नीतीश के शपथ लेते ही राजनीतिक समीकरण बनाने में जुटे क्षेत्रीय दल

Updated at : 22 Nov 2015 7:10 PM (IST)
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नीतीश के शपथ लेते ही राजनीतिक समीकरण बनाने में जुटे क्षेत्रीय दल

नयी दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू,राजद और कांग्रेस महागंठबंधन की जबर्दस्त जीत के बाद जहां केंद्र में सत्तारुढ भाजपा नीत राजग हार के कारणों की समीक्षा में जुटी हैं, वहीं विभिन्न क्षेत्रीय दल अगले दो वर्षो में असम, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, गुजरात, पंजाब समेत देश के 10 से अधिक राज्यों में […]

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नयी दिल्ली : बिहार विधानसभा चुनाव में जदयू,राजद और कांग्रेस महागंठबंधन की जबर्दस्त जीत के बाद जहां केंद्र में सत्तारुढ भाजपा नीत राजग हार के कारणों की समीक्षा में जुटी हैं, वहीं विभिन्न क्षेत्रीय दल अगले दो वर्षो में असम, केरल, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, उत्तरप्रदेश, गुजरात, पंजाब समेत देश के 10 से अधिक राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव की रणनीति और व्यूह रचना में लग गये हैं. भाजपा के वरिष्ठ नेता और केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘‘हर राज्य के राजनैतिक, सामाजिक एवं क्षेत्रीय समीकरण अलग होते हैं. इन सभी राज्यों में पार्टी अपनी दृष्टि के आधार पर रणनीति बना रही है.

बिहार या दिल्ली में हार हो अथवा महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, झारखंड में पार्टी की जीत हम सभी से सबक और अनुभव प्राप्त करके आगे बढ रहे हैं. ” बिहार में जदयू, राजद और कांग्रेस महागठबंधन की जीत के बाद नीतीश कुमार की ताजपोशी में गांधी मैदान में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व प्रधानमंत्री एच. डी. देवगौडा, राकांपा प्रमुख शरद पवार, नेशनल कांफ्रेंस नेता फारुक अब्दुल्ला, द्रमुक नेता एम के स्टालिन, झामुमो नेता हेमंत सोरेन, झविपा नेता बाबूलाल मरांडी के साथ आने को राजनीतिक विश्लेषक राष्ट्रीय राजनीति में नये मोड़ के रुप में देखते हैं जहां मोदी विरोधी गठबंधन में नीतीश कुमार को आगे करके एक विकल्प तैयार किया जा सके.

राजद के वरिष्ठ नेता रघुवंश प्रसाद सिंह ने कहा कि जहां भी दो दल से अधिक होते हैं, वहां पर गठबंधन बनता है और ऐसे में क्षेत्रीय दलों का अधिक महत्व होता है. जब भी कठिन घड़ी आई है बिहार ने रौशनी दिखाई है और यह आदिकाल से चला आ रहा है. बिहार चुनाव में भी दो तिहाई बहुमत देकर बिहार ने देश को एक राह दिखायी है. सार्वजनिक समारोहों में अब तक दूर दूर दिखने वाले लालू और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी का गांधी मैदान के मंच पर मिलन भविष्य की राजनीति के संकेत के रुप देखा जा रहा है. असम में एआईयूडीएफ के बदरुद्दीन अजमल का राहुल के साथ मंच पर बैठना महज संयोग नहीं बल्कि असम विधानसभा चुनाव से जोड़ कर देखा जा रहा है.

जदयू नेता अली अनवर अंसारी ने कहा कि बिहार विधानसभा चुनाव परिणाम ने निश्चित तौर पर देश की राजनीति को एक दिशा दी है और उत्तरप्रदेश, असम, पंजाब, पश्चिम बंगाल जैसे विभिन्न राज्यों के लिए यह उदाहण बन सकता है. बिहार महासमर ने स्पष्ट कर दिया है कि कांग्रेस जैसी राष्ट्रीय पार्टी नीतीश कुमार के नेतृत्व को मान रही है, अभी भले ही यह राज्य स्तर पर हो. देश की सियासी शून्यता में नीतीश कुमार को भाजपा विरोधी राजनीति के चेहरे के रुप में उभरे हैं. अभी सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव महागठबंधन से भले ही दूर दिख रहे हों लेकिन वाराणसी के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लोकसभा क्षेत्र होने और 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा नीत राजग के 80 में से 73 सीट जीतने को देखते हुए उत्तरप्रदेश में सत्तारुढ़ सपा को सबसे बड़ी चुनौती भाजपा से ही मिलने वाली है. हालांकि पटना में न्यौते के बावजूद मुलायम सिंह और बसपा प्रमुख मायावती के नहीं पहुंचने को एक बडे महागठबंधन के ठोस आकार लेने में अवरोध के रुप में देखा जा रहा है.

नकवी ने हालांकि नीतीश के शपथग्रहण में विभिन्न दलों के नेताओं के जुटने को तवज्जो नहीं देते हुए कहा कि शपथ ग्रहण में विभिन्न दलों के नेताओं के जुटने को गठबंधन बनने या इससे जुडी राजनीति के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. लेकिन अगर क्षेत्रीय दलों का कोई गठबंधन बनता भी है, तो भाजपा का भी गठबंधन है. हम उसका मुकाबला करेंगे. साल 2016 में असम, केरल, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, पुडेचेरी में चुनाव होने हैं जबकि 2017 में गोवा, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश, गुजरात, पंजाब, मणिपुर में विधानसभा चुनाव होने हैं. पंजाब में कांग्रेस, शिरोमणि अकाली दल और भाजपा के लिए चुनौती ‘आप’ से ही है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में आप ने चार सीटें जीती थी. आगामी विधानसभा चुनाव में वह मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने को तत्पर है. आप के नेता एवं दिल्ली सरकार में मंत्री गोपाल राय ने कुछ ही दिन पहले कहा है कि उनकी पार्टी पंजाब और उत्तरप्रदेश चुनाव को गंभीरता से लेगी.

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