Defence: भारत ने अगले दशक के लिए जारी किया रक्षा कूटनीति रोडमैप, रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने पर दिया गया है जोर

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विजन दस्तावेज का मकसद देश को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए स्वदेशी रक्षा प्लेटफार्मों के निर्यात को बढ़ावा देना है. समुद्री सुरक्षा के लिहाज से यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को सुरक्षा प्रदाता के तौर पर स्थापित करने का काम करेगा.

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Defence: अगले 10 साल के लिए वैश्विक स्तर पर देश की रक्षा भागीदारी के विजन और रोडमैप को रक्षा मंत्रालय ने जारी किया है. बुधवार को रक्षा मंत्रालय की ओर से 'रक्षा' नाम से जारी विजन दस्तावेज में  वैश्विक रक्षा साझेदारियों पर देश के रणनीतिक रोडमैप और दृष्टिकोण की रूपरेखा पेश की गयी. यह दस्तावेज देश की रणनीतिक प्रतिबद्धता में एक बड़े बदलाव का संकेत है, जिसमें राष्ट्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए वैश्विक सहयोग के साथ जोड़ा गया है. इससे सिर्फ दीर्घकालिक स्थिरता को ही बल नहीं मिलेगा बल्कि पारस्परिक विकास को भी बढ़ावा मिलेगा. इस दस्तावेज के जरिये भारत द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को और अधिक मजबूत करेगा और साथ ही संयुक्त सैन्य अभ्यासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया है. साथ ही मित्र देशों के साथ रक्षा के सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा कर क्षमता विकास को प्राथमिकता दी गयी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने यह दस्तावेज जारी किया. इसका मकसद देश को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करने के लिए स्वदेशी रक्षा प्लेटफार्मों के निर्यात को बढ़ावा देना है. समुद्री सुरक्षा के लिहाज से यह पहल हिंद महासागर क्षेत्र में भारत को सुरक्षा प्रदाता के तौर पर स्थापित करने का काम करेगा. 

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चार सिद्धांतों काे दी गयी है प्राथमिकता

रक्षा मंत्रालय का कहना है कि रक्षा कूटनीति भारत की विदेश नीति का एक मुख्य स्तंभ बनी रहेगी. दस्तावेज इस दिशा में अगले दशक के लिए एक स्पष्ट और व्यावहारिक दृष्टिकोण प्रदान करने में मदद करेगा. भारत की कोशिश है कि बदलते वैश्विक परिदृश्य में शांति, स्थिरता और नियम-आधारित व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बना रहे. इसके चार अहम सिद्धांत है. पहला रणनीतिक साझेदारी के जरिये द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सुरक्षा सहयोग को मजबूत करना, दूसरा क्षमता विकास के लिए संयुक्त सैन्य अभ्यासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों को बढ़ावा देना और मित्र देशों के साथ रक्षा के सर्वोत्तम तौर-तरीकों को साझा करना, तीसरा भारत में निर्मित रक्षा प्लेटफार्मों को बढ़ावा देकर देश को एक विश्वसनीय वैश्विक रक्षा विनिर्माण केंद्र के रूप में स्थापित करना और चौथा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को मजबूत करना है. कार्यक्रम के दौरान सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह, रक्षा उत्पादन सचिव संजीव कुमार, विदेश मंत्रालय में सचिव (पूर्वी) रुद्रेंद्र टंडन, वायु सेना उप प्रमुख एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित, नौसेना उप प्रमुख वाइस एडमिरल अजय कोचर, एकीकृत रक्षा स्टाफ प्रमुख एयर मार्शल तेजिंदर सिंह सहित रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे.

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