पंचतत्व में विलीन हुए अटल बिहारी वाजपेयी, दत्तक पुत्री नमिता ने दी मुखाग्नि, रो पड़ा आसमान

Updated at : 18 Aug 2018 7:09 AM (IST)
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पंचतत्व में विलीन हुए अटल बिहारी वाजपेयी, दत्तक पुत्री नमिता ने दी मुखाग्नि, रो पड़ा आसमान

नयी दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि के बीच शुक्रवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गये. उनका अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया गया और बंदूकों की सलामी के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गयी. इस दौरान यमुना के किनारे राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर हजारों लोग मौजूद थे. उनकी दत्तक […]

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नयी दिल्ली : पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि के बीच शुक्रवार शाम पंचतत्व में विलीन हो गये. उनका अंतिम संस्कार पूर्ण राजकीय सम्मान के साथ किया गया और बंदूकों की सलामी के साथ उन्हें अंतिम विदाई दी गयी. इस दौरान यमुना के किनारे राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर हजारों लोग मौजूद थे. उनकी दत्तक पुत्री नमिता कौल भट्टाचार्य ने जब उनकी पार्थिव देह को मुखाग्नि दी तो हल्की बूंदाबांदी के बीच माहौल ‘अटल बिहारी अमर रहें’ के गगनभेदी नारों से गूंज उठा.

वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए उनके अंतिम संस्कार में देशभर से जुटे नेताओं के साथ ही कई अन्य देशों के नेता भी पहुंचे और अत्यंत लोकप्रिय रहे वाजपेयी को श्रद्धांजलि अर्पित की. अंत्येष्टि स्थल पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविन्द, उपराष्ट्रपति एम वैंकैया नायडू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह, वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, गृह मंत्री राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण, विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह तथा आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत सहित तमाम हस्तियां वाजपेयी को अंतिम विदाई देने के लिए मौजूद थीं.

केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तथा गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी सहित कई राज्यों के मुख्यमंत्री इस अवसर पर मौजूद थे. राष्ट्रीय स्मृति स्थल पर महात्मा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के भी स्मारक हैं। भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक, अफगानिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजई , बांग्लादेश के विदेश मंत्री अबुल हसन महमूद अली और पाकिस्तान के कार्यवाहक कानून मंत्री अली जाफर सहित कई विदेशी हस्तियां वाजपेयी के अंतिम संस्कार के समय मौजूद थीं.

जिस तिरंगे ध्वज में वाजपेयी का पार्थिव शरीर लिपटा था, वह ध्वज पूर्व प्रधानमंत्री की नातिन निहारिका को सौंप दिया गया। वाजपेयी का कल दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में निधन हो गया था। वह 93 साल के थे. उनके अंतिम संस्कार में लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। बहुत से लोगों ने सफेद कपड़े पहन रखे थे और बहुत से लोग समावेशी भारत की वकालत करने वाले इस नेता की याद में रो रहे थे. गम और गर्मी के चलते कई लोग बेहोश भी हो गये जिनमें कुश चतुर्वेदी भी शामिल थे.

बिहार के सीवान से ताल्लुक रखने वाले 27 वर्षीय युवक ने कहा, ‘‘मेरा कोई राजनीतिक झुकाव नहीं है, लेकिन मैं एक बार (पूर्व राष्ट्रपति) कलाम तथा वाजपेयी से मिलना चाहता था। जब वे जीवित थे, मैं उनसे नहीं मिल पाया, लेकिन आज मैं यहां आ गया.’ वाजपेयी के पार्थिव शरीर को उनके घर से दीनदयाल उपाध्याय मार्ग स्थित भाजपा मुख्यालय ले जाया गया और फिर अंतिम यात्रा राष्ट्रीय स्मृति स्थल के लिए रवाना हुई. इस दौरान दिल्ली की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा जो खामोशी से लेटे अपने नेता की अंतिम झलक पाने को आतुर थे.

पूर्व प्रधानमंत्री का शव फूलों से सजी तोपगाड़ी में रखा था और हजारों लोग उसके पीछे-पीछे चल रहे थे. इनमें से कुछ धीरे-धीरे चल रहे थे तो कुछ दौड़ रहे थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह भी तोपगाड़ी के साथ लगभग 3.5 किलोमीटर की दूरी तक पूरे रास्ते पैदल चले। मोदी ने बाद में कहा कि देश के हर कोने और समाज के हर तबके से लोग राष्ट्र को असाधारण योगदान देने वाले असाधारण व्यक्तित्व को श्रद्धांजलि देने आये.

