मिसाल : ब्रेन डेड महिला के अंगों ने सेना के दो जवान समेत पांच लोगों की बचाई जान
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 16 Jul 2022 8:20 AM
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, आवश्यक मंजूरी के बाद कमांड अस्पताल (दक्षिणी कमान) में प्रत्यारोपण टीम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और अलर्ट को जोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (जेडटीसीसी) और आर्मी ऑर्गन रिट्रीवल एंड ट्रांसप्लांट अथॉरिटी (एओआरटीए) को भी भेज दिया गया.
पुणे : मानवता की रक्षा के लिए ऋषि दधीचि ने अपने अंगों को दान कर दिया था. उनकी अस्थियों से ही वज्र का निर्माण किया गया था और फिर देवों ने असुरों का संहार किया था. आज महाराष्ट्र के पुणे में दिमागी तौर पर मृत (ब्रेन डेड) युवा महिला के अंगों ने पांच लोगों की जिंदगियां बचाकर इतिहास कायम कर दिया है. रक्षा जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, एक युवा ब्रेन-डेड महिला के अंगदान की वजह से पुणे के कमांड अस्पताल दक्षिणी कमान (सीएचएससी) में सेना के दो सेवारत सैनिकों सहित पांच लोगों की जान बचाई गई.
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, एक युवा महिला को एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बाद कमांड अस्पताल (दक्षिणी कमान) (सीएचएससी) में लाया गया था, लेकिन उसमें मस्तिष्क में जीवन के महत्वपूर्ण लक्षण मौजूद नहीं थे. ऐसे में अस्पताल के प्रत्यारोपण समन्वयक के साथ चर्चा के बाद परिवार ने चाहा कि महिला के अंग उन रोगियों को दान कर दिए जाएं, जिन्हें उनकी सख्त जरूरत है.
रक्षा जनसंपर्क अधिकारी के अनुसार, आवश्यक मंजूरी के बाद कमांड अस्पताल (दक्षिणी कमान) में प्रत्यारोपण टीम को तुरंत सक्रिय कर दिया गया और अलर्ट को जोनल ट्रांसप्लांट कोऑर्डिनेशन सेंटर (जेडटीसीसी) और आर्मी ऑर्गन रिट्रीवल एंड ट्रांसप्लांट अथॉरिटी (एओआरटीए) को भी भेज दिया गया. जुलाई, 14 की रात और 15 जुलाई की सुबह के दौरान किडनी जैसे अंगों को भारतीय सेना के दो सेवारत सैनिकों में प्रत्यारोपित किया गया. वहीं आंखों को सीएच (एससी) सशस्त्र बल मेडिकल कॉलेज परिसर के आई बैंक में संरक्षित किया गया और पुणे के रूबी हॉल क्लिनिक में एक मरीज को लीवर दिया गया.
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मौत के बाद अंगदान का एक उदार संकेत और सीएच (एससी) में एक अच्छी तरह से समन्वित प्रयास ने गंभीर रूप से बीमार पांच रोगियों को जीवन और दृष्टि प्रदान की. रक्षा मंत्रालय के पीआरओ ने कहा कि ऐसी परिस्थितियों में जरूरतमंद रोगियों के लिए अंग दान की अमूल्य भूमिका के बारे में जागरूक करती है. यह इस विश्वास को मजबूत करता है कि अपने अंगों को स्वर्ग में मत ले जाओ, भगवान जानता है कि हमें यहां उनकी आवश्यकता है.
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