परमाणु घड़ी केवल समय नहीं बताएगी बल्कि उपग्रहों को सटीक स्थान और समय की जानकारी देने में मदद भी करेगी. यही कारण है कि आज रात ISRO का NVS-03 मिशन भारत की अंतरिक्ष तकनीक और आत्मनिर्भरता के लिहाज से काफी खास माना जा रहा है.

Also Read: 30 अक्टूबर को ISRO लॉन्च करेगा तीसरा NVS-03 सैटेलाइट, स्मार्टवॉच तक में काम करेगा L1 सिग्नल

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