प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया, ‘‘भारत आपको नमन करता है अटल जी.’ भाजपा मुख्यालय से लेकर राष्ट्रीय स्मृति स्थल तक सड़कों पर हर जगह जनसैलाब था। इस दौरान सुरक्षाकर्मी कड़ी निगाह रखे हुए थे जिससे कि कोई अप्रिय घटना न हो पाये. यह असाधारण दृश्य था जो इससे पहले मई 1991 में कांग्रेस नेता एवं पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के अंतिम संस्कार के समय देखा गया था. तीन बार प्रधानमंत्री रहे वाजपेयी के निधन की खबर सुनकर भीड़ गुरुवाररात से ही जुटनी शुरू हो गयी थी. पहले भीड़ अस्पताल में एकत्र हुई, फिर कृष्ण मेनन मार्ग स्थित उनके घर पर और फिर भाजपा मुख्यालय में. वर्ष 1947 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) में शामिल हुए वाजपेयी एक के बाद एक सोपान चढ़ते गए और भाजपा के सबसे दिग्गज नेता बन गये. वह अपना कार्यकाल पूरा करने वाले पहले गैर कांग्रेसी प्रधानमंत्री थे. युवा, बूढ़े, स्त्री-पुरुष सभी भाजपा कार्यालय के बाहर अपने नेता की अंतिम झलक पाने को एकत्र थे। इनमें से कुछ लोग अपने बच्चों को साथ लेकर आए थे. कुछ लोग बाहर एक नीम के पेड़ पर चढ़े हुए थे जो वाजपेयी के अंतिम दर्शन करना चाहते थे. पार्टी मुख्यालय में प्रधानमंत्री और विभिन्न मंत्रियों तथा पार्टी कार्यकर्ताओं ने दिवंगत वाजपेयी को श्रद्धासुमन अर्पित किये.

वाजपेयी के पार्थिव शरीर के साथ उनकी एक मुस्कराती बड़ी तस्वीर लगी थी तथा दूसरी तरफ भाजपा का झंडा लगा था. अपने नेता की अंतिम यात्रा देख सड़कों पर जुटे लोग बेहद भावुक और गमगीन नजर आ रहे थे. इससे पहले शुक्रवार सुबह के समय वाजपेयी के पार्थिव शरीर को उनके घर से पांच किलोमीटर दूर भाजपा मुख्यालय ले जाते समय जगह-जगह अटल बिहारी वाजपेयी ‘अमर रहें’ के नारे लगते रहे. गाड़ी के साथ-साथ चल रहे लोग ‘जब तक सूरज चांद रहेगा अटल जी का नाम रहेगा’, ‘भारत माता की जय’ और ‘वंदे मातरम’ के नारे भी लगा रहे थे.

भीड़ में गणेशन (38) और तमिलनाडु से आए 45 वर्षीय नदेसन भी थे. उसने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद हिन्दी और अंग्रेजी मिली-जुली भाषा में वाजपेयी की तारीफ में कहा, ‘‘अच्छा नेता, अच्छा सांसद, खरा आदमी।’ भीड़ में 25 वर्षीय आकाश कुमार भी था जो लगभग 70 किलोमीटर दूर बागपत से स्कूटर चलाकर यहां पहुंचा था. आकाश ने कहा, ‘‘जब मैंने अटल जी का भाषण सुना तो उस समय मैं शायद तीसरी या चौथी कक्षा में था. मैं सचमुच उनकी कविताएं पसंद करता हूं.’

भाजपा नेता अनुराग ठाकुर ने कहा कि श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से यह पता चलता है कि अटल लोगों के दिलों में रहते थे। ठाकुर ने संवाददाताओं से कहा, ‘‘सिर्फ भारत ने ही अपना एक नेता, बेटा नहीं खोया है, बल्कि विश्व ने एक राजनेता खोया है.’ भाजपा का उदारवादी चेहरा माने जाने वाले वाजपेयी पहली बार 1996 में प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन तब वह 13 दिन ही प्रधानमंत्री रह पाए थे. 1998 में वाजपेयी फिर प्रधानमंत्री बने, लेकिन इस बार उनकी सरकार 13 महीने तक ही चली.

प्रधानमंत्री के रूप में वाजपेयी के साथ 1999 में राजग फिर सत्ता में आया और इस बार उनकी सरकार ने कार्यकाल पूरा किया.

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